हिजरी नव वर्ष पर मुस्‍लिम बच्‍चों को उर्दू की तालीम देने का संकल्‍प

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नए इस्लामी हिजरी साल 1434 के आगाज पर आयोजित कार्यक्रम के दौरन नया संकल्प लिया कि अब कौम में तालीम से महरूम कोई नहीं रहेगा। उन बच्चों को पढ़ाया जायेगा जो हालात के चलते स्कूल नहीं जा पाते। खास तौर से मदरसा फजले रहमानी में उन बच्चों को उर्दू पढ़ाने का लक्ष्य बनाया गया पहले जो कान्वेंट स्कूल में जाते हैं पर उर्दू नहीं पढ़ पाते दूसरे वे जो किसी न किसी कारण से स्कूल जाने से वंचित रह जाते हैं। दोनों तरह के बच्चों के लिए मदरसे में एक ही दिन में दो सत्र लगेंगे।

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इस मुहिम के पीछे जरदोजी व्यापार मंडल के अध्यक्ष हाजी मुजफ्फर हुसैन रहमानी के जज़्बे को सराहा जा सकता है, जिन्होंने कई अन्य लोगों में यह जज़्बा पैदा किया और हर बच्चे को तालीमशुदा करने की मुहिम अंजाम की ओर चल पड़ी।

इस्लामी साल की इब्तिदा के दिन मुनाकिद इस्लामी क्विज में बच्चों ने हजरत मोहम्मद साहब की जिन्दगी और उनके परिवार से सम्बंधित सवालों के जवाब पूरी सूझ बूझ से दिए। क्विज के लिए बनी 4 टीमों में टीम अबू बक्र में मुकीम, मोहम्मद अहमद , फैजान व अमां, टीम मोहम्मदी में जैनुल आबदीन, अजहर, कामिल व् फराज टीम फारूक आजम में मोहसिन, सुलेमान व फरमान, टीम उस्मान गनी में रोशन जहाँ, सबा, जीनत, आसिम, जिद, अकरम, आसिम, सकीब, मुस्कान व् सना शामिल थे। जरदोजी व्यापार मंडल के महामंत्री नदीम खान, हाजी अकरम, हाजी नूर मोहम्मद ‘गबद्दू’ आदि ने बच्चों को ईनाम प्रदान किये।

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