देव दीपावली पर मां गंगा ने पहना दीपों का अनोखा चंद्रहार

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फर्रुखाबाद:(नगर प्रतिनिधि) कार्तिक मास की पूर्णिमा पर अदभुत अलौकिक और दिव्‍य दीपावली नें पांचाल घाट पर अपनी स्‍वर्णिम आभा बिखेरी। दीपों की दपदप, विद्युत झालरों की जगमग, सुरों की खनक से पूरा माहौल रंगीन सा लगा| फूलों की सुवास तो कहीं चटकीले रंगों का वास। सच कहें तो गंगा की लहरों पर सतरंगी इंद्रधनुष आकाश से उतर आया। देव दीपावली पर रविवार की शाम को शहर का पांचाल घाट रोशनी से जगमगा उठा। ऐसा नजारा लग रहा था कि जैसे तारे जमीन पर उतर आए हों। एक साथ दीपक जल रहे थे। दीपक की कतारें लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थीं। दीप जलते ही सेल्फी खींचने वालों का रेला लग गया।
शहर के पांचाल घाट पर कैलाश सेवा संस्थान के द्वारा दीपदान और महाआरती का आयोजन किया गया| जिसमे कुंडली से काल सर्प योग समाप्त करने के लिए 1100 तांबे के सर्प पूजन कर गंगा में अर्पित किये गये| वहीं 2100 दीपों से घाट को रोशन किया गया|  विभिन्न संगठनों के लोग दोपहर से ही दीपदान की तैयारी में जुटे हुए थे। महिलाएं व छात्राएं आकर्षक ढंग से दीप सजा रही थीं। जैसे ही शाम हुआ, एक साथ सभी दीपक जलाए गए। झिलमिल सितारों की तरह रोशनी से नहा उठा। पुलिस अधीक्षक डॉ० अनिल कुमार मिश्रा के साथ अन्य कई अधिकारियों नें हिस्सा लिया| अस्ताचल की राह पर जाते सूरज के रथ के घोड़ों की टाप थमने के साथ शंखनाद गूंजा।  इसके साथ घंटा -घडिय़ाल की समवेत टनकार और घाटों से गंगा की लहरों तक बस दपदपाते दीप ही दीप नजर आए। आचार्य प्रदीप शुक्ला नें महाआरती का से और चार-चाँद लगा दिये|
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था। इसी वजह से इसे त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इसी के साथ कार्तिक पूर्णिमा की शाम भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार उत्पन्न हुआ था। साथ ही कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गंगा स्नान के बाद किनारे दीपदान करने से दस यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है।
इस दौरान अंजुम दुबे, संजीब वाजपेयी, नीरज वाजपेयी, विपिम वाजपेयी, नमामि गंगे संयोजक रवि मिश्रा, कैलाश शुक्ला, संजीब शुक्ला, प्रमोद द्विवेदी, क्रांति पाण्डेय आदि रहे|

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