सात साल तक लड़ा मुकदमा मुर्गे के चक्कर में

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cockरांची। एक मुर्गा मारने को लेकर हुए विवाद में एक व्यक्ति सात सालों तक मुकदमा लड़ता रहा। 500 रुपये का मुर्गा चुराकर खाने के आरोपी को इन सात वर्षो में मुकदमा लड़ने में करीब 30 हजार रुपये खर्च करने पड़े। मंगलवार को जज अरुण कुमार मिश्रा की अदालत ने आरोपी राजेश गंझू को बरी कर दिया गया है।

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मामले में बचाव पक्ष के वकील ओम प्रकाश गौरव ने बताया कि गणेशपुर गांव निवासी राम प्रसाद वेदिया ने 8 जनवरी, 2006 को ओरमांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि 2 जनवरी 2006 को कजरु गंझू और राजेश गंझू (दोनों ाई) ने मिलकर एक मुर्गा चुराया और उसे मार दिया इसकी कीमत करीब 500 रुपये थी। मामले को लेकर अदालत में 10 जुलाई, 2009 को आरोप पत्र दाखिल किया गया था। 20 मार्च, 2010 को आरोपी राजेश गंझू के खिलाफ आरोप तय किए गए। मामले के एक अन्य अभियुक्त कजरु गंझू के खिलाफ 27 जून को फैसला सुनाया जाएगा। वह इस मामले में करीब ढाई माह जेल में रहने के बाद अब जमानत पर है।

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