FARRUKHABAD : जनपद में वैसे तो प्रति वर्ष गंगा के तराई क्षेत्र के ग्रामीणों को बाढ़ की विभीषिका से जूझना पड़ता है। लेकिन इस बार धीरे-धीरे लगभग दो माह गुजर चुके हैं और बाढ़ का पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। गंगा का जल स्तर बीते तीन दिनों से दोबारा बढ़ना जारी है। वहीं प्रशासन इन बाढ़ पीडि़तों की मदद तो दूर इनकी निगरानी से भी आंखें बंद किये हुए है। जिससे बाढ़ पीडि़तों का जीवन इस समय दुस्वारी से गुजर रहा है।
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रविवार को गंगा का जल स्तर 136.85 मीटर पर आंका गया था लेकिन सोमवार को यही जल स्तर 10 सेमी बढ़कर 136.95 मीटर पर पहुंच गया है। वहीं सोमवार को गंगा में नरौरा बांध से 218783 क्यूसेक पानी और छोड़ दिये जाने से अगले दो दिनों में बाढ़ की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। वहीं रामगंगा का जल स्तर 20 सेमी बढ़कर 136.5 पर पहुंच गया है। रामगंगा में 7497 क्यूसेक पानी फिर छोड़ दिया गया है। लेकिन प्रशासन की तरफ से मात्र कागजों में ही बाढ़ पीडि़तों की मदद का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। हकीकत में बाढ़ पीडि़तों को प्रशासन की तरफ से नावें तक मुहैया नहीं करायी गयी हैं। स्वास्थ्य टीमों के नाम पर स्वास्थ्य विभाग में बजट का बंदरबांट का खेल चल रहा है लेकिन बाढ़ पीडि़तों को अब तक लाल पीली गोली तक मुहैया नहीं करायी गयी है।
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बाढ़ से घिरे गांवों में लोग बुखार, डायरिया, हैजा इत्यादि बीमारियों से जूझ रहे हैं। पड़ोसी गांवों में रहने वाले झोलाछाप डाक्टरों के सहारे जिंदगी बचाने की कोशिश की जा रही है। यही हाल बाढ़ पीडि़तों के लिए बनाये गये बाढ़ शिविरों का है, जहां पर बाढ़ पीडि़तों के लिए कोई उचित सुविधा नहीं की गयी है। मात्र एक वक्त खाने की ही व्यवस्था की गयी है। जिससे बाढ़ पीडि़तों का जीवन अब दुस्वारियों से गुजर रहा है।


