डेस्क: यूपी विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र के चुनाव में 36 में से 33 सीटें जीत कर भारतीय जनता पार्टी बेशक इतरा रही हो लेकिन अतीत पर निगाह डालें तो इस चुनाव में दबदबा सत्ताधारी दल का ही रहता आया है। इस बार 36 एमएलसी सीटों में भाजपा ने 33 सीटों पर जीत दर्ज की है।विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र के चुनाव छह वर्ष के अंतराल पर होते हैं। इससे पहले वर्ष 2016 में हुए विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र चुनाव के समय अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार सत्तारूढ़ थी। तब सपा ने 36 में से 31 सीटें जीती थीं।बसपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली थी। वहीं एक-एक सीट निर्दलीय समूह और निर्दलीय के खाते में गई थी। वर्ष 2016 में विधान परिषद में सपा का संख्याबल 68 तक पहुंचाने में स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र चुनाव में मिली जबर्दस्त सफलता की बड़ी भूमिका थी।इससे पूर्व वर्ष 2010 में जब विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र के चुनाव हुए थे तो प्रदेश में मायावती की अगुआई वाली बसपा सरकार का शासन था। उस चुनाव में बसपा ने 36 में से 34 सीटें जीत कर अपने दबदबे का अहसास कराया था।सपा और कांग्रेस को सिर्फ एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा था। स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र चुनाव में 34 सीटें जीतकर ही बसपा वर्ष 2010 में उच्च सदन में अपना संख्याबल 64 तक पहुंचाने में सफल हुई थी। अखिलेश और मायावती सरकारें पूर्ण बहुमत की सरकारें थीं।
एमएलसी चुनाव में निरंतर रहा सत्ताधारी दल का दबदबा
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