1 नवम्बर: फर्रुखाबाद की चौखट पर इतिहास की एक दस्तक और

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फर्रुखाबाद: महाभारत काल से ही यूं तो फर्रुखाबाद इतिहास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता चला आ रहा है। परन्तु आधुनिक भारत के राजनैतिक इतिहास में समाजवादी क्रांतिकारी या क्रांतिकारी समाजवादी राममनोहर लोहिया ने इसे अपनी कर्मभूमि बनाने का गौरव प्रदान किया। 21वीं शताब्दी की देश की सबसे बड़ी राजनैतिक क्रांति के सूत्रधार अन्ना हजारे की टीम से अलग होकर अपना राजनैतिक जमीन तलाशने की दिशा में अरविंद केजरीवाल अपना अभियान भी यहीं से शुरू करने जा रहे हैं। हो सकता है 1 नवंबर फर्रुखाबाद के दरवाजे पर इतिहास की यह एक और दस्तक हो।

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फर्रुखाबाद के कंपिल स्थित द्रोपदी कुण्ड में आज भी देशी विदेशी इतिहासकार मध्ययुगीन इतिहास के बिखरे पड़े पन्नों में आज भी अपना सर खपाते नजर आ जाते हैं। यह जनपद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की गौरवगाथा का एक हिस्सा मात्र है। अविभाजित फर्रुखाबाद का हिस्सा रहे कन्नौज कभी मुगल कालीन इतिहास के एक अहम पात्र राजा जयचंद की राजधानी रह चुका है। स्वतंत्रता संग्राम में भी फर्रुखाबाद के तत्कालीन नबाबों और स्थानीय क्रांतिकारियों की कुर्बानियों से इतिहास के पन्ने लाल हैं। स्वाधीनता संग्राम के दौरान गांधी और नेहरू जैसे नेताओं ने जनपद के दौरे कर जनपद की इस संग्राम में अहम भूमिका को रेखांकित किया। आधुनिक भारत की राजनीति में पहली बार कांग्रेस को चुनौती देने वाले क्रांतिकारी समाजवादी राममनोहर लोहिया ने भी कभी फर्रुखाबाद को अपनी कर्मभूमि के तौर पर चुना था। लोहिया के इस अभियान के कुछ साथी अभी भी इतिहास की धरोहर के तौर पर जीवित हैं।

21वीं सदी में पहली बार भ्रष्टाचार को प्रभावी मुद्दा बनाकर इस दौर की सबसे बड़ी क्रांति का सूत्रपात गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हजारे ने 2011 में किया। उनके दिल्ली में हुए विभिन्न कार्यक्रमों में जनपद के लोगों ने भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया। अन्ना के अभियान को सफल न होते देख मुद्दे के राजनैतिक हल के लिए और इसके लिए एक राजनैतिक दल के गठन की अवधारणा के साथ अलग हुए अरविंद केजरीवाल अब फर्रुखाबाद से ही अपने अभियान की शुरूआत करने जा रहे हैं। यह जनपद के दरबाजे पर इतिहास की एक नई दस्तक हो सकती है। अरविंद केजरीवाल ने 1 नवम्बर को सभा की घोषणा करके यहां के स्थानीय सांसद और केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री सलमान खुर्शीद को उनके घर में घुसकर चुनौती देने की कोशिश की है। सलमान खुर्शीद का परिवार स्वतंत्रता के बाद से आज तक जनपद की राजनीति में अपनी प्रभावी भूमिका निभाता रहा है। श्री खुर्शीद के नाना डा0 जाकिर हुसैन को इस देश का राष्ट्रपति होने का गौरव प्रदान था। श्री खुर्शीद के पिता भी यहां से सांसद और केन्द्र में मंत्री रहे। उनके बाद राजनीति में आये सलमान खुर्शीद स्वयं यहां से दो बार सांसद चुने गये और दोनो बार उन्होंने केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में जनपद को प्रतिनिधित्व प्रदान किया। जाहिर है अरविंद केजरीवाल और सलमान खुर्शीद दोनो के लिए आगामी 1 नवम्बर एक बड़ी चुनौती होगी।

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