यूपी में अगस्त में होंगे छात्रसंघ चुनाव

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RAM NAIKलखनऊ: राज्यपाल व कुलाधिपति राम नाईक की अध्यक्षता में कल राजभवन में कुलपतियों और कुलसचिवों की हुई काफी लाभदायक रही। बैठक में तय हुआ कि परीक्षाओं में व्यवधान न हो, इसलिए अगले शैक्षिक सत्र में अगस्त में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार छात्रसंघ चुनाव कराये जाएं। यह भी स्पष्ट किया गया कि चिकित्सा और प्राविधिक विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने पर कोई रोक नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से शुरू किए गए ‘विजिटर अवार्ड’ की तर्ज पर प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय को ‘चांसलर अवार्ड’ से नवाजने का भी फैसला हुआ है।

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राज्यपाल ने राजभवन और शासन के निर्देशों के बावजूद नैक मूल्यांकन से उच्च शिक्षण संस्थाओं के परहेज करने पर अप्रसन्नता जतायी। अभीचार विश्वविद्यालय ही नैक मूल्यांकित हैं। राज्यपाल ने बाकी विश्वविद्यालयों को कमियों को दूर करते हुए नैक मूल्यांकन कराने के साथ ही संबद्ध कालेजों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया। समय से दीक्षांत समारोह न आयोजित करने और छात्रों को डिग्रियां नहीं बांट पाने वाले विश्वविद्यालयों की चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि तीन साल तक छात्रों को सर्टिफिकेट नहीं मिलते लेकिन जब हम लिखते हैं तो तीन दिन में प्रमाणपत्र सौंप दिये जाते हैं। यह स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं हुए हैं, वे 28 फरवरी तक इसका आयोजन कर लें।

राज्यपाल ने परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया। राज्यपाल के विधिक सलाहकार एसएस उपाध्याय ने कहा कि कालेजों में नकल के सुबूत मिलने पर विश्वविद्यालय उनकी संबद्धता रद कर सकते हैं। यदि कहीं कोई दूसरा व्यक्ति परीक्षक की ड्यूटी करता पाया जाता है तो आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। बैठक में जब कुलपतियों ने एक-एक कर यह बताना शुरू किया कि उनके विश्वविद्यालय का सत्र नियमित है तो राज्यपाल के सचिव चंद्रप्रकाश को उन्हें टोकते हुए यह बताना पड़ा कि आगरा के भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय व फैजाबाद के डा.राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणाम देर से घोषित हुए।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को हर हाल में 30 जून तक रिजल्ट घोषित करने और 15 जून तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने और परीक्षा कार्यक्रमों से राजभवन को भी अवगत कराने को कहा।

राजस्थान माडल पर विचार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अशोक कुमार ने सुझाव दिया कि राजस्थान में पांच वर्ष से हर वर्ष एक ही दिन पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराये जा रहे हैं। विश्वविद्यालय अपने यहां चुनाव कराते हैं जबकि कालेजों में इसके आयोजन की जिम्मेदारी निदेशक उच्च शिक्षा पर होती है। राज्यपाल ने इसके बाद राजस्थान माडल का अध्ययन करने को कहा।

पांच साल हो कुलपतियों का कार्यकाल

केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तर्ज पर राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का कार्यकाल पांच वर्ष और इसके लिए अधिकतम आयु सीमा को 70 वर्ष करने पर तो बैठक में सहमति बनी लेकिन राज्यपाल ने कहा कि इस बारे में राज्य सरकार से बातचीत के बाद ही अंतिम निर्णय होगा।

कापी जांचने में रुचि नहीं लेते परीक्षक

राज्यपाल ने जब समय से रिजल्ट न घोषित कर पाने का कारण पूछा तो भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.मुहम्मद मुजम्मिल ने कहा कि उनके यहां 11 लाख परीक्षार्थी हैं जबकि शिक्षकों के पद रिक्त हैं। दिक्कत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि विश्वविद्यालय के शिक्षक कापियां जांचने में रुचि नहीं लेते। उन्हें लगता है कि इस काम का उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिलता। हकीकत यह है कि कापियां जांचने का काम सिर्फ स्ववित्तपोषित कालेजों के शिक्षकों के भरोसे चल रहा है। कई कुलपतियों ने भी इससे इत्तेफाक जताया और कहा कि शिक्षकों के लिए कापी जांचना बाध्यकारी होना चाहिए। राज्यपाल ने इस समस्या के निदान के लिए आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति को रिपोर्ट देने का आदेश दिया। कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति को उनका सहयोग करने को कहा।

चांसलर अवार्ड के मानक तय करेगी शिक्षाविदों की कमेटी

राज्यपाल ने बताया कि चांसलर अवार्ड से नवाजे जाने वाले सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय को पांच लाख रुपये का पुरस्कार दिये जाने की उनकी मंशा है। चांसलर अवार्ड किस आधार पर दिये जाएं, इसके मानक तय करने के लिए ख्यातिप्राप्त शिक्षाविदों की कमेटी गठित करने पर सहमति बनी।

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