बोर्ड परीक्षा में 23 अंक नहीं तो समझो दसवीं फेल

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यूपी बोर्ड की दसवीं परीक्षा में शामिल जिन छात्रों ने सतत मूल्यांकन प्रणाली (सीसीई) को पास होने की गारंटी मान लिया है, उन्होंने बोर्ड के नए कदम से जोर का झटका लगेगा। सीसीई प्रणाली के कारण परीक्षार्थी और शिक्षक यह मानकर चल रहे थे कि तीन चरणों में होने वाली 30 अंकों की प्रोजेक्ट/ प्रैक्टिकल/सत्र परीक्षा में यदि पूरे अंक बटोर लिए तो लगभग पास हो जाएंगे लेकिन बोर्ड ने एक झटके में उनकी यह धारणा तोड़ दी है। परीक्षा की तिथियां घोषित होने के बाद अब बोर्ड ने सीसीई प्रणाली का प्रारूप बदल दिया है। तय किया गया है कि जो परीक्षार्थी लिखित परीक्षा के 70 अंकों में से 33 फीसदी यानी 23 अंक नहीं पाएंगे फेल माना जाएगा।

बोर्ड का यह फैसला पूरे परिणाम पर असर डाल सकता है। अब तक जो परीक्षार्थी 30 अंकों की प्रोजेक्ट/प्रैक्टिकल/सत्र परीक्षा में अधिक नंबर बटोरने की जुगत में थे, उन्हें अब लिखित परीक्षा में अंक जुटाने होंगे। यह परेशानी बोर्ड की सीसीई प्रणाली की नई परिभाषा के कारण खड़ी हुई है। जून 2011 में पिछले सत्र का परिणाम घोषित करने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने दसवीं परीक्षा में सीसीई प्रणाली की घोषणा की थी। कहा कि छात्रों को अधिक से अधिक नंबर दिलाने के लिए अब दसवीं में लिखित परीक्षा 70 अंकों की होगी और तीस अंक पूरे वर्ष के दौरान होने वाले प्रोजेक्ट, सत्र परीक्षा व शिक्षणेतर गतिविधियों पर मिलेंगे। किस गतिविधि पर कितने अंक मिलेंगे, इसका ब्योरा दिया गया था। अधिकारियों की तरफ से कहा गया कि अब वही फेल होगा जो लिखित परीक्षा में कॉपी सादी छोड़ देगा। स्कूलों ने उसी के अनुरूप तैयारी कराई लेकिन मंगलवार को बोर्ड सचिव की तरफ से इस बारे में जारी सूचना सीसीई की अलग परिभाषा कह रही है। बोर्ड सचिव प्रभा त्रिपाठी ने विज्ञप्ति के माध्यम से साफ किया है कि हाईस्कूल में सभी विषयों में 70 अंक की लिखित और 30 अंकों की प्रायोगिक परीक्षा होगी। प्रायोगिक परीक्षा आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर होगी जिसमें 10 अंक पाना अनिवार्य है। पास होने के लिए सभी विषयों की लिखित परीक्षा में 23 अंक पाने होंगे। सीबीएसई की तरह दसवीं में सौ फीसदी रिजल्ट के लिए जद्दोजहद कर रहे माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए फैसला परेशानी वाला हो सकता है।