बाढ़ राहत के लिये पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी सेना तैयार

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लखनऊ: उत्तराखंड में बारिश से आई तबाही का असर उत्तराखंड की सीमा से सटे पश्चिमी जिलों में भी पड़ सकता है। इसके लिए सेना तैयार हो गई है। मध्य कमान सेनाध्यक्ष ले.जनरल अनिल चैत ने मंगलवार को पत्रकारों को उत्तराखंड में चल रहे राहत बचाव कार्य के बारे में यह जानकारी दी।

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Gen. Lt. Anil Chaitउन्होंने बताया कि उत्तराखंड से सटे जिलों मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, सहारनपुर और बिजनौर में मध्य कमान की सेना अलर्ट है। इससे पहले उन्होने उत्तराखंड में हुई तबाही में सेना के कार्य कलापों और बचाव कार्य के बारे में बताया। ले.जनरल चैत ने बताया कि केदारनाथ में छह से आठ हजार तीर्थयात्री फंसे हुए हैं। हेमकुंड में 2500 और बद्रीनाथ में आठ हजार लोग फंसे हैं। सेना यात्रियों को बचाने में जी जान से जुटी है। अगले दो दिनों तक यदि बारिश नहीं हुई तो अधिक से अधिक यात्रियों को बचाने में सेना सफल होगी। सेना के पांच हजार से अधिक जवान राहत एवं बचाव कार्य में लगे हैं। हरशिल, केदारनाथ, जोशी मठ, और धारचूला में अब तक 600 के करीब यात्रियों को बचाने में सेना को सफलता मिली है। पानी का बहाव इतनी तेज है कि सेना को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। मध्य कमान की ओर से दो हेलीकॉप्टर लोगों को निकालने में लगे हैं। हेलीपैड बनाने में परेशानी की वजह से ज्यादा हेलीकॉप्टर नहीं लगाए जा सके हैं। बारिश बंद होते ही पांच और हेलीकॉप्टर बचाव में लगाए जाएंगे। भोजन और इलाज के लिए अस्थाई कैंप लगाकर यात्रियों को सुरक्षित ले जाने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। जोशी मठ के पास 2000 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। अस्थाई पुल बनाकर सेना के जवानों को ऊंचाइयों वाले इलाकों में भेजा गया है।

हेल्पलाइन से मिलेगी चिकित्सीय सहायता

मध्य कमान सेनाध्यक्ष ने बताया कि सेना की ओर से आकस्मिक चिकित्सा हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। यात्री टोल फ्री नंबरों-18001805558, 18004190282 और मोबाइल नंबर 8009833388 पर संपर्क करके सहायता ले सकते हैं।

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