फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) ग्रामीण क्षेत्र में अभी पंचायत चुनाव की सरगर्मियाँ जोर भले ही न पकड़ी हों, लेकिन चौपाल पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दावेदारों ने अन्दरखाने में तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। सम्भावित उम्मीदवारों को अब आरक्षण फाइनल होने का इन्त़जार है। इसके बाद चुनावी घमासान शुरू हो जाएगा।
पंचायत चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की तैनाती कर दी गई है| उधर, ग्राम पंचायतों में चुनावी हलचलें धीरे-धीरे शुरू होने लगी हैं। पूर्व हो चुके प्रधान,बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य अगली पारी खेलने की तैयारी में हैं तो कुछ नए उम्मीदवारों ने भी चुनावी महासंग्राम में उतरने की तैयारी तेज कर ली है। इन सभी सम्भावित उम्मीदवारों की निगाह सीटों के आरक्षण पर टिक गई है। दरअसल, शासन द्वारा चक्रानुक्रम में सीटों का आरक्षण किया जाता है। चक्र घूमेगा तो कोई भी सीट आरक्षित हो जाएगी। ऐसा होने पर अन्य जाति के प्रत्याशी आरक्षित सीट से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यही कारण है कि सम्भावित उम्मीदवारों ने चुनाव में उतरने की तैयारी तो शुरू कर दी है, लेकिन अभी घोषणा नहीं की है। यह सम्भावित उम्मीदवार नामांकन की औपचारिकताएं पूर्ण कराने में जुट गए हैं। दरअसल, प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य पद के लिए नामांकन पत्र भरते समय गृहकर, बिजली बिल, जलकर, जलमूल्य व अन्य सभी प्रकार के टैक्स का भुगतान कर नो-ड्यूस प्रमाण पत्र जमा करना होता है। इसके अलावा कुछ विभागों की एनओसी भी नामांकन के साथ संलग्न करनी होती है।
चुनाव की तारीख को लेकर फिलहाल असमंजस बना हुआ है। पहले माना जा रहा था कि बोर्ड परीक्षाओं के बाद ही पंचायत चुनाव होंगे, जिससे मई व जून माह में चुनाव की सम्भावनाएं बनने लगी थीं, लेकिन अब बताया जा रहा है कि बोर्ड परीक्षाओं की तिथि आगे बढ़ाई जा रही है, जिससे मार्च व अप्रैल माह में पंचायत चुनाव होने की अटकलें शुरू हो गई हैं।
आरक्षण को लेकर पंचायत चुनाव के दावेदारों में बढ़ रही बेचैनी
[adrotate banner="3"]
[adrotate banner="2"]


