बंदियों का भरोसा जीतने के लिए पहली बार जेलों में भी होंगे ‘मुखबिर खास’

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लखनऊ: आज तुमने बड़ी ऊंची छलांग लगाई है कालिया। रघुवीर सिंह की जेल से भागने की कोशिश कई कैदियों ने की, लेकिन जितनी दूर आज तुम पहुंच गए हो इतनी दूर पहले कोई नहीं पहुंचा।’ कालिया फिल्म में जेलर रघुवीर सिंह के इस डायलॉग और सलाखों के पीछे एक सख्त अफसर की छवि को भुलाया नहीं जा सकता। ऐसे ही शोले फिल्म में अंग्रेजों के जमाने के जेलर तक ‘सुरंग’ से लेकर बंदियों के बीच होने वाली हर कच्ची-पक्की बात पहुंचाने वाले ‘हरिराम’ का किरदार भी सदाबहार है।
कुछ ऐसा ही अब यूपी की जेलों में भी देखने को मिलेगा, जब आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते कदमों के बीच जेलों में पारंपरिक मुखबिर तंत्र की सक्रियता भी होगी। ऐसा इसलिए है कि अन्य प्रदेशों और यूपी पुलिस की तर्ज पर पहली बार कारागार विभाग में गुप्त सेवा मद की मांग की गई है। कारागार मुख्यालय ने शासन को भेजे प्रस्ताव में गुप्त सेवा मद के तहत 30 लाख रुपये का बजट मांगा है।
पुलिस समेत अन्य विभागों में मुखबिर तंत्र के लिए गुप्त मद की व्यवस्था रही है। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस से पहले पुलिस के लिए उसके मुखबिर खास ही सबसे बड़े हथियार होते थे। गुप्तचर की पारंपरिक व्यवस्था को चलाने के लिए सबसे बड़ी जरूरत धन की होती है। बागपत जेल में माफिया मुन्ना बजरंगी की हत्या से लेकर बंदियों के लगातार वायरल हुए वीडियो की घटनाओं से सबक लेकर राज्य सरकार ने बीते कुछ माह में कई बड़े कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छह दिसंबर को कारागार मुख्यालय के कमांड सेंटर में बनी वीडियो वॉल का शुभारंभ किया था। अब सभी जेलों में लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए ऑनलाइन मानीटरिंग संभव है।
जेलों की सुरक्षा के इस तंत्र को और मजबूत बनाने के लिए गुप्त सेवा मद को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके जरिये जेलों के भीतर उन कोनों से लेकर बाहर तक सूचनातंत्र का वह जाल बिछाया जा सकता है, जो सीसीटीवी कैमरों की जद में नहीं आ सकते। शासन को भेजे गए प्रस्ताव में गुप्त सेवा मद का उपयोग का अधिकार डीजी/आइजी, डीआइजी व कारागार अधीक्षक को दिए जाने की सिफारिश की गई है।