काशीराम कालोनी नें तय किया आवासों के काले कारोबार से कत्ल तक का सफर

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फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) बेघर गरीबों के लिए लागू की गई कांशीराम शहरी आवास योजना के आवासों में अवैध कब्जे हो गए हैं। बड़ी संख्या में पात्र निर्धन फुटपाथों और आसमान तले जिंदगी बसर कर रहे हैं। आवास के लिए संबंधित विभागों के चक्कर लगा रहे हैं। आवासों पर अबैध कब्जे का कारोबार इतना चरम पर पंहुच गया कि हत्या तक कर दी गयी| यह काला कारोबार कोई नया नही है इसके माफियाओं की जड़ें बहुत गहरी है| और कई साहबों के दफ्तरों से होकर इन आवासों की गली गुजरी है| कई बार शिकायते होनें के बाद भी आज तक काशीराम कालोनी के आवासों की पड़ताल नही की| जिससे जरूरत मंदों को आवास उनकी जरूरत के हिसाब से मिल सके|
बसपा सरकार में कांशीराम शहरी आवास योजना लागू हुई थी। जिसके चलते हैबतपुर गढिया काशीराम कालोनी में 81 व्लाक में कुल 1296 आवास बनाये गये थे| सरकार की मंशा सरकारी पैसा खर्च कर गरीबों को आवास देनें की थी| लेकिन समय के आगे किसकी चलती है| धीरे-धीरे कालोनी के आवासों पर माफियाओं की नजर पड़ गयी और उसने अपनी गिरफ्त में पूरी तरह से कालोनी ले ली| पहले तो जरूरत मंद को आवास मिलना मुश्किल और यदि हामी भर भी दी जाए तो साहब को चढ़ावा चढाये बिना आवास आबंटित नही होता| और मिल जाए तो जरूरत मंदों की जगह दबंग उस पर कब्जा कर ले रहे है|
चार सैकड़ा मकानों में रह रहे दूसरे लोग
एक अनुमान के अनुसार हैबतपुर गढिया काशीराम कालोनी में कुल 1296 घरों में 400 आवास इस तरह के है जिसमे किसी के नाम पर आवास आबंटित और रह कोई और भी रहा है| गरीबों की कालोनी में रहने वाले लोगों के पास कार भी है| 
तकरीबन दो सैकड़ा घरों में पड़े है ताले
कालोनी में लगभग डेढ़ से दो सैकड़ा आवास इस तरह के है जिनमे ताला पड़ा है कोई भी नही रहता| जिसके बाद माफिया साहब से लेकर खरीददार तक तब को समझते है और तभी आवास आबंटित होता है| खबर तो यंहा तक है कि आवासों में 25 से 50 हजार में बिक्री होती है|
वर्षों से काशीराम कालोनी के इन आवासों में दूसरे के मकान हथियाने का काम तेजी के साथ संचालित है| बेख़ौफ़ हो चुके माफिया अब सारी सीमाएं भी पार कर गये| उनका आवास सफर अब आवास हथियाने से लेकर हत्या तक पंहुच गया| लेकिन अफसरों के कान पर जूं नही रेंगी| केबल क़ानूनी कार्यवाही हुई | बीते दिन किन्नर अंजली की गोली मारकर हत्या ही केबल इसी उद्देश्य से की गयी की भविष्य में कोई आवाज ना उठा सके|
तत्कालीन डीएम मोनिका रानी ने दिये थे जाँच के आदेश
जिलाधिकारी मोनिका रानी नें काशीराम कालोनी के आवासों की जाँच के आदेश पीओ डूंडा  को दिये थे| लेकिन जाँच का आज तक पता ही नही चला|या यूँ कहिए की केबल कागजों में ही जाँच की गयी| वर्तमान जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह नें भी जाँच के आदेश दिये है|
क्या कहते है जिम्मेदार
जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के परियोजना निदेशक जय विजय सिंह से जेएनआई ने इस सम्बन्ध में बात की तो उन्होंने बताया कि तत्कालीन डीएम के आदेश पर जनवरी में आवासों की जाँच की गयी थी| जिसमे से 600 लोग वह निकले जिनके नाम पर आवास आबंटित थे| कुछ लोग अपने माँ-बाप की मौत के बाद उनके आवास में रह रहे है| कुछ के ताले बंद पाये गये| कुछ लोग दूसरों के घरों में रहते मिले| उन्होंने बताया कि अब लॉक डाउन सामान्य होंनें के बाद जिलाधिकारी के आदेश पर पुन: जाँच होगी और अबैध रूप से यदि कब्जे है तो उन्हें खाली कराया जायेगा|