मातृभाषा ज्ञानार्जन का सबसे बड़ा साधन: वंदना द्विवेदी

फर्रुखाबाद:(नगर संवाददाता) हिन्दी साहित्य भारती जनपद शाखा की एक गोष्ठी समाजसेवी चिकित्सक डा. रजनी सरीन के लोहाई रोड स्थित निवास पर आयोजित की गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिलाधिकारी की धर्मपत्नी एवं हिन्दी साहित्य भारती की उपाध्यक्ष श्रीमती वंदना द्विवेदी रहीं।
गोष्ठी में उन्होंने कहा कि “राष्ट्रभाषा हिन्दी भारत की आत्मा है, इसके बिना उन्नति की अवधारणा अधूरी है। उन्होंने कवि भर्तृहरि के दोहे का उल्लेख करते हुए कहा-निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को शूल॥ उन्होंने जोर देकर कहा कि मातृभाषा ही व्यक्ति के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास का सबसे सशक्त माध्यम है। राष्ट्रीय कवि डॉ. शिव ओम अंबर ने कहा कि “मातृभाषा ही सभी प्रकार की उन्नति का मुख्य आधार है। वहीं डा. रजनी सरीन ने कहा कि ‘हिन्दी है हम, वतन है हिंदुस्तान हमारा, मातृभाषा ज्ञानोपार्जन का सबसे सहज और प्रभावी मार्ग है। कार्यक्रम में शशिकिरण सिंह एवं कृष्ण कांत ‘अक्षर’ की उपस्थिति विशेष रही। समापन अवसर पर उपस्थित सभी साहित्यकारों को ‘अभिव्यंजना’ की पत्रिका ‘अक्षरा लोक’ भेंट की गई। आलोक रायजादा, डॉ. संदीप चतुर्वेदी, अवनीन्द्र कुमार, शिवम दीक्षित, शिवांश गुप्ता, श्रीमती गुंजा जैन, प्रीति रायजादा रहे|