खबर इम्पेक्ट- तीन दिन बाद दलित रमेश पुलिस कैद से हुआ आजाद

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फर्रुखाबाद: जेएनआई के पोर्टल और मोबाइल पर खबर चलते ही फर्रुखाबाद पुलिस के हाथ पैर फूल गए| मामला प्रदेश के डीजीपी तक पंहुचा तो जबाब माँगा गया| जिला स्तर के बसपा नेताओं और बसपा संगठन के हाथो की कठपुतली बने मोहम्दाबाद कोतवाल के पास कोई कानूनी जबाब न था| शुक्रवार रात नौ बजे जेएनआई पर खबर जारी होने बाद मोहम्दाबाद थाने की कैद में बिना लिखा पढ़ी के बैठाए गए दुग्ध संघ अध्यक्ष पद के दावेदार दलित रमेश को मोहम्दाबाद थाने की पुलिस उसे उसके गाँव छोड़ आई| इसी के साथ पुलिस ने सुरक्षा के बहाने निगरानी करने के लिए अपने दो सिपाही रमेश के साथ तैनात कर दिए है| घर छोड़ने से पहले रमेश के साथ मानसिक प्रताड़ना का एक और दांव भी खेला गया| उसे दो घंटे के लिए एक स्थानीय बसपा नेता के घर ले जाकर 5 लाख रुपये में बिकने के लिए दबाब भी बनाया गया|

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चंद उपरी कमाई के चक्कर में सत्ता की नतमस्तक हो रही खाकी को न अपनी इज्जत की परवाह है और न ही देश के कानून की| रमेश चन्द्र कठेरिया जो कि फर्रुखाबाद में दुग्ध संघ का निदेशक चुना जा चुका है और अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ना चाहता है सिर्फ इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है क्यूंकि उसके सम्बन्ध बसपा से निष्कासित नेता और पूर्व घोषित बसपा प्रत्याशी नागेन्द्र सिंह राठोर से है| पिछले तीन दिन से रमेश पुलिस के माध्यम से प्रताड़ित किया जा रहा है| खबर है कि इस खेल के पीछे नागेन्द्र की टिकेट कटाने वाले बसपाई है ताकि वो बहन जी नजरो में चढ़ सके| एक दलित को पुलिस द्वारा बंधक बनाबाकर दलितों और बसपा के बीच खायी बढ़ाकर छुटभैये बसपाई नेता मायावती के शुभचिंतक बनने की कोशिश में है|

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