फर्रुखाबाद: कोई नई नवेली दुल्हन से कोई चूक हो जाए तो उसे गलती कही जा सकती है| नए घर में आई है| धीरे धीरे नए घर के रीति रिवाज और तौर तरीके सीख जाएगी| मगर जब पुरानी बहु को सास का दर्जा मिले और उसके कार्यकाल में उलटे पुल्टे काम होने लगे तो इसे क्या कहेंगे| चर्चा आजकल भाजपा के झंडे को लेकर है| जिलाध्यक्ष की अध्यक्षता में ताबड़तोड़ बैठके हो रही है| इन बैठको में एक बैनर लगता है ताकि मीडिया में भाजपा सिम्बल छप जाए| मगर इस बैनर पर जो झंडे का रंग छपा है वो तो उल्टा पुल्टा है| और कितने ही बार ये झंडा मीडिया में छप चुका है फिर भी नहीं बदला गया| कम से कम पुराने भाजपाई जिलाध्यक्ष दिनेश कटियार से तो ये उम्मीद कोई नहीं रखता| आखिर वे अध्यापक जो ठहरे| बच्चो को झंडे के रंग और उसकी महत्ता शायद उन्होंने बच्चो को पढ़ाई हो?

भाजपा का यह बैनर पार्टी के कई कार्यक्रमों में लग चुका है। इसमें पार्टी के झंडे के रंगों के साथ छेड़छाड़ कर दी गयी है। यानि हरे की जगह केसरिया और केसरिया की जगह हरा रंग। यह बड़ी गलती है। लेकिन कई कार्यक्रमों में बैनर का इस्तेमाल होने के बावजूद इस पर किसी भाजपा नेता का ध्यान नहीं गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के कार्यक्रम में भी इसे लगाया गया था।
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नए जिलाध्यक्ष के कार्यकाल में बदल गया भाजपा का झंडा
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