मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता के लिये सरकार की नयी पहल

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विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना के अन्तर्गत परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता बनाये रखने के लिये एक नयी पहल की गयी है। इसके तहत अब प्रत्येक विद्यालयों पर आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया है। यही नहीं अब नमक में आयोडीन के स्तर का सिर्फ कंपनी के लेबल भर से विश्वास नहीं किया जायेगा। बल्कि हर स्कूल पर टेस्ट किट की सहायता से इसे जांच कर ही प्रयोग किया जायेगा।

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मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा जारी नये निर्देशों के अनुसार अब प्रत्येक प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों पर मध्याह्न भोजन में आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करने के लिये एक टेस्ट किट भेजा जा रहा है। निर्देशों के मुताबिक नमक के लेबल मात्र से ही उसमें आयोडीन के मात्रा का विश्वास न करके खुद परीक्षण करना अनिवार्य होगा।

भेजे जा रहे टेस्ट किट में दो घोल है जिनमें एक सफेद ढक्कन का तथा दूसरा लाल ढक्कन का है लाये गये नमक के पैकेट में से एक चम्मच मात्रा लेकर उसमें पहले सफेद ढक्कन वाले घोल से एक बूंद डालना है तथा फिर लाल ढक्कन वाले पुर्नपरीक्षण घोल से एक बूंद डालना है, जिससे नमक का रंग बदल जायेगा।

टेस्ट किट पर नमक में आयोडीन मात्रा की तुलना करने के लिये चार रंगीन निशान बनाये गये है। नमक के बदले रंग की तुलना किट पर बने पटटी से मिलान कर प्रतिशत मात्रा ज्ञात की जायेगी। यदि घोल डालने पर रंग नहीं बदला तो उसमें आयोडीन की मात्रा शून्य होती है। हर विद्यालयों पर भेजे गये किट के साथ यूनीसेफ द्वारा आयोडीन नमक की उपयोगिता तथा बालकों के मन एवं बुद्धि पर पड़ने वाले प्रभावों सम्बंधी चार्ट भी भेजा गया है।

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