गोरक्षा के नाम पर दुकानें खुलीं, 80% गोरक्षक गोरखधंधा करते हैं!:मोदी

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modimankibaatनई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पहली बार टाउनहॉल अंदाज में देश के नागरिकों से सीधा संवाद किया। इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने जनता के सवालों के जवाब दिए।

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इस अवसर पर एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि इन दिनों कई लोगों ने गोरक्षा के नाम पर दुकानें खोल रखी हैं। मुझे इतना गुस्सा आता है इन्हें देखकर। कुछ लोग जो पूरी रात एंटी सोशल एक्टिविटी करते हैं लेकिन दिन में वो गोरक्षक का चोला पहन लेते हैं। मैं राज्य सरकारों से अनुरोध करता हूं कि ऐसे जो स्वंयसेवी निकले हैं उनका जरा डोजियर तैयार करें, इनमें से 70-80 फीसदी एंटी सोशल एलिमेंट निकलेंगे। मोदी ने कहा कि इन दिनों कई लोगों ने गोरक्षा के नाम पर दुकानें खोल रखी हैं। मुझे इतना गुस्सा आता है। कुछ लोग जो पूरी रात एंटी सोशल एक्टिविटी करते हैं लेकिन दिन में वो गोरक्षक का चोला पहन लेते हैं। मोदी ने कहा कि अगर सचमुच में वो गोरक्षक हैं तो वो प्लास्टिक फेंकना बंद करवा दें। गायों का प्लास्टिक खाना रुकवा दें तो ये सच्ची गोसेवा होगी क्योंकि कत्ल से नहीं बल्कि सबसे ज्यादा गायें प्लास्टिक खाने की वजह से मरती हैं। मोदी ने कहा कि स्वयंसेवा दूसरों को कष्ट देकर नहीं होती। वो करुणा से होती है।

इस मेगा इवेंट के दौरान नया PMO एप भी लॉन्च किया गया। इस एप के जरिए लोग सीधे प्रधानमंत्री की वेबसाइट से जुड़े सकेंगे। कार्यक्रम का आयोजन सरकार के नागरिक सहभागी मंच ‘MyGov’ ने अपने दो साल पूरे होने के उपलक्ष्य में किया। इवेंट का उद्घाटन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किया। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र का सामान्य मतलब ये रह गया था कि वोट दो और पांच साल के लिए समस्याओं के समाधान का ठेका किसी को दे दो। अगर वो विफल रहा तो किसी दूसरे को ये ठेका दे दो। चुनाव जीतने के बाद सरकारों का ध्यान इस बात पर रहता है कि वे अगला चुनाव कैसे जीतें, जनाधार कैसे बढ़ाएं, क्या रास्ते खोजें और उसके कारण जिस उद्देश्य से कारवां चलता है वो कुछ ही कदमों पर जाकर ठिठक जाता है। इसके कारण हमारे देश में गुड गवर्नेंस, चेक एंड बैलेंस की व्यवस्था, स्क्रूटनी, रिस्पॉन्सिबिलिटी विथ अकाउंटिबिलिटी के प्रति उदासीनता प्रवेश कर गई। देश में बदलाव लाने के लिए जितना महत्व नीतियों, योजनाओं का है उतना ही महत्व लास्ट मैन डिलीवरी का है।

मोदी ने कहा कि आपने जो योजना बनाई उसका फल अगर अंतिम आदमी तक नहीं पहुंचा तो कुछ दिन के लिए तो वाहवाही मिल जाएगी लेकिन गुड गवर्नेंस न होने पर आम आदमी के जीवन में बदलाव नहीं आएगा। सरकारी पैसे से अस्पताल तो बन जाएगा लेकिन गुड गवर्नेंस के बिना मरीज वहां भटकता रहेगा। उसे बिस्तर नहीं मिलेगा। उचित दवाएं नहीं मिल पाएंगी। यानी बिना गुड गवर्नेंस के डेवलेपमेंट भी बेकार है। मोदी ने कहा कि हमारे यहां पंचायत में कुछ हो जाए, जिला पंचायत में कुछ हो जाए, नगर निगम में या नगर पालिका में, जिले में कुछ हो जाए या राज्य में कुछ हो जाए तो पीएम से जवाब मांगा जाता है। ये राजनीतिक रूप से तो ठीक हो सकता है, टीआरपी के लिए भी फायदेमेंद हो सकता है लेकिन गवर्नेंस के स्तर पर इसमें बहुत नुकसान हो जाता है क्योंकि पीएम के अलावा बाकी सभी लोग निश्चिंत हो जाते हैं क्योंकि उनकी जिम्मेदारी है लेकिन उनसे जवाब नहीं मांगा जा रहा।

एक सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा कि इस समय जब पूरी दुनिया में मंदी चल रही हो और दो बड़े अकाल बीते हों तब 7.5 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ पाना देश की जनता की बहुत बड़ी उपलब्धि है। मोदी ने कहा कि अगर हम अगले तीस साल तक 8 फीसदी की ग्रोथ जारी रख सकें तो दुनिया में आज जो कुछ भी अच्छा दिख रहा है वो सब आपके पास होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा क स्वास्थ्य बीमा को लेकर जल्द ही घोषणा की जाएगी। ये सरकार की प्राथमिकता में है।

मोदी ने कहा कि हमें परंपरागत कृषि से बाहर आने के लिए जितनी जल्दी कोशिश की जाए, करना होगा। किसानों को फसल की देखरेख और उसके लिए दवाओं के सही प्रयोग के लिए ज्ञान देना होगा। किसानों को प्रशिक्षित करने का हमने प्रोग्राम चलाया है। बेहतर बीज उपलब्ध कराने के लिए हमने बल दिया है और उर्वरक का सही प्रयोग कैसे किया जाए इसपर बल दिया है। खेती में क्रमिक बदलाव कैसे किया जाए इसको भी हम बता रहे हैं। टिम्बर की खेती पर जोर दिया जाए। पशुधन का पालन आदि जैसे और भी काम कृषि के साथ करना चाहिए। स्मार्ट सिटी और स्मार्ट गांव के लिए काम हम कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी एक अलग कॉन्सेप्ट है। पर जो सुविधाएं शहर को मिल रही हैं वो गांवों को भी मिलनी चाहिए। गांव की जो ताकत है वो देश को बहुत आगे बढ़ा सकती है। बहुत बड़ा बदलाव इससे आने वाला है।

मोदी ने कहा कि अगर कोई सामान्य व्यक्ति बहुत नॉर्मल कमाता है तो हम सीमित खर्च कर पाता है लेकिन अगर कोई एक और सदस्य कुछ कमाने लगता है तो परिवार की क्रयशक्ति बढ़ जाती है। और अगर वो पैसा खर्च करेगा तो इससे अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। जैसा परिवार का होता है वैसा ही देश का भी होता है। जितना ज्यादा हम प्राकृतिक संपदा प्रयोग करेंगे, उतनी हमारी उत्पादकता बढ़ेगी। हम जितनी ज्यादा युवाशक्ति को आगे बढ़ाएंगे और काम लेंगे तो उतनी हमारी शक्ति बढ़ेगी। मोदी ने कहा कि हजारों साल की जो हमारी विरासत है वो हमारी उत्पादकता बनेगी। जब ताज महल बना होगा तो लोगों ने कहा होगा कि जनता मर रही है और ये लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। पर आज उससे लाखों लोग रोजगार कमा रहे हैं।

मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र के बाद अगर रोजगार देने की क्षमता किसी में है तो वो टेक्सटाइल क्षेत्र में है। 2 अक्टूबर को कुछ न कुछ खादी का खरीदिए। कुछ न कुछ खादी का घर में तो रख सकते हैं। एक जमाना था कि जब खादी लड़ाई का नारा था। आज खादी फॉर नेशन – खादी फॉर फैशन का जमाना है। लोगों का खादी के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। हम गरीब लोगों की चीजों को पूरी दुनिया में बेचने का काम कर सकते हैं।

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