तटवर्ती गांवों में गंगा व रामगंगा की तबाही जारी, अभी और बिगड़ेंगे हालात

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FARRUKHABAD : जनपद के ऊंचे इलाकों में निवास करने वालों के लिए भले ही गंगा व रामगंगा के तट पर बसे होना सौभाग्य की बात हो लेकिन गंगा के तटवर्ती व निचले इलाकों में बसे गांवों के लोग गंगा व रामगंगा की बाढ़ का दंश पिछले एक माह से झेल रहे हैं। जिससे ग्रामीण अब तबाही के कगार पर पहुंचने वाले हैं। पशुओं के चारे की समस्या के साथ ही अब अनेक बीमारियों ने भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिये हैं। वहीं गंगा व रामगंगा में शुक्रवार को और पानी छोड़े जाने से अभी हालात और बिगड़ सकते हैं।

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यह फर्रुखाबाद जनपद का दुर्भाग्य कहें या प्राकृतिक आपदा, जनपद के लगभग एक तिहाई ग्रामों के निवासी प्रति वर्ष बरसात के दिनों में अन्यत्र निर्वासित होते हैं और दोबारा आकर उन्हीं तलहटी के गांवों में अपना घर बसा लेते हैं। जिससे आर्थिक स्थिति बिगड़ने के साथ ही इन लोगों की मानसिक व शारीरिक स्थिति भी बिगड़ना स्वाभाविक है। बाढ़ पीडि़त बच्चों की शिक्षा व्यवस्था से लेकर अन्य देखरेख न हो पाने से इन क्षेत्रों के बच्चे काफी पिछड़ जाते हैं। लेकिन आज तक किसी जनप्रतिनिधि या प्रशासन ने इस बात की तरफ ध्यान नहीं दिया।

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बीते लगभग एक माह से गंगा के तटवर्ती ग्रामों में तबाही मचा रहा गंगा का पानी भरा हुआ है। गांवों में आने जाने के मार्ग भी अवरुद्व हो चुके हैं। स्कूलों में पढ़ाई होने की बजाय उनमें भी पानी भरा है। बच्चों को शिक्षा तो दूर उन्हें किताबें और बस्ते तक का ध्यान नहीं है कि वह कहां है, उन्हें तो सिर्फ जान बचाने व दो वक्त की रोटी जुटा पाने के लाले पड़े हैं। लेकिन प्रशासन ने कागजों में तो मोटर वोट, बाढ़ निगरानी चैकियां और न जाने क्या क्या राहत सामग्री जुटा रखी है लेकिन हकीकत में आज तक इन बाढ़ पीडि़तों के गांवों में कोई स्वास्थ्यकर्मी नीली पीली टिकिया तक बांटने नहीं पहुंचा।

वहीं माना जा रहा है कि इस गंगा में बाढ़ समय से पहले आ जाने से तटवर्ती ग्रामों की जायद की फसल भी नष्ट हो गयी, इसके साथ ही पशुओं के चारे की भी अभी से ही समस्या उत्पन्न हो गयी है। इसके अलावा शुक्रवार को नरौरा बांध से गंगा में एक लाख 48 हजार क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया है। जिससे अगले 24 घंटे में बाढ़ की विभीषिका और भी गंभीर हो जाने की संभावना जतायी जा रही है। लोग अपने घरों से दोबारा पलायन करने लगे हैं। गंगा का जल स्तर 136.75 को छूने लगा है। जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि आगे आने वाले दिनों में हालात और भी खराब हो सकते हैं।

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