फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) कांवड़ यात्रा हर साल सावन के महीने में शुरू होती है और हर साल लाखों की संख्या में कांवड़िए अपने आराध्य भोलेबाबा का गंगाजल से अभिषेक करते हैं। केसरिया वस्त्र पहनकर हर साल शिवभक्त कांवड़ियों के रूप में कांवड़ उठाते हैं और हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री जैसे पवित्र स्थानों पर गंगा जल लेने जाते हैं। फिर वे उस जल से शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। सावन का महीना शुरू हो रहा है| इस दौरान सावन सोमवार पर व्रत किया जाता है और सावन के महीने में सैकड़ों भक्त केसरिया रंग के वस्त्र पहनकर कांवड़ यात्रा निकालते हैं| कांवड़ में गंगा नदी का पवित्र जल भरते हैं और फिर भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है| लेकिन, हर साल सावन के महीने में कांवड़ यात्रा क्यों निकाली जाती है, इसके पीछे की वजह क्या है और वेद शास्त्रों में कांवड़ यात्रा को लेकर क्या पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जानें यहां.
कांवड़ यात्रा की पहली कथा
परशुराम थे पहले कावड़िया- कुछ विद्वानों का मानना है कि सबसे पहले भगवान परशुराम ने उत्तर प्रदेश के बागपत के पास स्थित ‘पुरा महादेव’ का कावड़ से गंगाजल लाकर जलाभिषेक किया था। परशुराम, इस प्राचीन शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए गढ़मुक्तेश्वर से गंगा जी का जल लाए थे। आज भी इस परंपरा का पालन करते हुए सावन के महीने में गढ़मुक्तेश्वर से जल लाकर लाखों लोग ‘पुरा महादेव’ का जलाभिषेक करते हैं। गढ़मुक्तेश्वर का वर्तमान नाम ब्रजघाट है
दूसरी कांवड़ यात्रा कथा
अन्य मान्यताओं के अनुसार, कांवड़ यात्रा की शुरुआत श्रवण कुमार ने त्रेता युग में की थी| दरअसल, श्रवण कुमार ने अपने अंधे माता-पिता को कांवड़ में बिठाकर पैदल यात्रा की और उन्हें गंगा स्नान कराया और लौटते समय वहां से अपने कांवड़ में गंगाजल भरकर लेकर आए. फिर भगवान शिव का अभिषेक किया. माना जाता है कि तब से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई थी|
तीसरी कांवड़ यात्रा कथा
कुछ अन्य मान्यताओं के अनुसार, कांवड़ यात्रा को लंकापति रावण से भी जोड़ा गया है| कहा जाता है कि रावण भगवान शिव का परम भक्त था और समुद्र मंथन से निकलने वाले विष का पान करने से भगवान शिव का गला जलने लगा, तब देवताओं ने तो जल अभिषेक किया ही इसके अलावा शिवजी ने अपने परम भक्त रावण को याद किया| रावण ने कांवड़ से जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक किया जिससे शिवजी को विष के प्रभाव से मुक्ति मिली|
कांवड़ यात्रा (सावन) कब से कब तक होगी
सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू हो रहा है
इसी दिन से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो रही है। यह यात्रा 23 जुलाई 2025 को सावन शिवरात्रि पर खत्म होगी। सावन के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 11 जुलाई को तड़के 2 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी, इसलिए, इसी दिन से सावन का महीना शुरू हो जाएगा। साथ ही, कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी। कांवड़ यात्रा 23 जुलाई 2025 को सावन शिवरात्रि के दिन खत्म होगी। इसका मतलब है कि इस साल कांवड़ यात्रा 11 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलेगी। कांवड़ यात्रा का समापन 23 जुलाई 2025 को सावन शिवरात्रि को होगा और सावन शनिवार, 9 अगस्त 2025 समाप्त होंगे ।
सावन के महीने में कांवड़ यात्रा क्यों निकाली जाती है, पढ़ें पूरी खबर



