निरक्षरता से देश को तीन लाख करोड़ का वार्षिक नुकसान

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 आर्थिक व सामाजिक विकास में निरक्षरों की भागीदारी कम होने से नुकसान

निरक्षरता के चलते प्रति वर्ष देश तीन लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठा रहा है। निरक्षरता से हो रहे इस नुकसान का आंकलन आर्थिक एवं सामाजिक विकास में निरक्षरों की कम भागीदारी को ध्यान में रख कर किया गया है। निरक्षरों की स्वास्थ्य समस्याएं और आपराधिक गतिविधियों में भागीदारी से भी राष्ट्र को आर्थिक नुकसान होता है।

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विश्व लिटरेसी फाउंडेशन के एक अध्ययन में निकाली गई है। नुकसान को आर्थिक संदर्भ में देखें तो निरक्षरता के चलते तो यह नुकसान आय, सीमित रोजगार एवं व्यवसायिक उत्पादकता तथा पूंजी निर्माण अवसरों की कमी के रूप में है। जबकि खराब सेहत, अपराध में बढ़ोतरी, कल्याण योजनाओं से न्यूनतम जुड़ाव एवं शिक्षा के अभाव को सामाजिक नुकसान के रूप में देखा गया है। इनको जोड़कर भारत का होने वाला नुकसान लगभग तीन लाख करोड़ रुपये है।

जौहरी ने कहा कि निरक्षरता के आंकड़ों को देखने एवं पढ़ने का नजरिया बदलना होगा। अगर देश के परिप्रेक्ष्य में देखें तो साक्षरता का प्रतिशत 74.04 फीसदी है लेकिन एससी/एसटी एवं मुसलिम के संदर्भ में यह आंकड़ा महज 50 एवं 48 फीसदी है। यूपी में भी साक्षरता दर 69.72 फीसदी है लेकिन उसमें पांच फीसदी भी ग्रेजुएट नहीं है। ऐसे में समाज में प्रभावी एवं उत्पादक भूमिका निभाने में अधिकांश साक्षरों की भूमिका नगण्य है।

निरक्षरता के दुष्प्रभाव अपराध व नशाखोरी में बढ़ोतरी के तौर पर देखने को मिलते हैं। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में बात करें तो यहां दो-तिहाई बाल कैदी मैट्रिक से कम पढ़े हैं। जिस परिवार का मुखिया निरक्षर है वह बिजली एवं पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से भी वंचित हैं। ऐसे में जब तक साक्षर लोग सामाजिक उत्पादकता में सक्रिय भागीदारी नहीं करेंगे तब तक इसका बहुत लाभ नहीं है।

•यूपी में निरक्षर परिवार की आय का 2.5 फीसदी हर माह गुटखे पर खर्च

•प्रदेश में 68 फीसदी किशोर कैदी मैट्रिक से कम पढ़े

•महज 5 फीसदी निरक्षर परिवारों में पानी एवं बिजली के कनेक्शन

•प्रदेश में महज 4.52% जनसंख्या ही ग्रेजुएट

•20-24 साल की पचास फीसदी लड़कियों की 18 साल से कम उम्र में ही शादी

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