वोटरों ने बड़ाई शराब की बिक्री

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फर्रुखाबाद: पंचायत चुनाव के कारण शराब ठेकेदारों की चांदी है वहीं कच्ची शराब बनाने वालों के तो भाग्य ही खुल गए हैं. वह १ महीने में ही ६ माह तक की कमाई करने के लिए दिन रात शराब बनाने में जुट गए हैं.

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वैसे तो पूरे जिले में पंचायत चुनाव का बुखार फ़ैल गया है. लेकिन पहले चरण वाले ब्लाक बढपुर व् कमालगंज में चुनाव प्रचार जोर पकड़ने लगा है. प्रत्याशी का प्रचार करने वाले ख़ास समर्थकों के लिए शराब की कोई कमी नहीं है. वहीं मतदाता भी शराब पीने के कारण ही नखरे दिखा रहे हैं, जिसको नशा करा दिया जाता वही प्रत्याशी का खुलकर समर्थन करने के साथ ही जीत जाने तक का आशीर्वाद देने लगता है.

आरक्षण ने इस बार उल्टा कर दिया है जो लोग आरक्षण के कारण चुनाव मैदान से बाहर हो गए हैं. उनकी शराब पीने के लिए उड़कर लगी है. अब उनको शराब पिलाकर चुनाव प्रचार करने के लिए मनाया जा रहा है जो बीते चुनाव तक स्वयं शराब पिलाते थे. जो ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गयी है. वहां के दलित प्रत्याशियों को सवर्णों को शराब पिलाकर खुश करना पड़ रहा है.

शराब ठेकेदारों की करीब १० % बिक्री बड़ गयी है. आंधी के दौर में नकली शराब की भी बिक्री शुरू हो गयी है. ठेकेदारों को ५० पौआ की पेटी थोक में १८८९ रुपये की मिलती है को १८०० रुपये तक में बेंचा जा रहा है, खरीदारों को तो सस्ती दारू चाहिए.

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