बेसिक विधालयो में जंग खा गये लाखो की लागत से लगे अग्निशमन यंत्र

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fayrफर्रुखाबाद: बेसिक शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए सरकारो ने कई प्रयास किये योजनाये भी बनाई गयी कुछ लागू भी हुई लेकिन उनको विभाग के दलालों की पार की नजर से कोई नही बचा सका| जिसके चलते योजनाये एक बार चलने के बाद दोबारा केबल चंद कागजो में ही चल कर दम तोड़ गयी| हाल यह हुआ की बच्चों को माया मिली ना राम| एक योजना परिषदीय विधालयो के लिए चलायी गयी है जिसको चलते वर्षो का समय भी बीत गया| दरअसल बात हो रही है मिडडेमील योजना के तहत विधालयो में अग्नि शमन यंत्रो को लगाने की| जो बिना गुणबत्ता व बिना मानक के ठेका पर ठेंगा दिखा कर लगा दिये गये| अग्निशमन यंत्र को लगाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था| लेकिन अब आलम यह है की विधालयो में योजना के तहत अग्निशमन यंत्र अब जंग खा रहे है| लेकिन सुध लेने बाला कोई नही|
शासन के आदेश पर जनपद के विधालयो में दो अग्निशमन यंत्र, एक एंगल, चार बाल्टी, एक फावड़ा भेजे गये थे| जिन्हें विधालयो की चारदीवारी में लटका दिया गया| अब शुरू हो गया खाऊ कमाऊ का फार्मूला इनके रखरखाव के लिए प्रति वर्ष सिलेंडर में नई गैस भरबाने का लाखो रुपये आता है| लेकिन जादातर विधालयो के प्रधानाचार्ययोओ को यह भी मालूम की गैस कब और कितने रूपये में भरायी जाती है| इस अज्ञानता का पूरा आनन्द जनपद के अधिकांश व्लाको के खण्ड शिक्षा अधिकारी व एबीआरसी मिलकर उठा रहे है|
वही निरिक्षण कर्ता अधिकारी भी अपनी आँखों पर पट्टी बांध कर निरिक्षण कर लेते है| लाखो रूपये के इस बन्दर बाँट को कौन कंहा से संचलित कर रहा है यह भी कोई नही जानता| मजे की बात यह है इसके बाद भी धनराशि निकाल दी जाती है| बच्चों की सुरक्षा राम भरोसे चल रही है|

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