……..क्योंकि उनका पाप उसके पेट में पल रहा है!

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singerFARRUKHABAD : गंगा तट मेला रामनगरिया में बीती रात प्रशासन की तरफ से एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में दूर दराज से आये कवियों ने अपने फन के जौहर बिखेरे। इस दौरान कवि पवन बाथम ने पढ़ा – आप इकरार नहीं करते हैं मुझसे इजहार नहीं होता, आपको चाहता हू, चाहूंगा, प्यार व्यापार नहीं होता।

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इस दौरान छतरपुर मध्य प्रदेश से आये ओजस्वी कवि अभिराम पाठक ने अपनी कविता पढ़ी – न्यायमूर्ति खुद कहता था ये न्याय नहीं है मिथ्या है, तुम कहते हो फांसी इसको मैं कहता हूं हत्या है। जनपद एटा के बलराम सिंह सरस ने पढ़ा अंधेरे को संग लिए दैत्यता खड़ी हो जहां, दीप बलिदानियों की याद के जलाता हूं, दुनियां का कोई धर्म देश से बड़ा नहीं, इसलिए राष्ट्र वन्दना KAVIके गीत गाता हूं।

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सतना मध्य प्रदेश से आयीं मधु जैन माधवी ने अपनी कविता पढ़ी घर के लिए आन सान, दो दो फूलों की ये शान, मुश्किलों का समाधान होती यहां बेटियां, चार चार पूत जब आपस में लड़ मरे, अर्थी को पिता की निज कांधे होती बेटियां।
व्यंग्यकार रवि चतुर्वेदी ने पढ़ा – उन्हें अंधी भिखारिन का भीख मांगना बहुत खल रहा है, क्योंकि उनका पाप उसके पेट में पल रहा है। सरिता बाजपेयी ने पढ़ा- छेड़ते हैं राग रंग दिन बहार के, गीत-गीत गा रहे आज प्यार के। डा0 जमील ने पढ़ा- इबादत के महल की यूं हसी बुनियाद रखते हैं, सदा बेलौस बढ़कर ही समाजी काम करते हैं, जीमल अपने अमल में अब तरीका में भी शामिल है, मिटा के नफरतों हम दिलों से प्यार करते हैं।

राजस्थान गंगापुर सिटी से पधारे गोपीनाथ चर्चित ने कहा गरीबी मिटाने का उपाय बताओ- मैने कहा भ्रष्ट नेताओं को मार भागाओ, गरीबी का नामो निशान मिट जायेगा, जब मच्छर ही नहीं रहेगा तो मलेरिया कहां से आयेगा। वाहिद अली वाहिद ने गंगा भक्ति को उकेरतीं हुईं पंक्तियां प्रस्तुत कीं- मां के समान जगे दिन रात जो, प्रातः हुई जो जगाती है गंगा, कर्म प्रधान सदा जग में, सबको श्रम पंथ दिखाती है गंगा। संत असंत या मुल्ला महंत, सभी को गले से लगाती है गंगा, ध्यान-अजान, कुरान-पुरान से भारत एक बनाती है गंगा।

इस दौरान उपजिलाधिकारी भगवानदीन वर्मा, मेला प्रबंधक संदीप दीक्षित सहित अन्य कविगण व श्रोतागण भी मौजूद रहे।

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