नागेन्द्र का प्रत्याशी जीता तो भोजपुर टिकेट पर पुनर्विचार सम्भव?

फर्रुखाबाद: दुग्ध संघ चुनाव में बसपा और बसपा से निष्कासित पूर्व प्रत्याशी नागेन्द्र सिंह राठौर के बीच जंग एक नए मोड़ पर है| खबर है कि जिन कारणों की वजह से नागेन्द्र राठौर की टिकेट काटी गयी उन कारणों को पुख्ता करने के लिए दुग्ध संघ के अध्यक्ष पद पर नागेन्द्र के समर्थक का हारना जरुरी है| अगर ऐसा नहीं हुआ तो जनपद में बसपा के कई समीकरण बदल जायेंगे| सम्भावना भोजपुर की टिकेट के पुनर्विचार के भी हो सकते है| क्यूंकि उन हालातो में ये साबित होगा कि नागेन्द्र सिंह राठौर महेश राठौर के मुकाबले बसपा से निष्कासन के बाबजूद मजबूत है| हालाँकि हमेशा की तरह बसपा इस बात पर भी खामोश रहते हुए एक ही बात कहती आई है कि बहन जी का जो आदेश होगा उसी का पालन किया जायेगा|

अंदरखाने से मिली जानकारी के मुताबिक बसपा के भोजपुर प्रत्याशी महेश राठौर दुग्ध संघ के चुनाव में पूरी तरह घुस नागेन्द्र को पटखनी देना चाहते है| सत्ताबल, धनबल और बाहुबल तीनो का प्रयोग करके दुग्ध संघ पर कब्ज़ा करना महेश राठौर की मजबूरी भी है और जरुरत भी| ठेकेदार से नए नए नेता बने महेश राठौर अन्टू के चेले हैं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत लगभग पूरे यूपी में बनने वाले स्वास्थ्य विभाग के करोडो अरबो के भवनों का काम भी महेश ने किया है| सीबीआई सूत्रों के मुताबिक दोनों के सम्बन्ध राजनैतिक कम आर्थिक ज्यादा है| क्यूंकि स्वास्थ्य विभाग में आर्थिक लाभ के ठेकेदारी के काम महेश को विशेष रूप से अन्टू की कृपा द्रष्टि से मिले है| खबर है कि इन कामो की जाँच की फ़ाइल सीबीआई की मेज पर है और प्राथमिक एस्टीमेट और फाइनल भुगतान में डेढ़ से दोगुने अंतर बिना पी डब्लू डी के मापदंडो का प्रयोग किये हो गया| इस बात की गणित का गुणा भाग करने में सीबीआई अफसर अपनी अंगुलियाँ कल्कुलेटर पर खटखटा रहे है| ऐसे में अगर महेश नागेन्द्र को पटखनी देने में कामयाब न हो पाए तो महेश की राजनैतिक हैसियत कमजोर प्रदर्शित होगी| अब अगर भ्रष्टाचार की फ़ाइल में कहीं गाहे बगाहे नाम आ गया तो मायावती पार्टी की साख पर बट्टा नहीं लगने देंगी| मायावती की अपनी पार्टी के दागी मंत्रियो और नेताओ पर हुई कारवाही देख अब ये अंदाजा तो आसानी से लगाया ही जा सकता है| वैसे टिकेट तो उनके गुरु का भी कट चुका है|