फर्रुखाबादः पेप्सी और स्पेशल बियर के युग में भी हाण्डी के दूध के स्वाद को जिन्दा रखने के लिये चौक बाजार पर पंकज अवस्थी को चमचमाती लुटियों में दूध को ठंडा करते देखा जा सकता है।
भागदौड़ भरी जिंदगी और समय के अभाव के कारण व ग्रामीण क्षेत्र को छोड़कर शहरों में बसे नौकरी पेशा व व्यापारी वर्ग के लोग शहर में आकर तो बस गये लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के शुद्ध व्यंजनों की तासीर को बिलकुल भूल ही गये। लग्जरी गाड़ियों में घूमने वालों को मिनरल वाटर तो बड़े आराम मिल सकता है मगर गरम गरम हडिया का दूध बड़े नसीब वालो को ही मिलता है| फर्रुखाबाद के चौक बाजार में गाँव की हडिया के दूध का स्वाद चखाने का बीड़ा उठाया है नई सोच के पंकज अवस्थी ने|
पंकज से जब यह बात पूछी गयी कि कोल्ड ड्रिंक और वीयर के समय में हड़िया का दूध बेचने की बात जेहन में कैसे आयी तो उन्होंने नानी के समय में हड़िया के दूध को पीने की बात कही।
8 घंटे गरम होने के बाद आता है सोंधापन
तकरीबन 8 घंटे धीमी गोबर के कंडे की आंच में गर्म होने के बाद सफेद दूध गुलाबीपन ले लेता है, घी मलाई दूध के ऊपर तैरने लगती है।
अनायास हड़िया से आ रही सोंधी खुशबू बच्चो और बड़ो को भी मजबूर कर देती थी चोरी के लिए। अरहर के झांकर से हाण्डी के अंदर पड़ी मोटी मलाई को उतारकर चट कर जाने का मजा ही कुछ और हुआ करता था| और जब इस बात का खुलासा होता था तो बड़े ही मासूम चेहरे से नानी दादी को जबाब मिलता कि बिल्ली ने मुहं मार दिया होगा। इस दूध का मट्ठा तो और भी लाजबाब होता है| मट्ठा भी गुलाबीपन लिए| सबसे खास बात ये है कि हडिया के दूध में शक्कर मिलाने की जरुरत नहीं| गुणकारी तो ये होता ही है सुगर की बीमारों के लिए रामबाण से कम नहीं होता| हडिया में ऊपर तैर रही मोती मलाई और गुलाबी दूध के अलावा एक और मस्त चीज जो इसमें निकलती है वो है खुरचन| मथुरा की खुरचन तो बहुतो ने सुनी होगी मगर असल में उस खुरचन और हडिया की खुरचन में माँ बेटी का नाता है| पूरा दूध खाली करने के बाद सीप की सिप्पी से हडिया से खुरचन खरोची जाती है और वो है असली खारोचन| अब मथुरा में तो कढ़ाई की खुरचन तो बस एक मात्र नक़ल बची है| तो जनाब हंडिया के दूध का मजा लेने के बाद पंकज से खुरचन लेना न भूले|
कहां से आती हैं यह हाण्डी
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग हाण्डी के दूध के शौकीन हैं। इन हाड़ियों के शौकीन आज भी पुलिस लाइन के पास नौखण्डा मेले, रामनगरिया मेला, सवायजपुर की जाति, संकिसा इत्यादि से खरीदकर ले जाते हैं। कई दिन पानी में भीगने के बाद इन हाण्डियों की तली में मोटी मिट्टी की परत चढ़ाई जाती है। तत्पश्चात यह दूध गर्म करने के लायक हो पाती हैं।
युवाओं की खास पसंद बना हाण्डी का दूध
पंकज अवस्थी की दुकान पर शाम को
युवाओं का आना शुरू हो जाता है।
शहर के दूर दराज मोहल्लों से आये युवा बड़े शौक से हाण्डी का दूध पीते हैं। जेएनआई ने जब युवा वर्ग के लोगों से बात की तो उन्होंने हाण्डी के इस सोंधे दूध की जमकर तारीफ की।
आवास विकास से दूध पीने पहुंचे छात्र प्रदीप कुमार ने बताया कि इस दूध का स्वाद इतना ज्यादा बेहतरीन है कि बस पूछिये ही मत। शहर में तो शुद्ध दूध मिलना बहुत मुश्किल है यहां पर हमें वह दूध मिलता है जो गांवों में नानी पिलाती थीं।
साहबगंज चौराहे से पहुंचे प्रवीन कुमार ने भी इस दूध की जमकर कसीदे पढ़े। उन्होंने कहा कि हम इस दूध से अच्छी सेहत व मुहं का स्वाद बदल सकते हैं। पेप्सी के इस युग में युवा वर्ग शुद्ध खाना नहीं खा सकता क्योंकि मार्केट में हर तरफ मिलावट है।


