जब मैं मां से लिपटता हूं तो मौसी मुस्कराती हैं

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rashmi pradarshani bvdcफर्रुखाबाद: बद्री विशाल कालेज में उर्दू विभाग की तरफ से एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कई शायरों ने अपने अपने तरीके से गजलें व शायरी पेश कर हिन्दू मुसलमानों व उर्दू हिन्दी के बीच के फर्क को कम करने का प्रयास किया।

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गोष्ठी में मुख्य अतिथि की भूमिका में आये डा0 शफीक अहमद अंसारी विशिष्ट अतिथि मजहर मोहम्मद खां ने दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती चित्र पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कुमारी चंचल सारस्वत ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। वैष्णवी त्रिपाठी ने स्वागत गीत गाकर अभिवादन किया। गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए सायराना अंदाज में कार्यक्रम का संचालन कर रहे उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो0 उमापति ने मुनब्बर राना का शेर पढ़ते हुए कहा कि मैं जब मां से लिपटता हूं तो मौसी मुस्कराती है, गजल उर्दू में करता हूं तो हिन्दी मुस्कराती है। वसी अहमद वसी ने कहा कि खून जब एक सा जब दोनो में रमा होता है, फर्क फिर हिन्दू और मुसलमानों में कहां होता है। बीए तृतीय वर्ष के छात्र जुनैद सिददीकी ने कहा कि तुम भी एक बार गजल कहने की आदत डालो, बेबफा दुनिया में कुछ सहने की आदत डालो।

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इस दौरान डा0 मोहसिन ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उर्दू आज बहुत तरक्की कर रही है। उर्दू विश्व के कई देशों में पढ़ी व बोली जा रही है। इस दौरान प्राचार्य एन पी सिंह, डा0 आर के तिवारी, डा0 माधुरी दुबे, डा0 प्रभात सिंह, डा0 ह्रदेश कुमार, प्रो0 ए के शुक्ला, डा0 अर्चना पाण्डेय, प्रो0 रश्मी प्रियदर्शिनी आदि मौजूद रहे।

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