यूपी में बसपा का साथ देगी भाजपा, पर अगर ऐसा हुआ तो…

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भाजपा के वरिष्ठ नेता संघप्रिय गौतम ने कहा है कि कांग्रेस को रोकने के लिए बीएसपी और बीजेपी हाथ मिला सकते हैं।न्होंने कहा है कि हमारा विरोध कांग्रेस से है। उसे रोकने के लिए हमें बीएसपी को सपोर्ट करना पड़े तो करेंगे। गौरतलब है कि संघप्रिय गौतम बीजेपी के दलित नेता हैं। वाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। पहले पार्टी से निष्कासित हो चुके हैं, लेकिन उमा भारती के साथ उनकी घर वापसी हुई है।

उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे कल सुबह से आने लगेंगे और शाम तक प्रदेश की राजनीतिक तस्‍वीर साफ हो जाएगी। नतीजे चाहे जो हों, राज्‍य की चार अहम राजनीतिक पार्टियों के लिए इनके क्‍या मायने होंगे, इस पर एक नजर:
समाजवादी पार्टी

अच्‍छा: टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल के जो नतीजे आए हैं, उनके मुताबिक समाजवादी पार्टी राज्‍य में सरकार बना सकती है। अगर समाजवादी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलता है तो उसके लिए दोहरा फायदा होगा। एक तो वह एक बार फिर सत्‍ता पर कब्जा जमाने में सफल हो जाएगी। और, दूसरी बात कि उसे कांग्रेस की बैसाखी से भी मुक्ति मिल जाएगी। पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव इसका राजनीतिक फायदा आगे भी उठाएंगे। वह खुद को देश के सबसे बड़े मुस्लिम हितैषी नेता के रूप में पेश कर 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों में अपनी इस छवि को भुनाएंगे।

जुलाई में देश में राष्ट्रपति का चुनाव होना है। सत्ता में आने के बाद राष्ट्रपति चुनावों में भी सपा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी। वो मस्लिम राष्ट्रपति का चुनाव करवाकर मुसलमानों में अपनी पैठ और मजबूत करने का दांव भी आजमा सकते हैं।

यदि समाजवादी पार्टी पूर्ण बहुमत नहीं पाती है और सबसे बड़ी पार्टी बन कर बहुमत के करीब पहुंचती है, तब भी उसके लिए अच्छा ही होगा। 175-185 सीटों पर जीत भी पार्टी के लिए अच्छे नतीजे देगी। फिलहाल कांग्रेस के साथ सरकार बना कर बाद में दूसरी पार्टियों के और निर्दलीय विधायकों को तोड़कर सपा अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है।

बुरा: पार्टी के लिए बुरी स्थिति तब बनेगी, जब उसकी सीटें 140 के करीब रहती हैं। ऐसे में उसे सत्ता पर काबिज होने के लिए कांग्रेस पर निर्भर होना पड़ेगा। हालांकि कांग्रेस यह साफ कर चुकी है कि वो मुलायम के साथ गठबंधन नहीं करेगी लेकिन राजनीति में कोई भी घोषणा अंतिम नहीं होती। पर अगर कांग्रेस ने वाकई सपा को समर्थन नहीं दिया तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की स्थिति आ जाएगी। यूपीए के लिए सिरदर्द बनी ममता बनर्जी से निपटने के लिए राज्य में कुछ महीनों के राष्ट्रपति शासन के बाद कांग्रेस सपा की सरकार बनवा सकती है। इससे केंद्र सरकार में मुलायम सिंह यादव को कुछ मंत्रालय मिल जाएंगे जबकि उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी का दखल का बढ़ जाएगा। लेकिन यह गठजोड़ भी 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान कमजोर पड़ जाएगा क्योंकि समाजवादी पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की महत्वकांक्षाओं के साथ गठबंधन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।

समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बुरी स्थिति तब होगी जब उसे सरकार बनाने के लिए न सिर्फ कांग्रेस बल्कि राष्ट्रीय लोक दल जैसे अन्य छोटे दलों का भी समर्थन लेना पड़ेगा। या फिर, तब जब बसपा और भाजपा दोनों मिलकर सरकार बनाने लायक सीटें हासिल कर लेंगी। यदि ऐसा हुआ तो सपा एक बार फिर यूपी की सत्ता से दूर हो जाएगी। इसका असर आने वाले लोकसभा चुनावों पर भी होगा।

कांग्रेस

अच्‍छा: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए सबसे अच्छी स्थिति तब होगी जब उसे 70 के आसपास सीटें हासिल हो। ऐसा हुआ तो वह किंगमेकर की स्थिति में होगी। सपा को सरकार बनाने के लिए पूरी तरह कांग्रेस पर निर्भर होना पड़ेगा और वह सपा से अपनी शर्तों पर सौदेबाजी कर सकेगी। और तो और, राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी अपने उम्मीदवार के लिए सपा से समर्थन मांग सकेगी। यदि कांग्रेस को राज्य में 60 के करीब या इससे काफी कम सीटें मिलती हैं और बसपा-भाजपा मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में आ जाती हैं तब भी कांग्रेस को थोड़ा फायदा यह होगा कि समाजवादी पार्टी केंद्र सरकार के समर्थन के लिए मजबूर हो जाएगी।

बुरा: लेकिन यदि राज्य में सपा अपने दम पर या कुछ छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने में कामयाब हो गई तो यह राहुल गांधी के लिए बड़ा धक्का होगा। यदि बसपा और भाजपा मिलकर सरकार बनाने लायक सीटें ले आने के बावजूद गठबंधन नहीं करती हैं तो कांग्रेस के लिए मुश्किल हो सकती है। ऐसी स्थिति में मायावती और मुलायम केंद्र में कांग्रेस की सरकार का समर्थन करने के लिए मजबूर नहीं होंगे। लेकिन यदि समाजवादी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलता है और कांग्रेस चौथे स्थान पर आती है तो यह उसके लिए सबसे बुरी स्थिति होगी। इस स्थिति में भाजपा राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी हो जाएगी।

बहुजन समाज पार्टी
अच्‍छा: एग्जिट पोल के नतीजों को असली परिणाम का संकेत मानें तो बसपा उत्तर प्रदेश की सत्ता में लौटती नहीं लगती। कम से कम अपने दम पर तो नहीं ही। ऐसे में बसपा के लिए तो सबसे अच्‍छा यही होगा कि उसे पूर्ण बहुमत मिले। लेकिन यदि पार्टी सरकार बनाने के लिए भाजपा का समर्थन लेने के लिए मजबूर हुई तो इसका असर मायावती की कार्यशैली पर पड़ेगा। वो अब तक अकेले मजबूत फैसले लेने के लिए जानी जाती रही है लेकिन भाजपा के सरकार में शामिल होने पर वो ऐसा नहीं कर पाएंगी। यही नहीं, इससे राज्य में उनके कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंदी मुलायम सिंह यादव की स्थिति भी मजबूत हो जाएगी।

बुरा: बसपा के लिए सबसे बुरी स्थिति तब होगी जब सपा को पूर्ण बहुमत मिल जाएगा और भाजपा भी उससे अधिक सीटें पाकर राज्य में मुख्य विपक्षी दल बन जाएगी। इस स्थिति में बसपा के पास सिर्फ एक ही विकल्प बचेगा कि वो केंद्र में कांग्रेस का समर्थन करे।

भारतीय जनता पार्टी
अच्‍छा: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगर पार्टी बसपा के साथ मिलकर राज्य में सपा की सरकार बनने से रोक ले तो यही उसके लिए अच्छी स्थिति होगी। भाजपा की सीटें उत्तर प्रदेश में लगातार कम होती रही हैं। यदि इस बार उसकी सीटों का आंकड़ा सुधरा तो यह भी उसके लिए अच्छी खबर होगी।

यदि राज्य में सपा की सरकार बनती है और भाजपा मुख्य विपक्षी दल बनने की स्थिति में आ जाती है तब भी भाजपा के लिए अच्छा ही होगा। इस स्थिति में कांग्रेस राज्य में किंगमेकर नहीं बन पाएगी और बसपा की स्थिति ज्‍यादा खराब हो जाएगी। यदि भाजपा कांग्रेस से अधिक सीटें पाने में कामयाब रही तो भी यह उसके लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त होगी।

बुरा: भाजपा के लिए एक और स्थिति यह हो सकती है कि वो उत्तराखंड में बसपा का समर्थन लेकर उत्तर प्रदेश में उसका समर्थन कर दे। इस स्थिति में भाजपा के लिए एक खतरा यह हो सकता है कि बसपा का समर्थन करने पर राज्य की अगड़ी जातियां उससे मुंह मोड़ सकती हैं। भाजपा के लिए सबसे बुरी स्थिति तब होगी जब वह कांग्रेस से भी पीछे रहती है। यह उसके लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका होगा।

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