कविताओं के माध्यम से बिखेरे होली के रंग

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फर्रुखाबाद:(नगर प्रतिनिधि) रंगो और आपसी प्रेम सद्भावना के त्योहार होली के अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें कवियों ने अपने-अपने तरीके से होली के रंगों का बखान किया।
नगर के नितगंजा स्थित उपडाकघर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की तरफ से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया| जिसमे गंगा-जमुनी तहजीब के साथ ही साथ अपनी प्रेम के रंगों को विखेंरने पर काव्य पाठ हुआ| होली के रंगों का मुख्य रूप से बखान किया। कविताओं से होली के रंगों के महत्व को विभिन्न तरीकों से लोगों के सामने व्यक्त किया। उन्होंने कविताओं के माध्यम से सभी से होली को प्रेम के साथ मनाने की भी अपील की।
कवियों नें काव्यपाठ के माध्यम से संदेश दिया कि होली लोगों के बीच प्रेम को बढ़ाने का काम करती है। इसलिए लोगों को छोटी मोटी बातों को लेकर जिन लोगों से मनमुटाव चल रहा है। उनको होली पर रंग लगाकर मनमुटाव को समाप्त करें।
महेश पाल उपकारी नें कहा गंगा जमुनी तहजीब को जो मिलकर आग लगाते है, वो छिपे हुए गद्दार है जो नफरत के बिज उगाते है| कौशलेन्द्र बेबाक नें कहा कि होली की रूत आयी लायी फागुन की बहार, चारो दिशाओं में छायी रंगो की फुहार| वैभव सोमबंशी सुभग नें काव्य पाठ करते हुए कहा कि देखो आज आदमी कितना व्यस्त हो गया, ले इंड्राइड फोन उसी में मस्त हो गया| आनन्द भदौरिया नें कहा कि नाम का है मानव गुलाम काम बासना का , कपड़ो में घूमता नगन देख लीजिए|
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