मुकदमें फर्जी या अभियोजन की कमजोरी: दो तिहाई मुल्जिम दोषमुक्त

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फर्रुखबाद: बिगत माह सितंबर 2011 में जनपद न्यायालयों में कुल 36 मुकदमों के निर्णय हुए। इनमें से दो दर्जन में अभियुक्त दोषमुक्त हो गये, जबकि मात्र 12 मुकदमों में ही अपराधियों को सजा हो सकी। यह आंकड़ा कोई एक माह का अपवाद नहीं है। माह दर माह लगभग यही औसत रहता है। अब सवाल यह है कि क्या अधिकांश मुकदमें झूठे होते हैं? या अभियोजन व पैरवी में कमजोरी के चलते मुकदमे छूट जाते हैं। पुलिस इसके लिये गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने को ढाल बनाता दिखता  है। सवाल यह भी है कि गवाहों का इतनी बड़ी संख्या में पक्षद्रोही होने के पीछे कही उनकी असुरक्षा की भावना तो नहीं है। जरूरत है इन आंकड़ों के पीछे की हकीकत में झांक कर देखने की।

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शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक में जो आंकड़े प्रस्तुत किये गये,  उनके अनुसार माह सितंबर में कुल 36 मुकदमों में न्यायालयों से निर्णय किये गये। इनमें से 24 मुकदमों में अभियुक्त बाइज्जत बरी हो गये। शेष 12 मुकदमों में अपरधियों को सजा हो सकी। इसी प्रकार जमानतो के कुल प्रस्तुत 92 मामलों में से 47 में अभियुक्तों को जमानत पर छोड़ दिया गया। शेष 45 मामलों में जमानत देने से इनकार कर दिया गया। अभियोजन कार्यालय की पैरवी वाले तीन मुकदमों में से भी दो में अभियुक्त बरी हो गये।

जिला शासकीय अधिवक्ता चंद्र शेखर वर्मा के पास मात्र एक मुकदमा था, जिसमें उन्होंने अपराधियों को सजा करायी। एडीजीसी रामप्रकाश राजपूत कुल पांच मुकदमों की पैरवी कर रहे थे, इनमें से तीन में सजा हुइ, व दो में अभियुक्त दोष मुक्त हो गये। एडीजीसी रघुवीर दास की पैरवी वाले चार मुकदमों में मात्र दो में सजा हो सकी। एडीजीसी मोहम्मद अली के पास तीन मुकदमें थे, इनमें से दो के अभियुक्त दोषमुक्त हो गये। एडीजीसी विनोद कुमार तिवारी के पास कुल् एक मुकदमा था, वह भी अदालत से छूट गया। एडीजीसी मोहम्मद हनीफ तीन मुकदमों की पैरवी कर रहे थे। तीनों मुकदमों के अभियुक्त बाइज्जत बरी हो गये। एडीजीसी राम नरेश कटियार कुल छह मुकदमों में सरकार की ओर से पैरवी कर रहे थे, इनमें से चार के मुल्जिम साफ बच गये। एडीजीसी विमलेंद्र नरायण मिश्रा दो मुकदमों में सरकारी वकील थे, दोनो के अपराधियों को सजा हो गयी। एडीजीसी  रजनेश कुमार सक्सेना व एडीजीसी  ओम प्रकाश गौतम के पास तीन-तीन मुकदमें थे। सभी आधा दर्जन मुकदमों के अभियुक्त साफ बरी हो गये। एडीजीसी सोने लाल गौतम के पास वाले पांच मुकदमों में से चार में अभियुक्त दोषमुक्त हो गये।

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