फर्रुखाबाद में नौनिहाल मचा रहे घर पर धमाल, मम्मियों की आफत

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फर्रुखाबाद: कोरोना वायरस से बचने के लिए प्रदेश सरकार ने एहतियातन सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं, इससे स्कूली छात्र-छात्राओं की मस्ती, दोस्तों संग चुहलबाजी और पार्क में खेलने या दोस्तों के घर किताब लेकर पढऩे के बहाने जाना आदि चेहरे पर खुशी लाने वाली हर गतिविधि पर मानो कोरोना ने ब्रेक लगा दिया है, लेकिन बच्चे कहां मानने वाले वो तो मस्ती का जरिया ढूंढ़ ही लेंगे। घर में कैद बच्चों ने घर को ही मनोरंजन स्थल बना लिया है। बस, खेल के सामानों की जगह नन्हे हाथों में टीवी के रिमोट व स्मार्टफोन आ गए हैं।दिल पर पत्थर रख रही माताएं
बच्चों के घर पर रहने से उनकी मम्मियों को भी खासी परेशानी हो रही है। परेशानी बच्चों से नहीं बल्कि टीवी सीरियल छूटने से हो रही है। फतेहगढ़ के दुर्गा कालोनी निवासी नीलू मिश्रा ने  बताया कि जब पसंदीदा सीरियल आता है तो बहन का बेटा सुगम कार्टून लगाकर बैठ जाता है। ये सोचकर सीरियल छोड़ देती हैं कि बाद में रिपीट होगा तो देख लेंगे। मगर उस समय उनका खुद का बेटा अपने खेल व म्यूजिक चैनल लगाकर बैठ जाता है।
न्यूज के समय याद आती पढ़ाई
घरों में पिताओं का भी हाल ऐसा ही है। दिन भर के संयम के बाद जब रात में न्यूज चैनल पर बुलेटिन समय शुरू होता है तो उनको बच्चों की पढ़ाई याद आ जाती है। बरबस बच्चों को डांटते हुए कहना पड़ता है कि दिन भर टीवी देखा है अब थोड़ी पढ़ाई लेकर भी बैठ जाओ।
बच्चों के बोल टीवी न देखें तो कहां जाएं
रखा रोड निवासी कक्षा नौ के छात्र मन शर्मा का कहना है कि घर में कैद होकर रह गए हैं। न खेलने जाते हैं न दोस्त से मिलने। घर पर ही टीवी देखते हैं या मोबाइल पर गेम खेलते हैं। टीवी भी न देखें तो कहां जाएं।
कोराना से डर, अच्छा है घर
सिकत्तरबाग निवासी कक्षा सात के छात्र देवेंश चौहान ने कहा कि, कोरोना वायरस के बारे में सुनकर डर लगता है। उन्होंने खुद ही बाहर जाना बंद कर दिया है। घर ही अच्छा है, यहीं टीवी व मोबाइल पर समय बिताते हैं।
घुमाने ले जाने की बात कहकर बहलाते हैं अभिभावकों
फतेहगढ़ निवासी संजय दुबे ने कहा बच्चों को फुटबॉल लाकर दिया है ताकि वे दूर-दूर होकर खेलें। आखिर उनको घर पर कितनी देर रोक सकते हैं। मजबूरी में मोबाइल पर खेलने व टीवी देखने की छूट भी देनी पड़ती है। वहीं जिला जेल निवासी सतेन्द्र कुमार का कहना है कि बच्चों को दोस्तों के साथ खेलने नहीं दे सकते। पार्क भेज नहीं सकते। ऐसे में बच्चों को रात में घुमाने ले जाने की बात कहकर बहलाते हैं। घुमाने जाएं भी तो चक्कर काटकर चीजें दिलाकर आ जाते हैं। इस तरह बच्चे शांत रहते हैं।
बच्चों को समय देना सबसे अच्छा मौका
फतेहगढ़ के जेएनबी रोड निवासी डौली दीक्षित नें बताया कि कोरोना के भय से विद्यालय बंद है और नौनिहाल घर पर है| उनके साथ समय गुजारना भगवान का दिया हुआ मौका है| हम सभी को अपने बच्चों को समय देना चाहिए|

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