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100 सीसी टू-व्हीलर के इंश्योरेंस पर दें सिर्फ इतने पैसे, सरकार बदल चुकी है नियम

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Posted on : 20-01-2019 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, राष्ट्रीय, सामाजिक

नई दिल्ली:इंश्योरेंस को लेकर नए नियम बीमा नियामक इरडा (इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी) लागू कर चुकी है। इस नए नियम के चलते कार या टू-व्हीलर्स खरीदते समय ही 3 या 5 साल के लॉन्ग टर्म थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को लेना अनिवार्य हो चुका है। यानी अब वाहन खरीदते समय खरीदारों को ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। कई बार ऐसा होता है कि एजेंट गतल जानकारी देकर पॉलिसी बेच देते हैं।
ऐसे में अगर आपको कोई गलत जानकारी दे या फिर एक्स्ट्रा चार्ज ले तो आप उसकी शिकायत सीधे इरडा में कर सकते हैं। आज हम आपको अपनी इस खबर में थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या होता है वह तो आपको बताएंगे ही इसके साथ ही यह भी बताएंगे की नई गाड़ी खरीदते समय आपको कितने रुपये देने होंगे। साथ ही आप शिकायत कैसे कर सकते हैं।
क्या होता है थर्ड पार्टी इंश्योरेंस?
मोटर वाहन कानून के तहत थर्ड पार्टी बीमा का प्रावधान काफी पहले ही लागू किया गया है। इसे थर्ड पार्टी लायबिलिटी कवर के नाम से भी जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट पता चलता है कि यह तीसरे पक्ष के बीमा से संबंधित है। जब मोटर वाहन से कोई दुर्घटना होती है तो कई बार इसमें बीमा कराने वाला व बीमा कंपनी के अलावा एक तीसरा पक्ष भी शामिल होता है, जो प्रभावित होता है। यह प्रावधान इसी तीसरे पक्ष यानी थर्ड पार्टी के दायित्वों को पूरा करने के लिए बनाया गया है।
बाइक के लिए कितना होगा खर्चा?
75 cc इंजन तक की बाइक के लिए 1045 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
75 से 150 cc इंजन वाली बाइक के लिए 3285 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
150 से 350 cc इंजन वाली बाइक के लिए 13034 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
कार के लिए कितना होगा खर्चा?
नई पॉलिसी लागू होने के बाद 1000cc वाले इंजन की कार के इंश्योरेंस के लिए 5286 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
1000-1500 cc वाले इंजन की कार के लिए 9534 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
1500 cc से ज्यादा कैपेसिटी वाली इंजन की गाड़ी के लिए 24305 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
बता दें कि फोर-व्हीलर के लिए जहां इंश्योरेंस तीन साल का है, वहीं टू-व्हीलर के लिए यह 5 सालों का है।
कहां कर सकते हैं शिकायत
एजेंट द्वारा दी गई गलत जानकारी देकर पॉलिसी खरीदने के बचने के लिए आप इरडा में इसकी शिकायत कर सकते हैं। ऐसे में सबसे पहले आपको बीमा कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क जरूर करना चाहिए। यहां से समाधान न होने पर आप इरडा के शिकायत निवारण सेल के टोल फ्री नंबर – 155255 पर भी शिकायत कर सकते हैं। डॉक्युमेंट्स के साथ इरडा की email id – complaints@irdai.gov.in पर भी शिकायत भेज सकते हैं। यहां से भी अगर समस्या का हल न हो तो आप बीमा लोकपाल तक अपनी शिकायत पहुंचा सकते हैं।

जीएसटी रिटर्न नहीं भरा, तो नहीं मिलेगा ई-वे बिल

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Posted on : 20-01-2019 | By : JNI-Desk | In : BUSINESS, FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, सामाजिक

नई दिल्ली:समय पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न दाखिल नहीं करने वालों के लिए अब कारोबार आसान नहीं रह जाएगा। लगातार छह महीनों तक की अवधि के लिए जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले कारोबारी जब ई-वे बिल निकालना चाहेंगे, तो सिस्टम खुद-ब-खुद उन्हें बिल जारी करने से इन्कार कर देगा।
अधिकारियों के मुताबिक इसका मकसद जीएसटी चोरी रोकना है। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ऐसा आइटी सिस्टम तैयार कर रहा है। यह सिस्टम तैयार हो जाने के बाद उन सभी कारोबारियों के लिए ई-वे बिल निकालना असंभव हो जाएगा, जिन्होंने लगातार दो तिमाहियों का जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं किया होगा। अधिकारी ने कहा कि जैसे ही यह सिस्टम विकसित हो जाएगा, इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर, 2018) में केंद्रीय टैक्स अधिकारियों ने जीएसटी की चोरी या नियम उल्लंघन के 3,626 मामले पकड़े हैं। अधिकारियों के मुताबिक ये मामले 15,278.18 करोड़ रुपये मूल्य के हैं।
गौरतलब है कि जीएसटी चोरी या करवंचना रोकने के लिए ही चालू वित्त वर्ष के पहले दिन यानी पहली अप्रैल, 2018 से ई-वे बिल सिस्टम लागू किया गया था। इसके तहत 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के माल की एक से दूसरे राज्य में ढुलाई के लिए ई-वे बिल अनिवार्य किया गया। एक ही राज्य में माल ढुलाई के लिए ई-वे बिल की अनिवार्य जरूरत 15 अप्रैल, 2018 से लागू की गई। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के प्रत्येक महीने में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जीएसटी राजस्व की उम्मीद लगाई थी। लेकिन अब तक का संग्रह औसतन 96,000 करोड़ रुपये मासिक ही रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी से हासिल राजस्व में वृद्धि और कारोबारियों से इस व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कर चोरी के तंत्रों को मजबूती देनी होगी। इसी के तहत अधिकारी ई-वे बिल को भारतीय राष्ट्रीय राजर्मा प्राधिकरण (एनएचएआइ) के फास्टैग से जोड़ने की योजना बना रहे हैं। इस योजना पर क्रियान्वयन इस वर्ष पहली अप्रैल से होना है। जांच अधिकारियों को पता चला है कि कई कारोबारी एक ही ई-वे बिल पर कई चक्कर लगाकर सरकार को चूना लगाते हैं। ई-वे बिल को फास्टैग से जोड़ देने का फायदा यह होगा कि अधिकारियों को पता चल जाएगा कि किसी वाहन ने कितनी बार कोई टोल प्लाजा पार किया है।

अब कोई डर नही,एप से ऑन-ऑफ होगा अपना एटीएम

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Posted on : 20-01-2019 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, जिला प्रशासन, सामाजिक

डेस्क:आपका एटीएम कार्ड चोरी हो गया, क्लोनिंग हो गई या कहीं गिर भी गया तो चिंता की कोई बात नहीं.. मोबाइल एप पर क्लिक कीजिए और कार्ड लॉक। अब आप बैंकों द्वारा जारी एप से अपने एटीएम कार्ड को बंद और खोल सकते हैं। खाते में धन महफूज रहेगा और एटीएम कार्ड ले जाने वाले के मंसूबे पूरे नहीं होंगे।
खाताधारकों को लाखों का चूना लगाया
कई बैंक इस तरह के एप लाए हैं जो खाताधारकों को मजबूत सुरक्षा दे रहे हैं। दरअसल साइबर क्राइम के दौर में एटीएम कार्ड की क्लोनिंग, धोखे से पासवर्ड मांगकर बैंक खाताधारकों को लाखों का चूना लगाया जा रहा है। इसके साथ ही ऑनलाइन खरीदारी कर खातों से धन गायब किया जा रहा है। आज के दौर में शायद ही कोई ऐसा खाताधारक हो जिसके पास ‘बैंक मैनेजर बोल रहा हूं’ कहते हुए कोई फोन नहीं आया हो। कई बार तो पढ़े-लिखे लोग भी उनके झांसे में फंस जाते हैं लेकिन अब उपभोक्ताओं के साथ ठगी नहीं हो सकेगी।
ये हैं बैंकों के एप
केनरा बैंक, बैंक आफ बड़ौदा इस तरह के एप पहले से लाए हैं जिससे इस तरह की धोखाधड़ी रुक सके और अब खाताधारकों की संख्या के लिहाज से सबसे बड़ा स्टेट बैंक भी ऐसा एप लाया है। इसमें केनरा बैंक ‘एम सर्व’ एप चल रहा है तो बैंक आफ बड़ौदा का ‘एम कनेक्ट प्लस’ एप है। अब स्टेट बैंक ‘एसबीआइ क्विक’ एप लाया है।
इस तरह काम करता है एप
इन एप से रुपये निकाले या जमा नहीं किए जा सकते लेकिन खाताधारक अपने एटीएम कार्ड को मोबाइल से ही किसी भी समय ब्लाक या ऑन, ऑफ कर सकता है। एटीएम कार्ड जिस समय ऑन होगा, उसी समय उससे धन निकाला जा सकेगा। इसमें भी पांच ऑप्शन दिए हैं। इनमें से खाताधारक जो ऑप्शन चाहे उसे बंद कर सकता है, जो चाहे चालू रख सकता है। खाताधारक चाहे तो एटीएम बूथ, पोस मशीन, ऑनलाइन किसी भी तरह धन नहीं निकलेगा, चाहे कार्ड व पासवर्ड चोरी हो गए हों। इसके अलावा देश या विदेश जहां भी वह अपने कार्ड को जब चाहे बंद कर सकता है और जब चाहे चालू कर सकता है।
जेनरेट कर सकते नया पिन
खाताधारक पिन भूल गया है या उसे लगता है कि किसी को उसके पिन की जानकारी हो गई है तो वह अपने मोबाइल से ही नया पिन जेनरेट कर सकता है। उसे एटीएम तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये जानकारियां भी एप से खाताधारक बैलेंस इंक्वायरी, मिनी स्टेटमेंट, चेक रिक्वेस्ट, छह माह के स्टेटमेंट की जानकारी एप से ले सकता है। एप से शिक्षा लोन व होम लोन के प्रमाणपत्र भी जारी हो सकते हैं।

खास खबर:यह शख्स रोज करता परिंदों की मेहमान नवाजी

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Posted on : 16-01-2019 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, धार्मिक, सामाजिक

फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)ऋषि-मुनि, संत-महात्मा सही कह गए हैं कि पशु-पक्षियों को दाना-पानी खिलाने से मनुष्य के ज‍ीवन में आने वाली कई परेशानियों से छुटकारा बड़ी ही आसानी से मिल जाता है। एक ओर ईश्वर की भक्ति के कृपा पात्र बनते हैं वहीं हमें अच्छे स्वास्थ्य के साथ ही पुण्य-लाभ भी प्राप्त होता है। धर्म व अध्यात्म से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर आपके मन में भी दिनभर बेचैनी-सी रहती है। आपके काम ठीक समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं। पारिवारिक क्लेश नियमित रूप से चलता रहता है। स्वास्थ्य ठीक नहीं है आदि…. तो ‍निश्चित ही आपको पक्षियों को दाना खिलाने से आनंद की प्राप्ति होगी और आपके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। चींटी, चिड़ियों, गिलहरियां, कबूतर, तोता, कौआ और अन्य पक्षियों के झुंड और गाय, कुत्तों को नियमित दाना-पानी देने से आपको मानसिक शांति प्राप्त होगी। अत: पशु-पक्षियों को दाना-पानी देने से ग्रहों के अनिष्ट फल से छुटकारा मिलता है। यही कुच ध्यान में रखकर गंगा की पूजा के साथ ही साथ परिंदों की महेमान नबाजी में दशकों से लगे है राजेश औदिच्य| जो पक्षियों के संरक्षण के लिए भी एक प्रेरणा दे रहें है|
आधुनिकता के इस भागमभाग में दूसरों की सेवा के लिए वक्त निकल आये तो भला इससे बड़ा पुण्य और क्या हो सकता है। समाज में अभी भी बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें खुद से ज्यादा दूसरों की चिंता रहती है। ऐसे ही शख्स हैं पांचाल घाट के राजेश औदिच्य जो चिड़ियों की रोज मेहमाननवाजी करते है। लोगों से दूर भागने वाले पक्षी इनकी एक आवाज में झुंड मारकर एकत्र हो जाते हैं।’परहित सरिस धर्म नहीं भाई’ गोस्वामी तुलसीदास की इस पंक्ति का मर्म पांचाल घाट पर रहने वाले राजेश पूरी तरह से समझ चुके हैं। गंगा के किनारे कर्मकांड करके गुजर-बसर करने वाले राजेश करीब एक दशक से चिड़ियों को दाना,दालमोट व जलेबी चुगा रहे हैं। सुबह दुकान खोलने के बाद इनका पहला काम पक्षियों की आवभगत करना है। दुकान खुलते ही इनके पास गलहरी, कौवे व अन्य चिड़ियां झुंड मारकर पहुंच जाती हैं फिर देर तक अनाज के दानों व जलेबी के स्वाद व दालमोठ का लुत्फ उठाते हैं।
राजेश ने जेएनआई को बताया कि पक्षियों को भोजन कराने की प्रेरणा यूं तो उनके संरक्षण को लेकर मिली| राजेश का कहना है की सुबह सबसे पहले पक्षियों को दाना व अनाज के दाने खिलाते हैं| इनकों भोजन कराने के बाद ही खुद भोजन ग्रहण करते हैं। इससे मन को शांति प्रदान हो रही है। लिहाजा अब यह कार्य उनकी दिनचर्या में शुमार हो गया है।
सहयोग: प्रमोद द्विवेदी नगर प्रतिनिधि

मिक्सी ने मिस कर दिया सिल-बट्टा के मसालों का स्वाद

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Posted on : 15-01-2019 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, सामाजिक

फर्रुखाबाद:(दीपक-शुक्ला)पुराने समय में खाना पकाने के लिए मसाले पीसने के लिए ओखली-मूसल और सिल बट्टा का इस्तेमाल किया करते थे। बेशक इन चीजों में मसाला पीसने में मेहनत और समय दोनों खर्च होते थे लेकिन खाने का जो स्वाद आता था, यब बात आपके परिजन अच्छी तरह जानते होंगे। आजकल लोगों के पास समय नहीं है इसलिए अब इस काम के लिए ग्राइंडर, ब्लेंडर और मिक्सर आदि का इस्तेमाल होता है। जिससे सिल-बट्टा का कारोबार करने वाले कारीगरों की रोजी-रोटी पर खासा असर डाला है| एक जमाने में मेला रामनगरिया से लोग सिल-बट्टा लेंने के लिए साल भर इंतजार करते थे| लेकिन आज इस कारोबार को तो जंग लगी ही है साथ ही आम आदमी की रसोई से सिल-बट्टा से पीसे गये मसालों का स्वाद गायब सा हो गया है|
मेला रामनगरिया लगभग लग गया है| हजारों की संख्या में कल्पवासी भी जुट गये है| मेला का शुभारम्भ भी जल्द होने वाला है|मेला देखें के लिए दूर-दराज से लोग आने भी शुरू होंगे| मेले में दुकान लगाने वाले कारोबारी अपनी दुकानें भी सजाने लगे है| उन्ही में से आधा दर्जन दुकाने सिल-बट्टा बनाने वाली है| जो पत्थर को काटकर उसे सिल-बट्टे का रूप दे रहे है| यह कारोबारी बीते कई दशकों से सिल-बट्टा की दुकानें लगाकर कारोबार करते आये है| लेकिन आज उनके सामने निराशा है| घरों के रसोईघर से सिल-बट्टा की जगह मिक्सी ने ले ली है| कुछ मिनटों में ही सब्जी के लिए मसाला एक बटन दबाकर पीसा जा सकता है|
रामनगरिया में सिल-बट्टे की दुकान लगाये कारीगर अमित कुमार ने बताया की उसके परिवार में पुश्तैनी यह कारोबार होता चला आ रहा है| इस समय सिल सफेद या लाल पत्थर की 150 से 200 रूपये में इसके साथ ही साथ बड़ी सिल चार सौ से 500 रुपये में उपलब्ध है| अमित ने जेएनआई को बताया कि लेकिन पिछले वर्षों में कारोबार में भारी गिरावट आयी है| ग्राहकों की संख्या और सिल के प्रति रूचि भी घटी है| घर की महिलायें सिल से मसाला पीसनें में कोई रूचि नही रखती| जिस कारण बिक्री भी कम है| ग्रामीण क्षेत्रों में तो अभी सिल प्रयोग हो रहा है| लेकिन शहरी क्षेत्र में अधिकतर सिल की जगह इलेक्ट्रानिक मिक्सी ने ले ली है| रामनगरिया में सिल-बट्टा बना रहे कारोबारी कुलदीप ने जेएनआई को बताया की आगरा और इलाहाबाद से वह सिल खरीदते है| लेकिन सरकार इस बिलुप्त होते कारोबार पर भी 15 प्रतिशत जीएचटी चार्ज करती है| जिससे कारीगर काफी आहत है|
पहले लोग मसालों को पिसने के लिए किसी ग्राइंडर, ब्लैडर और मिक्सी को उपयोग में नहीं लाते थे। बल्कि वो मसाले को पीसने के लिए ओखली मसूल या सिल बट्टा का प्रयोग करते थे। बेशक उस समय मसाला पीसने में मेहनत और समय दोनों ही बहुत अधिक लगता था।
लेकिन उस समय उनके खाने में जो स्वाद आता था वो आज के खाने के कहीं दूर दूर तक नजर नहीं आता। इसका कारण यह कि आज कम सिल बट्टा का उपयोग नहीं बल्कि मिक्सर को मसाले पिसने के लिए उपयोग में लाते हैं इससे मसाले झटपट से पीस तो जाते हैं लेकिन मसालों का स्वाद खत्म हो जाता है।
सिल बट्टा पर मसाले पीसने के फायदे
1. टेस्ट को बढायें
जब आप सिल बट्टा या ओखली मसूल में मसाले को पीसते तो इसकी खुशबु भी मसालें में मिल जाती है जिसके कारण मसाले का टेस्ट ओर अधिक बढ़ जाता है। इसका कारण यह हैं कि ये जड़ी बूटियों और मसाले में तेल जारी करती है। जिससे इनका स्वाद और ज्यादा बढ़ जाता है।
2.साबुत मसाले पीसें जाते हैं
जब आप ब्लैडर को प्रयोग में लाते हो तो आपको चीजों को काटकर पीसना पड़ता है। जबकि सिल बट्टा पर सब चीजों को साबुत ही पीसा जाता है। जिससे चीजों के तेल और फाइबर भी पिसें जाते हैं। यहीं कारण हैं कि सिल बट्टा पर तैयार चटनी ग्राइंडर की चटनी से अधिक स्वादिष्ट होती है।
3.गर्मी को पैदा नहीं होने देता
जब आप इलेक्ट्रिक ब्लैडर को मसाले पीसने के लिए प्रयोग में लाते हो तब उसमें गर्मी पैदा हो जाती है। जिससे उसका स्वाद बदल जाता है। जब आप ब्लेंडर में अदरक को पीसते हो तो गर्मी के कारण लहसुन का स्वाद कडवा हो जाता है। जबकि सिल बट्टा पर गर्मी पैदा नहीं होती।
4.एक्सरसाइज
यह जाहिर सी बात है कि जब आप सिल बट्टा या ओखली पर अधिक देर तक अपने हाथों को चलाते हो तो इससे आपकी अच्छी-खासी एक्सरसाइज भी हो जाती है। आपकी दादी के हाथ, कंधे और बाहें मजबूत होने का एक मुख्य कारण यह भी हैं। जब सिल बट्टे पर काम करते समय आपकी एक्सरसाइज होती हैं। तब आपका पेट बाहर की तरफ नहीं निकलता।
5.हाथों का इस्तेमाल
ब्लैडर में आप चीजों को डालकर दो मिनट में पीस लेते हो जबकि सिल बट्टा या ओखली मसूल में आपको काफी देर तक अपने हाथों को चलाना पड़ता है। इसके आपको यह पता रहता हैं कि खाने में आपको कैसा मसाला चाहिए। आप उसे अपने जरूरत के अनुसार बना सकते हो।
6.बिजली की बचत
जब आप सिल बट्टे पर मसाले पिसते है तब आपको ब्लैडर की आवश्यकता नहीं होती। जिससे आपकी बिजली की भी बचत हो जाती है।

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