फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन की तरफ से आयोजित प्रेस वार्ता में कहा गया कि सरकारी हुक्मरान संगठन की मांगों को लेकर गंभीर नही होतें है| कई मांगे पूर्व में की गयी लेकिन लिखित भरोसे के बाद भी उन पर कार्यवाही नही हुई| एसोसिएशन नें कहा कि उनकी प्रमुख मांग है कि चिकित्सक की तरह फार्मासिस्ट को भी दवा पर्चे पर लिखनें का अधिकार मिले|
लोहिया अस्पताल सभागार में आयोजित वार्ता में संगठन के मंत्री डॉ० जितेन्द्र सिंह नें कहा कि सरकार फार्मासिस्टों की मांगो को ना मानकर खुद आंदोलन के लिए विवश कर रही है| समय रहते समस्याओं का समाधान नही हुआ तो हालात विस्फोटक होंगे| कुल आठ प्रमुख मांगे अभी लंबित है| जिसमे फार्मासिस्ट का पद नाम बदलकर फार्मेसी अधिकारी दिया जाये| स्वास्थ्य केन्द्रों और उपकेन्द्रों पर पदों का सृजन किया जाये| जिससे प्रशिक्षित व्यक्ति के द्वारा आम जनमानस को चिकित्सा सुबिधा मिल सके| सम्वर्ग का पुनर्गठन किया जाये| इसके साथ ही चिकित्सक की तरह फार्मासिस्ट को भी दवा पर्चे पर लिखनें का अधिकार मिले|
संगठन के अध्यक्ष डॉ० चक्र सिंह, उपाध्यक्ष कमलेश शाक्य, संयुक्त मंत्री डॉ० योगेश यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ० अभिषेक शुक्ला, सम्प्रेक्षक डॉ० राजेन्द्र सिंह, संगठन मंत्री डॉ० अरविन्द प्रजापति व कोषाध्यक्ष डॉ० गरिमा सचान आदि रहे|
चिकित्सक की तरह फार्मासिस्ट को भी मिले दवा लिखनें का अधिकार
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