मानवाधिकार तार-तार: युवक को बंधक बनाकर पीटने में केबल एनसीआर

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक को चोर होनें के शक में बिजली पोल में रस्सी से बांधकर मारपीट की गयी थी| जिसमे मानवाधिकारों का हनन हुआ| मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है| लेकिन मामले में केबल और केबल एनसीआर दर्ज की गयी|
बीते 22 अगस्त की रात लगभग एक बजे राजेपुर थाना के ग्राम वीरसिंहपुर में मानसिक रूप से दिव्यांग युवक अंकुर पुत्र सुरेन्द्र निवासी बिरियाडेरा कुरावाई विदिशा मध्य प्रदेश को पकड़ लिया गया| ग्रामीणों नें चोर होनें के शक में उसे पकड़ा और बिजली पोल में उसे रस्सी से बांधकर जमकर मारपीट कर दी| जिसका बाकायदा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है| मारपीट के बाद मौके पर अपराध निरीक्षक कामता प्रसाद मौके पर पंहुचे पीटे गये युवक को ग्रामीणों की मदद से सीएचसी में भर्ती कराया| युवक सीएचसी से बिना पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के ही चला गया| सोशल मीडिया पर मारपीट का वीडियो वायरल होनें के बाद चर्चा का विषय बना है| थाना राजेपुर के ग्राम शेराखार निवासी बिजनेश पुत्र सूरज पाल नें वीरसिंहपुर के अर्जुन पुत्र वीर बहादुर सिंह, कुलदीप पुत्र कन्हैया बक्श, तेज प्रताप पुत्र श्याम पाल सिंह, हरेन्द्र पुत्र राम सिंह नें के खिलाफ एनसीआर दर्ज करायी| लेकिन मानवाधिकार के तहत कोई मामला दर्ज नही किया गया| फतेहगढ़ न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. दीपक द्विवेदी नें बताया कि मामला वायरल वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि किस तरह से मानव अधिकारों को तार-तार कर बंधक बनाकर मारपीट की जा रही है| मामले में बीएनएस की धारा 352 (सार्वजनिक रूप से अपमानित करना) व बीएनएस 127 (बंधक बनाने) की धारा में मुकदमा दर्ज होना चाहिए था| मामला संगीन है| एफआईआर दर्ज होनी चाहिए था| अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के प्रदेश अध्यक्ष धीरज पाण्डेय नें बताया कि वायरल वीडियो में जिस तरह से युवक को मारापीटा जा रहा है यह अमानवीय कृत्य है, मानवाधिकार का खुला उलंघन है, पुलिस को इसमे सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करना चाहिए था| किसी के साथ मारपीट का अधिकार कानून में नही दिया गया है| पुलिस मामले को गंभीरता से ले| अपराध निरीक्षक राजेपुर कामता प्रसाद नें बताया कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी नही है| जिस समय एनसीआर लिखी गयी वह बाहर थे, लेकिन वह घटना के समय मौके पर गये थे, यह कैसे लिखा गया उन्हें पता नही| मानवाधिकारों का उलंघन तो है| जाँच करायी जायेगी |

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