अन्‍ना इफेक्‍ट: घूस की लालच में काम लटकाने वाले बाबुओं पर होगा जुर्माना, राज्‍यों पर भी लागू

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Wating for Bribeनई दिल्ली: सरकारी बाबुओं को आपका काम बेवजह लटकाना अब भारी पड़ने वाला है। केंद्रीय कैबिनेट ने आज पेंशन, पासपोर्ट, जाति प्रमाणपत्र, राशन कार्ड और टैक्स रिफंड जैसी कई सेवाओं में देरी पर जुर्माने वाले बिल को मंजूरी दे दी है। इसके तहत तय डेडलाइन के भीतर काम न करने पर देरी के लिए 250 रुपये प्रतिदिन से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इस बिल के दायरे में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और सरकार से सहायता प्राप्त एनजीओ भी होंगे।

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यह बिल दरअसल केंद्र सरकार का सिटिजन चार्टर होगा, लेकिन राज्य सरकारों के कर्मचारियों पर भी लागू होगा। यह पूरे देश में आरटीआई की तरह लागू होगा। इसके दायरे में जो-जो सेवाएं होंगी, सभी राज्यों को अपने सिटिजन चार्टर में उन्हें लाना ही होगा। कुछ राज्यों ने अपना अलग सिटिजन चार्टर बनाया है। इसमें कुछ सेवाओं के लिए समयसीमा तय की भी गई है। लेकिन यह सिटिजन चार्टर 2011 में अन्ना आंदोलन के बाद केंद्र सरकार के मन के मुताबिक नहीं है। कई सेवाएं राज्यों के सिटिजन चार्टर के दायरे से बाहर हैं।

यह बिल पासपोर्ट , टांसपोर्ट, कास्ट सर्टिफिकेट, बिजली बिल, गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रक्रिया जैसी कई जरूरतों को पूरा करेगा। बिल तय करेगा कि सभी राज्य केंद्र के सिटिजन चार्टर की सेवाओं को अपने चार्टर में लागू करें। बिल में शिकायतों में देरी के लिए कड़े प्रावधान हैं। बिल में किए गए प्रावधान स्टेट या सेंट्रल शिकायत निपटारा कमिशन को अधिकार देगा कि अगर पैनल को सर्विस में देरी या फिर करप्शन के पुख्ता सबूत मिलते हैं तो वह मामले की लोकपाल या फिर आपराधिक जांच की शिफारिश कर सकता है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा होने के कारण यह बिल लोकपाल की तुलना में काफी प्रभावी होगा।

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