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जिला जेल में सियाराम का हुआ वनवासजिला जेल में सियाराम का हुआ वनवास फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)बीते लगभग पांच दिनों से जिला जेल में चल रही राम लीला जनपद में चर्चा का विषय बनी हुई है| आपराधिक मानसिकता के लोगों में अध्यात्म की गंगा बहाने का काम किया जा रहा है| जिसके चलते यह जिला जेल में पहली अनोखी पहल है| जो बंदियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार...

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सीएमओं ने खड़े होकर जलवा दी लाखों की दवाएंसीएमओं ने खड़े होकर जलवा दी लाखों की दवाएं फर्रुखाबाद:सीएमओ कार्यालय के निकट परिवार नियोजन से सम्बन्धित करोड़ो रूपये की दवा व प्रचार सामिग्री सीएमओं अरुण उपाध्याय की मौजूदगी में आग के हवाले कर दी गयी| इस काम को अंजाम सीएमओ कार्यालय के पूर्व शोध अधिकारी अनिल कटियार निवासी नेकपुर चौरासी ने दिया| अनिल कटियार ने बताया...

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पति के दोस्तों ने नकदी जेबरात चोरी कर महिला की इज्जत लूटीपति के दोस्तों ने नकदी जेबरात चोरी कर महिला की इज्जत लूटी फर्ररूखाबाद:बीती रात एक सनीखेज मामला सामने आया है| घर आये पति के दोस्तों ने महिला के साथ गैंग रेप कर उसके घर से नकदी व जेबरात चोरी कर लिये| घटना के सम्बन्ध में पुलिस को तहरीर दी गयी| पुलिस ने जाँच पड़ताल शुरू कर महिला को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया| थाना मऊदरवाजा क्षेत्र...

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खड़े होकर पानी पीते हैं? तो जान लीजिए गंभीर नुकसानखड़े होकर पानी पीते हैं? तो जान लीजिए गंभीर नुकसान डेस्क: यह तो हम सभी जानते हैं कि पूरे दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीना हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी होता है। लेकिन आपको यह नहीं पता होगा कि जिस पोजीशन में आप पानी पीते हैं उसका भी आपकी सेहत पर असर पड़ता है। आपके बड़े-बुजुर्ग हमेशा से कहते आए होंगे कि बैठ कर शांति से पानी...

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करवाचौथ पर शुक्र अस्त होने के कारण इस बार नहीं होगा व्रत का उद्यापनकरवाचौथ पर शुक्र अस्त होने के कारण इस बार नहीं होगा व्रत का... नई दिल्ली:वर्ष करवाचौथ 27 अक्टूबर को है। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को करवाचौथ का व्रत किया जाता है। सुहागिन महिलाओं के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है। करवाचौथ के दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। कई संप्रदायों में कुवांरी कन्याएं भी अच्छे पति की...

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पुलिस की पिटाई से बीजेपी समर्थक की मौत पर बबाल,लगाया जामपुलिस की पिटाई से बीजेपी समर्थक की मौत पर बबाल,लगाया जाम फर्रुखाबाद: साथी के साथ गये युवक से पुलिस ने युवक से मारपीट कर दी| जिससे उसकी मौत हो गयी| आक्रोशित भीड़ ने परिजनों के साथ जाम लगाकर जमकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की| मौके पर पंहुचे एएसपी ने कार्यवाही का भरोसा दिया| जिसके बाद जाम खोला जा सका| शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला दरीवा...

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स्कूल बैन की गैस से मासूम छात्रों की हालत बिगड़ीस्कूल बैन की गैस से मासूम छात्रों की हालत बिगड़ी फर्रुखाबाद:(मेरापुर/नबावगंज) विधालय बच्चो को लेकर जा रही बैन की गैस निकलने से उसमे बैठे कई मासूम छात्र-छात्राओं की हालत बिगड़ गयी| ग्रामीणों का आक्रोश देख बैन का चालक मौके से खिसक गया| जिसके बाद मौके पर पंहुचे एसपी ने जाँच पड़ताल कर कार्यवाही के निर्देश दिये|जिसके बाद विधालय...

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श्रीराम की बारात में श्रद्धालु हुये भावविभोरश्रीराम की बारात में श्रद्धालु हुये भावविभोर फर्रुखाबाद:श्री राम विवाह की शोभायात्रा में सभी बरातियो ने जमकर लुफ्त उठाया| वही राम-सिया के विवाह मंचन से बारात तक के कार्यक्रम में सभी मनोहारी झाँकियो को देख कर श्रद्धालु भावविभोर हो गये| राम बारात में जैसे ही श्री राम के गले में सीता जी ने वरमाला डाली तो रामचरित मानस...

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खड़े होकर पानी पीते हैं? तो जान लीजिए गंभीर नुकसान

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Posted on : 16-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, जिला प्रशासन, सामाजिक

डेस्क: यह तो हम सभी जानते हैं कि पूरे दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीना हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी होता है। लेकिन आपको यह नहीं पता होगा कि जिस पोजीशन में आप पानी पीते हैं उसका भी आपकी सेहत पर असर पड़ता है। आपके बड़े-बुजुर्ग हमेशा से कहते आए होंगे
कि बैठ कर शांति से पानी पीना चाहिए। इसका कारण ये है कि बैठने पर हमारी मांसपेशियां और नर्वस सिस्टम रिलेक्स हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में धीरे-धीरे पानी पीने से शरीर को फायदा होता है। वहीं कई लोग जल्दबाजी में खड़े होकर व चलते-फिरते ही फटाफट गटक कर पानी पी जाते हैं :
आइए, आपको बताते हैं, खड़े होकर पानी पीने से कौन से नुकसान हो सकते हैं –
1. जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो, तब इसोफेगस के जरिए प्रेशर के साथ पानी पेट में तेजी से पहुंचता है। इससे आपके पेट पर अधिक प्रेशर पड़ता है।
2. प्रेशर पड़ने से पेट व आसपास की जगह और डाइजेस्टिव सिस्टम को नुकसान पहुंचता है।
3. पानी प्रेशर के साथ पेट में जाता है तब सभी इंप्योरिटीज ब्लैडर में जमा हो जाती हैं, जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
4. पानी के प्रेशर से शरीर के पूरे बायोलॉजिकल सिस्टम पर प्रभाव पड़ता है।
5. खड़े होकर पानी पीने से फेफड़ों पर भी बुरा असर पड़ता है क्योंकि इससे हमारे फूड पाइप और विंड पाइप में ऑक्सीजन की सप्लाई रूक जाती है।
6. जो लोग हमेशा ही खड़े होकर पानी पीते है उन्हें फेफड़ों के साथ-साथ दिल संबंधी बीमारी होने की संभावना अधिक होती है।
7. खड़े होकर पानी पीने से प्यास
ठीक से नहीं बुझती और तृप्ति का एहसास नहीं होता। इसे कारण से आपको बार-बार प्यास लगती है।

आप भी पहनते हैं कछुए वाली अंगूठी, तो आपके लिए हैं ये 5 टिप्स –

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Posted on : 05-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, धार्मिक, सामाजिक

डेस्क: समृद्धि‍कारक माना जाता है। वर्तमान में कछुए वाली अंगूठी पहनने का प्रचलन भी बढ़ गया है, जिसे ज्योतिष वास्तु के मिश्रण के रूप में देखा जा सकता है। जानते हैं कछुए वाली अंगूठी को लेकर क्या हैं धारणाएं और किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी
1 ऐसा माना जाता है कि कछुआ लक्ष्मी का प्रतीक है और यह समुद्र मंथन में प्राप्त हुआ था। इसे साथ रखने या पहनने से धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
2 कछुए की अंगूठी पहनते समय इसकी दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जब भी इस अंगूठी को पहनें, तो कछुए के सिर वाला हिस्सा आपकी ओर हो और पीछे का हिस्सा बाहर की ओर।
3 चूंकि इसे लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है, अत: इस अंगूठी को धारण करने के लिए शुक्रवार का दिन शुभ होता है, जो स्वयं लक्ष्मी का दिन माना जाता है।
4 शुक्र का संबंध चांदी से है, अत: इसे चांदी की धातु में बनवाना चाहिए और फिर विधि पूर्वक धारण करना चाहिए।
5 इसे आप किस अंगुली में पहन रहे हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। ध्यान रखें कि इस अंगूठी को तर्जनी अंगुली में धारण करें।

राशिफल: देखें कैसा रहेगा आज आपका दिन

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Posted on : 05-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, धार्मिक, सामाजिक

डेस्क:आज के दिन का राशिफल, कैसा होगा आपका दिन, किसे मिलेगा प्यार, किसका चलेगा व्यापार, करियर में किसे मिलेगी उड़ान, किसे मिलेगा धन अपार… हर वर्ग के लिए जानिए दैनिक राशिफल
मेष- नकारात्मकता बढ़ेगी। शोक समाचार प्राप्त हो सकता है। बोलचाल में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। मान घट सकता है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। दूसरों से अपेक्षा पूरी न होगी। कुसंगति से बचें। उत्साह में कमी रहेगी। धैर्य रखें। व्यवसाय ठीक चलेगा। उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं।
वृष- मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी। निवेश शुभ रहेगा। यात्रा मनोनुकूल रहेगी। अधिकारीगण प्रसन्न रहेंगे। नौकरी में प्रमोशन हो सकता है। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।
मिथुन- मेहमानों का आवागमन रहेगा। व्यय होगा। उत्सावर्धक सूचना मिलेगी। विवाद को बढ़ावा न दें। आत्मसम्मान बना रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। परिवार में मतभेद बढ़ सकते हैं। जोखिम न उठाएं। व्यवसाय ठीक चलेगा। लोगों से अपेक्षित सहयोग प्राप्त होगा।
कर्क- रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। कोई बड़ी समस्या दूर हो सकती है। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। यात्रा मनोनुकूल रहेगी। नौकरी में काम का बोझ बढ़ सकता है। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। जोखिम लेने से बचें।
सिंह- स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। व्ययवृद्धि से तनाव रहेगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। कानूनी बाधा आ सकती है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। लेन-देन में सावधानी रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यवसाय ठीक चलेगा। लाभ कम रहेगा।
कन्या- यात्रा मनोनुकूल रहेगी। रुका हुआ पैसा मिल सकता है, प्रयास करें। उच्चाधिकारी सहयोग करेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। धन प्राप्ति सुगम होगी। परिवार की चिंता रहेगी। अपेक्षित कार्य समय पर पूरे होंगे। विवाद को बढ़ावा न दें।
तुला- योजना फलीभूत होगी जिसका लाभ तत्काल नहीं मिलेगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। कार्यसिद्धि होगी। प्रसन्नता रहेगी। आलस्य का अनुभव होगा। मित्र व संबंधी सहयोग करेंगे। धन प्राप्ति सहज ही होगी। आय के स्रोतों में वृद्धि हो सकती है। जल्दबाजी न करें।
वृश्चिक- कोर्ट व कचहरी के मामले सुलझ सकते हैं। तंत्र-मंत्र में रुचि जागृत होगी। क्रोध न करें। आय में वृद्धि होगी। उच्चाधिकारी संतुष्ट नहीं होंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यवसाय ठीक चलेगा। किसी बड़ी समस्या का समाधान होगा। प्रसन्नता रहेगी।
धनु- परेशानी बढ़ने का समय है। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। दूसरों के भरोसे कार्य न करें। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। कुसंगति से बचें। वरिष्ठजनों की सलाह मानें, लाभ होगा। घर-बाहर तनाव रह सकता है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें।
मकर- सगे-संबंधी सहयोग करेंगे। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। राजकीय बाधा दूर होगी। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। काम का बोझ बढ़ सकता है। आय में वृद्धि होगी। थकान रहेगी।
कुंभ- उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। संपत्ति के बड़े सौदे हो सकते हैं। बड़ा लाभ होगा। रोजगार में वृद्धि होगी। निवेश लाभदायक रहेगा। व्यावसायिक यात्रा में सावधानी रखें। घर-बाहर तनाव रह सकता है। नए लोगों से संबंध बन सकते हैं।
मीन- यात्रा मनोरंजक रहेगी। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। धनलाभ होगा। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता मिलेगी। सामाजिक कार्य होंगे। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। वृ‍द्धजन मार्गदर्शन देंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। जोखिम न लें। विवाद से बचें।

जयंती विशेष:जंगे आजादी के दौरान तीन बार जिले में पड़ें बापू के कदम

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Posted on : 02-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, POLICE, सामाजिक

फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)स्वतंत्रता आन्दोलन की बात करे तो जिले का भी नाम सुर्ख़ियों में रहा है| जनपद में भी बड़े-बड़े आजादी के मतवाले जंगे आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया और फिर भारत माँ की मिट्टी में अपना अस्तित्ब खो दिया| उसी आन्दोलन के शोले को ज्वाला बनाने का काम गाँधी जी ने फर्रुखाबाद से कई बार किया| आजादी के आन्दोलन के दौरान उनके कदम तीन बार जिले की सरजमी पर पड़े और उन्होंने आजादी के आन्दोलन को धार दी|
इतिहास कारों की माने तो जिले में महात्मा गाँधी ने आकर सरस्वती भवन में सभा को संबोधित किया था और दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में बैठकर खिलाफत आंदोलन को दिशा दी थी। तब उनके साथ आचार्य कृपलानी, कस्तूरबा गांधी और मौलाना शौकत अली जैसी हस्तियां भी आईं थी। इतिहासकारों का कहना है कि वर्ष 1919 में असहयोग व खिलाफत आंदोलन शुरू किया| जिसमे उन्होंने हिंदू व मुसलमानों को एक साथ जोड़ने की कबायत शुरू की| इसी को देखते हुये उन्होंने पहले नगर के सरस्वती भवन में सभा की उसके बाद दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में बैठक कर तत्कालीन सज्जादा नशीन हजरत फरखुद अली उर्फ फुंदनमियां को आन्दोलन की कमान सौपी थी| वहीं उनके साथ जाने-माने क्रांतिकारी नेता मौलाना मोहम्मद अली भी फर्रुखाबाद आए थे।
इसके बाद वर्ष 22 सितंबर 1929 को भी गांधी जी अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी के साथ यहां आए थे। उस दौरे में उनके साथ आचार्य कृपलानी भी आए थे। तब महान क्रांतिकारी नेता कालीचरण टंडन, श्रीकृष्ण मल्होत्रा, ब्रजकिशोर ने गांधी जी से प्रेरणा लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। उन्होंने सरस्वती भवन में सभा को सम्बोधित किया| तीसरी बार वह पाँच वर्ष बाद ही वर्ष1934 जनपद आ गये| उन्होंने तब छुआछूत निवारण व हरिजन सेवक अख़बार का प्रसार किया| इस दौरान उनके साथ आचार्य कृपलानी भी आए थे। तब महान क्रांतिकारी नेता कालीचरण टंडन, श्रीकृष्ण मल्होत्रा, ब्रजकिशोर ने गांधी जी से प्रेरणा लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। इतिहासकार डॉ० रामकृष्ण राजपूत के अनुसार वह अखबार उनके संग्रहालय में आज भी उपलब्ध है|

बदले-बदले सरकार नज़र आते हैं,घर की बर्बादी के आसार नज़र आते हैं!

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Posted on : 30-09-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, जिला प्रशासन, सामाजिक

फर्रुखाबाद:एक पुरानी कहावत है- ‘देख पराई चूपड़ी मत ललचावे जी (जीव)’, मगर यहाँ बात रूखी-सूखी रोटी की नहीं वरन पत्नी की हो रही है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फ़ैसले से पति परमेश्वर की ग़ुलामी से निजात दिला दी है! जाने कब से अपनी अकल और दूसरे की ब्याहता सर्वश्रेष्ठ समझने वालों की कमी नहीं रही है। इसीलिए शादी के बाद परपुरुष के साथ रमण को पाप ही नहीं, अपराध भी समझा जाता रहा है।
बाइबिल में जो दस महा आदेश (कमांडमेंट) दर्ज हैं, उनमें एक अडल्ट्री को गर्हित वर्जित आचरण में शुमार करता है। हिंदू परंपरा में पतिव्रत धर्म की बड़ी महिमा है पर ईसाई और मुसलमान, यहूदी आदि भी इस ‘दुराचरण’ को दंडनीय अपराध मानते रहे हैं। ‘सेवेंथ सिन’ से लेकर ‘सिलसिला’ तक जैसी फ़िल्मों की कहानी बेवफ़ाई की दास्तान का ही बखान करती हैं। कमांडर नानावती का पुरदर्द अनुभव भी अपनी पत्नी के ‘विश्वासघात’ से ही उसके प्रेमी की हत्या तक पहुँचाने वाला सिद्ध हुआ।
कुछ लोगों को लगता है कि भारत के पूर्व वायसराय माउंटबेटन की पत्नी की नेहरू के साथ घनिष्ठता इस हसीन गुनाह की सीमारेखा के बहुत पास फिसलती रही थी। विडंबना यह है कि आला अदालत के इस फ़ैसले तक इस जुर्म की शिकायत सिर्फ़ आहत पति या पत्नी ही कर सकते थे। बाक़ी हाल वही था- ‘जब मियाँ-बीवी राज़ी तो क्या करेगा क़ाज़ी?’
वैसे हक़ीक़त यह थी कि बेचारी पत्नी या पति कुछ भी करने में असमर्थ रहते थे अगर उनके जीवनसाथी को किसी ताक़तवर प्रेमी ने रिझा लिया हो। ‘मेरी बीबी को उसके प्रेमी से बचाओ!’ की गुहार लगाने के अलावा वह कर भी क्या सकते थे?
अच्छे दिन आएंगे?
जब मीरा ने गाना शुरू किया ‘कुल की कानि…’, ‘मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई’ तब राणा बिस का प्याला भेज कर भी लाचार ही रहे। और जब कृष्ण कन्हैया की मुरली की धुन सुन मगन भई गोपियाँ आधी रात घर से स्वजनों को छोड़ निकल पड़ती तब यह तय करना असंभव हो जाता था कि उनका आकर्षण शारीरिक था या आध्यात्मिक।
भारत के मिथकों पुराणों में ऐसे आख्यानों का अभाव नहीं जिनमें दंड निर्दोष छली गई पत्नी को ही दिया जाता है। इंद्र जब पति का रूप धर अहिल्या को भ्रमित कर सहचरी बनाता है, ऐसा ही प्रसंग है। ज़ाहिर है कि अब तक अंधे कानून का पलड़ा पुरुष की तरफ़ ही झुका था और स्त्रियों के समानता के अधिकार का हनन होता था। पर क्या सुप्रीम कोर्ट की इस दहाड़ से पलक झपकते उनके अच्छे दिन आ जाएँगे?
फ़ैसले में साफ़ कहा गया है कि पत्नी के शरीर पर पति का मालिकाना हक नहीं। सरकार की यह दलील ख़ारिज कर दी गई कि इस ‘दुराचरण’ को दंडनीय जुर्म नहीं रखा गया तो ‘विवाह की पवित्र संस्था’ ख़तरे में पड़ जाएगी। विवाह सभी धर्मों में इसे पवित्र बंधन नहीं, एक क़रार अनुबंध समझा जाता है।
यह तर्क धर्मनिरपेक्ष समाज में अकाट्य नहीं समझा जा सकता। इसके साथ-साथ यह जोड़ने की ज़रूरत है कि एक तरक्की पसंद अदालती फ़ैसले से पितृसत्तात्मक संस्कारों की दक़ियानूस बेड़ियाँ ख़ुद ब ख़ुद नहीं टूटने वाली। जिस तरह वयस्कों के बीच सहमति से समलैंगिक संबंधों को अब भारत में जुर्म नहीं माना जाता, उसी तरह विवाहेतर शारीरिक संबंध अब निजता के बुनियादी अधिकार के सुरक्षा कवच का संरक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
क्या अतिआशावादी उतावली नादानी है?
सोचने की बात यह है कि कितने बुनियादी या मानव अधिकार उन सभी नागरिकों की पहुंच में हैं, जो इनके उल्लंघन के शिकार होते हैं? जहाँ कन्या शिशु की भ्रूण हत्या, बलात्कारों से लेकर अंतर्जातीय-अंतर सांप्रदायिक प्रेम विवाह ‘ऑनर किलिंग’ तक जैसे जघन्य अपराधों को समाज सहज भाव से स्वीकार कर लेता है और इनके अभियुक्तों को सज़ा दिलाने में सरकार की नाकामी हमें यही सोचने को मजबूर कर रही है कि अतिआशावादी होने की उतावली नादानी है।
यह तरक़्क़ी पसंद फ़ैसला शादी की बुनियाद को निश्चय ही कमज़ोर करने वाला है। यह कहना ठीक है कि जब मन ही नहीं मिल रहे तब ज़बरन बदन मिलाते रहने का क्या तुक है? परंतु अगर इसी तर्क को शीर्षासन करा दें तो यह भी सुझा सकते हैं कि बदन तो गौण हैं, मन मिला रहे तो जन्म-जन्म का साथ निभाते रहना चाहिए।तन, बदन और मन को इतनी आसानी से अलग किया जा सकता है क्या? अंग्रेज़ी मुहावरा में जिसे सातसाली खुजली कहा जाता है वह वैवाहिक जीवन की ऊब को दूर करने की लंपट छटपटाहट ही तो है।
‘दगा-दगा, वई-वई’ की मीठी खुजली जो फिसलन भरी पगडंडी तक पहुँचा देती है। इस प्रलोभन से बचने में ही भलाई नज़र आती हैं। जितना खुजाएँगे दाद उतना बढ़ेगा। तसल्ली कहाँ होती है? शादी के साथ सेक्स अभिन्न रूप से जुड़ा है और यह कहना मुश्किल है कि इस मिठाई या चाट को मिल बाँट कर खाया पचाया जा सकता है।
तलाक़ के लिए अभी भी परपत्नी या परपुरुष गमन को आधार बनाया जा सकता है। जब ऐसे मुक़दमे अदालत के सामने आएँगे तब निजता का हनन नहीं होगा क्या?अदालत का यह कहना ठीक है कि अविवाहित या विधवा और विधुर के साथ विवाहेतर शारीरिक संबंध अगर अपराध नहीं तो फिर बदफैली (कुकर्मी) के ही साथ नाइंसाफ़ी क्यों। मगर क्या यह विवाह के साथ जुड़े संतान और उत्तराधिकार के क़ानून, आज़ाद मिज़ाज के खुले रिश्तों को क़बूल करने के बाद अक्षत रहेंगे?… बदले बदले हमें सरकार नज़र आते हैं, घर की बर्बादी के आसार नज़र आते हैं!

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