बिन ब्याही रेनू को अपने दो बच्चों के पिता के नाम के लिये दस लोगों के डीएनए टेस्ट की दरकार

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दो बच्चों की बिन ब्याही मां रेनू! ने अपने दो बच्चों के लिए पिता के नाम की तलाश में सूबे की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है । हाईकोर्ट को दी गई अर्जी में उसने जो लिखा है वह सभ्य समाज के लिए करारा तमाचा है । बकौल रेनू, ‘मेरे बच्चों के दस पिता हैं,  मैं किसका नाम दूं।’ पिता के नाम की शिनाख्त के लिए रेनू ने दस नामचीन लोगों के डीएनए टेस्ट कराए जाने की मांग की है । याचिका में उनके नाम भी गिनाए गए हैं । रेनू इनमें से कई लोगों के पूरे पते भी नहीं जानती। न्यायमूर्ति अब्दुल मतीन तथा न्यायमूति सुनील हाली की पीठ ने रेनू को ऐसे लोगों का सही पता ज्ञात कर अदालत को जानकारी देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है ।

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उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में रेनू का कहना है , ‘न मुझे कि सी ने बेटी, बहन, बीवी और न मां समझा, सिर्फ एक औरत समझा, जिसन कुंआरी मां बन इस प्रकृति के गुण-दोषों को अपने गर्भ में पाल उन्हें इनसान के रूप में निर्माण कर इस मिट्टी में जन्म देने का गुनाह किया है ।’ दो बच्चों की बिन ब्याही मां के मामले में बहस के दौरान हाईकोर्ट के सवालों के जवाब में रेनू ने बताया कि उसने बड़ी मुश्किल से अपने बच्चों के पिता के रूप में दस लोगों की पहचान तो कर ली लेकिन इनमें से उसके बच्चों का असली पिता कौन है ? यह सिर्फ ‘मेडिकल साइन्स’ ही बता सकता है । मेडिकल साइन्स को ऐसा करने के लिए सिर्फ यह अदालत ही निर्देश दे सकती है । रेनू ने याचिका के अंत में यह भी क हा है कि चूंकि आज की दुनिया में पहचान पत्र बनवाना जरूरी होता है इसलिए मैंने राधे सिंह का नाम अपने नाम के साथ जोड़ा है । रेनू ने याचिका में पति के स्थान पर राधेश्याम सिंह का नाम अंकित किया है ।

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