आनंद हत्‍याकांड बना करेंट एकाउंट: खूब चला इसको पकड़ा-उसको छोड़ा का फंडा

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ANAND VERMA PHOTOफर्रुखाबाद: दिन दहाड़े विद्यालय से चंद कदमों की दूरी पर एक प्रधानाध्‍यापक और आरटीआई एक्‍टिविस्‍ट की हत्‍या हो जाती है। मृतक सत्‍तरूढ़ दल की एक पूर्व विधायक का भांजा है। घटना स्‍थल पर एसपी सहित दर्जनों वरिष्‍ठ अधिकारी घंटों तफतीश करते हैं। मौके से मृतक का मोबाइल बरामद होता है, जिसमें ‘आटो कॉल रिकार्ड’ की सुविधा थी। शिक्षक नेता हंगामा शुरू करते हैं, तो मौके पर ही एसपी साहब घटना का तीन दिन में खुलासा करने की घोषणा करते हैं। मृतक का भाई पत्रावलियों में मौजूद कागजों के आधार पर एक दर्जन से अधिक लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराता है।

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घटना के 10 दिन बाद तक पुलिस मृतक के मोबाइल और आरोपियों की कालडिटेल रिपोर्ट(सीडीआर) और मौके से बरामद मृतक के मोबाइल में रिकार्ड वार्तालाप के आधार पर जांच के दावे करती है। इसी दौरान एसपी साहब का ट्रांसफर हो जाता है। नये कप्‍तान के सामने ज्ञापनों का सिलसिला शुरू होता है। फिर जांच का अश्‍वासन मिलता है। पुलिस धीरे से मुलजिमों से पूछतांछ शुरू करती है। कुछ को चाय पर बुलाती है, कुछ के घर जाकर चाय पी आती है। मीडिया दबाव बनाती है। धर पकड़ का पहला चरण शुरू होता है। हिरासत में लिये गये आरोपियों को थाने बदल-बदल कर पूंछ तांछ किये जाने की खबरें आती हैं। बाकायदा सीडीआर और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपियों और शूटरों तक की पहचान कर लिये जाने के दावे होने लगते हैं। धीरे धीरे घटना के 25 दिन बीत जाते हैं। इस दौरान पूछ-तांछ के लिये लाये गये आरोपी धीरे-धीरे वापस जाने लगते हैं। अंत में पता चलता है कि वर्कआउट सही नहीं था। पुलिस नये सिरे से तफतीश शुरू करने की बात करने लगती है। कुछ अंदरूनी सूत्र एक दूसरे पर आरोप लगाकर पल्‍ला झाड़ने की मुद्रा में खड़े नजर आते हैं। सवाल पुलिस की नियत और कार्यप्रणाली पर उठना लाजिमी है।

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विदित है कि विगत 7 फरवरी को मोहम्‍मदाबाद के रामनगर कुड़रिया प्राथमिक विद्यालय से चंद कदम की दूरी पर शिक्षक आनंद प्रकाश सिंह की दिन दहाड़े गोली मारकर हत्‍या कर दी गयी थी। हत्‍या के संबंध में एक दर्जन से अधिक लोगों के विरुद्ध हत्‍या में शामिल होने की आशंका के आधार पर एफआईआर दर्ज करायी गयी थी। परंतु घटना के 26 दिन बाद भी अभी तक पुलिस ने घटना का खुलासा नहीं कर पाया है। इस दौरान दर्जनों लोगों से पूछ तांछ के दावों से आगे पुलिस एक कदम तक नहीं बढ़ सकी है।

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