उप्र में 271 करोड़पति विधायक, फिर भी वेतन वृद्धि की चाहत!

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politicsलखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के दौरान दलगत भावना से परे सभी पार्टियों के विधायक एक ही चीज को लेकर चिंतित हैं। जो बात विधायकों को मथ रही है, वह है वेतन और उनकी सुविधाएं 50,000 रुपये प्रतिमाह होना।

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विधायकों को न तो महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध और न ही गंभीर बिजली संकट की कोई चिंता है। उन्हें बस चिंता है अपने वेतन वृद्धि की और इसके लिए सभी एकमत हैं। मजे की बात यह है कि नेता महंगाई की दलील का उदाहरण देकर वेतन वृद्धि चाह रहे हैं, जबकि जनता इसके बोझ के तले पिसती जा रही है।

वरिष्ठ सदस्यों ने अपने वेतन-सुविधाओं में वृद्धि की खुलेआम ‘अनिवार्यता’ का नारा बुलंद किया है ताकि वे ‘अपने अतिथियों को’ कम से कम चाय-बिस्कुट तो करा सकें। यह सब उस सदन में चल रहा है जिसमें 403 माननीयों की कुर्सियों पर 271 करोड़पति विराजमान हैं। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में विधायकों के सौंपे गए शपथपत्रों के आधार पर तैयार की गई डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विधानसभा की 67 प्रतिशत सीटों पर धनकुबेरों का कब्जा है।

इन धनकुबेरों में सबसे ज्यादा सत्ताधारी समाजवादी पार्टी (सपा) के हैं। पार्टी के 140 विधायक करोड़पति हैं। इसके बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 63, कांग्रेस के 18 और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के 7 विधायक करोड़पति हैं। इन करोड़पतियों के बीच नवाब काजिम अली (कांग्रेस), सुभाष (सपा), संजय प्रताप जायसवाल (कांग्रेस), नूर राना (बसपा) और विमला सिंह (बसपा) प्रमुख नाम हैं। [bannergarden id=”8″] [bannergarden id=”11″]

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