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पुलिस चौकी के सामने रोडबेज के परिचालक व सबारी में मारपीटपुलिस चौकी के सामने रोडबेज के परिचालक व सबारी में मारपीट फर्रुखाबाद:टिकट ना देने के विवाद रोडबेज के परिचालक व सबारी में विवाद हो गया| जिसके चलते आक्रोशित सबारी ने अपने समर्थको को बुला लिया| उन्होंने पुलिस चौकी के सामने बस को रोंककर परिचालक से मारपीट कर दी| घटना की सूचना पर पुलिस ने परिचालक व सबारी को कोतवाली में भेज दिया| कोतवाली...

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36 घंटे की कठिन साधना के बाद उदीयमान सूर्य को दिया अ‌र्घ्य36 घंटे की कठिन साधना के बाद उदीयमान सूर्य को दिया अ‌र्घ्य फर्रुखाबाद:छठ का व्रत धारण करने वाली महिलाओं में बुधवार की सुबह उदीयमान सूर्य के लिए जबर्दस्त जुनून दिखा। पहली किरण धरती पर पड़ते ही व्रती महिलाओं ने भगवान भास्कर को अ‌र्घ्य दिया और विधिपूर्वक छठ पूजा को संपन्न किया। व्रती महिलाओं ने लगभग 36 घंटे बाद व्रत का पारण किया।...

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डीसी ने दिव्यांग मासूम के मुंह के कपड़ा ठूंसकर पीटाडीसी ने दिव्यांग मासूम के मुंह के कपड़ा ठूंसकर पीटा फर्रुखाबाद:चर्चित जिला समन्वयक ने अपने साथी शिक्षको के साथ दिव्यांग मासूम के साथ हैबनियत की सारी हदें पार कर दी| डीसी ने उसमे मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसके साथ बेहरहमी से मारपीट कर दी| कई दिनों के बाद परिजनों को जानकारी होने पर उन्होंने जिलाधिकारी से शिकायत कर डीसी सहित तीन...

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अस्ताचल सूर्य को व्रती महिलाओं ने दिया अर्घ्यअस्ताचल सूर्य को व्रती महिलाओं ने दिया अर्घ्य फर्रुखाबाद: महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान रविवार को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ। सोमवार को खरना पूजा भी संपन्‍न हो गई। सोमवार शाम रोटी और गुड की बनी खीर का प्रसाद ग्रहण किया गया। मंगलवार शाम को अस्ताचल सूर्य को अर्घ्‍य दिया गया| बुधवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के...

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जनवरी से शुरू होगा माघ मेला के लिये समतलीयकरणजनवरी से शुरू होगा माघ मेला के लिये समतलीयकरण फर्रुखाबादल:कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मोनिका रानी ने माघ मेला श्रीरामनगरिया व विकास प्रदर्शनी के आयोजन से सम्बन्धित समीक्षा बैठक की| उन्होंने कहा की इस बार मेला परिसर में जो भी गंदगी फैलाता मिल गया तो उस पर जुर्माना किया जायेगा| डीएम ने कहा पिछली वर्ष से भी बेहतर...

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फतेहगढ़ व राजेपुर सहित 11 थानाध्यक्षों की तैनाती में फेरबदलफतेहगढ़ व राजेपुर सहित 11 थानाध्यक्षों की तैनाती में फेरबदल फर्रुखाबाद:पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्रा ने लगातार बीते कई दिन से बढ़ रही अपराधिक घटनाओं से खफा होकर काफी बड़ा फेरबदल थानाध्यक्षों की तैनाती में किया है| जिसमे उन्होंने फतेहगढ़ कोतवाल व राजेपुर सहित 11 ककी तैनाती में फेर बदल किया है| बीती देर रात एसपी ने आदेश पर राजेपुर थानाध्यक्ष...

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साफ दिखने लगा है बीते चार वर्ष का विकास कार्य:पीएम मोदीसाफ दिखने लगा है बीते चार वर्ष का विकास कार्य:पीएम मोदी वाराणसी:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देश का पहला अंतरदेशीय जल मार्ग राष्ट्र को समर्पित किया। इस अंतर्देशीय जलमार्ग टर्मिनल से बंगाल के हल्दिया से वाराणसी तक जलमार्ग संचालित किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने एयरपोर्ट से वाजिदपुर का रुख...

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सचिन के नेतृत्व में बीजेपी के आधा सैकड़ा पदाधिकारी व प्रधान सपा में शामिलसचिन के नेतृत्व में बीजेपी के आधा सैकड़ा पदाधिकारी व प्रधान... फर्रुखाबाद:लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही राजनिति में जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गयी है| जिसके चलते समाजवादी पार्टी कुल 44 बूथ अध्यक्ष व ग्राम प्रधानों को सपा में शामिल करा दिया गया| जिससे बीजेपी में हडकंप है| पूर्व लोक सभा प्रत्याशी रहे सचिन यादव पूर्व मंत्री बाबू राजेन्द्र...

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युवक से चेन और नकदी लूट गोली मारीयुवक से चेन और नकदी लूट गोली मारी फर्रुखाबाद:स्कूटी से अपने गाँव जा रहे युवक से जेवर व नकदी लूट गोली मार दी गयी| जिसके बाद उसने गम्भीर हालत में लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया | जंहा हालत गम्भीर होने पर उसे रिफर कर दिया गया| शहर कोतवाली क्षेत्र मोहल्ला कूंचा भवानी दास निवासी रामकुमार पाण्डेय ने पुलिस...

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आप भी पहनते हैं कछुए वाली अंगूठी, तो आपके लिए हैं ये 5 टिप्स –

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Posted on : 05-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, धार्मिक, सामाजिक

डेस्क: समृद्धि‍कारक माना जाता है। वर्तमान में कछुए वाली अंगूठी पहनने का प्रचलन भी बढ़ गया है, जिसे ज्योतिष वास्तु के मिश्रण के रूप में देखा जा सकता है। जानते हैं कछुए वाली अंगूठी को लेकर क्या हैं धारणाएं और किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी
1 ऐसा माना जाता है कि कछुआ लक्ष्मी का प्रतीक है और यह समुद्र मंथन में प्राप्त हुआ था। इसे साथ रखने या पहनने से धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
2 कछुए की अंगूठी पहनते समय इसकी दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जब भी इस अंगूठी को पहनें, तो कछुए के सिर वाला हिस्सा आपकी ओर हो और पीछे का हिस्सा बाहर की ओर।
3 चूंकि इसे लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है, अत: इस अंगूठी को धारण करने के लिए शुक्रवार का दिन शुभ होता है, जो स्वयं लक्ष्मी का दिन माना जाता है।
4 शुक्र का संबंध चांदी से है, अत: इसे चांदी की धातु में बनवाना चाहिए और फिर विधि पूर्वक धारण करना चाहिए।
5 इसे आप किस अंगुली में पहन रहे हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। ध्यान रखें कि इस अंगूठी को तर्जनी अंगुली में धारण करें।

राशिफल: देखें कैसा रहेगा आज आपका दिन

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Posted on : 05-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, धार्मिक, सामाजिक

डेस्क:आज के दिन का राशिफल, कैसा होगा आपका दिन, किसे मिलेगा प्यार, किसका चलेगा व्यापार, करियर में किसे मिलेगी उड़ान, किसे मिलेगा धन अपार… हर वर्ग के लिए जानिए दैनिक राशिफल
मेष- नकारात्मकता बढ़ेगी। शोक समाचार प्राप्त हो सकता है। बोलचाल में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। मान घट सकता है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। दूसरों से अपेक्षा पूरी न होगी। कुसंगति से बचें। उत्साह में कमी रहेगी। धैर्य रखें। व्यवसाय ठीक चलेगा। उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं।
वृष- मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी। निवेश शुभ रहेगा। यात्रा मनोनुकूल रहेगी। अधिकारीगण प्रसन्न रहेंगे। नौकरी में प्रमोशन हो सकता है। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।
मिथुन- मेहमानों का आवागमन रहेगा। व्यय होगा। उत्सावर्धक सूचना मिलेगी। विवाद को बढ़ावा न दें। आत्मसम्मान बना रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। परिवार में मतभेद बढ़ सकते हैं। जोखिम न उठाएं। व्यवसाय ठीक चलेगा। लोगों से अपेक्षित सहयोग प्राप्त होगा।
कर्क- रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। कोई बड़ी समस्या दूर हो सकती है। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। यात्रा मनोनुकूल रहेगी। नौकरी में काम का बोझ बढ़ सकता है। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। जोखिम लेने से बचें।
सिंह- स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। व्ययवृद्धि से तनाव रहेगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। कानूनी बाधा आ सकती है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। लेन-देन में सावधानी रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यवसाय ठीक चलेगा। लाभ कम रहेगा।
कन्या- यात्रा मनोनुकूल रहेगी। रुका हुआ पैसा मिल सकता है, प्रयास करें। उच्चाधिकारी सहयोग करेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। धन प्राप्ति सुगम होगी। परिवार की चिंता रहेगी। अपेक्षित कार्य समय पर पूरे होंगे। विवाद को बढ़ावा न दें।
तुला- योजना फलीभूत होगी जिसका लाभ तत्काल नहीं मिलेगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। कार्यसिद्धि होगी। प्रसन्नता रहेगी। आलस्य का अनुभव होगा। मित्र व संबंधी सहयोग करेंगे। धन प्राप्ति सहज ही होगी। आय के स्रोतों में वृद्धि हो सकती है। जल्दबाजी न करें।
वृश्चिक- कोर्ट व कचहरी के मामले सुलझ सकते हैं। तंत्र-मंत्र में रुचि जागृत होगी। क्रोध न करें। आय में वृद्धि होगी। उच्चाधिकारी संतुष्ट नहीं होंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यवसाय ठीक चलेगा। किसी बड़ी समस्या का समाधान होगा। प्रसन्नता रहेगी।
धनु- परेशानी बढ़ने का समय है। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। दूसरों के भरोसे कार्य न करें। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। कुसंगति से बचें। वरिष्ठजनों की सलाह मानें, लाभ होगा। घर-बाहर तनाव रह सकता है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें।
मकर- सगे-संबंधी सहयोग करेंगे। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। राजकीय बाधा दूर होगी। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। काम का बोझ बढ़ सकता है। आय में वृद्धि होगी। थकान रहेगी।
कुंभ- उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। संपत्ति के बड़े सौदे हो सकते हैं। बड़ा लाभ होगा। रोजगार में वृद्धि होगी। निवेश लाभदायक रहेगा। व्यावसायिक यात्रा में सावधानी रखें। घर-बाहर तनाव रह सकता है। नए लोगों से संबंध बन सकते हैं।
मीन- यात्रा मनोरंजक रहेगी। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। धनलाभ होगा। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता मिलेगी। सामाजिक कार्य होंगे। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। वृ‍द्धजन मार्गदर्शन देंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। जोखिम न लें। विवाद से बचें।

जयंती विशेष:जंगे आजादी के दौरान तीन बार जिले में पड़ें बापू के कदम

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Posted on : 02-10-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, POLICE, सामाजिक

फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)स्वतंत्रता आन्दोलन की बात करे तो जिले का भी नाम सुर्ख़ियों में रहा है| जनपद में भी बड़े-बड़े आजादी के मतवाले जंगे आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया और फिर भारत माँ की मिट्टी में अपना अस्तित्ब खो दिया| उसी आन्दोलन के शोले को ज्वाला बनाने का काम गाँधी जी ने फर्रुखाबाद से कई बार किया| आजादी के आन्दोलन के दौरान उनके कदम तीन बार जिले की सरजमी पर पड़े और उन्होंने आजादी के आन्दोलन को धार दी|
इतिहास कारों की माने तो जिले में महात्मा गाँधी ने आकर सरस्वती भवन में सभा को संबोधित किया था और दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में बैठकर खिलाफत आंदोलन को दिशा दी थी। तब उनके साथ आचार्य कृपलानी, कस्तूरबा गांधी और मौलाना शौकत अली जैसी हस्तियां भी आईं थी। इतिहासकारों का कहना है कि वर्ष 1919 में असहयोग व खिलाफत आंदोलन शुरू किया| जिसमे उन्होंने हिंदू व मुसलमानों को एक साथ जोड़ने की कबायत शुरू की| इसी को देखते हुये उन्होंने पहले नगर के सरस्वती भवन में सभा की उसके बाद दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में बैठक कर तत्कालीन सज्जादा नशीन हजरत फरखुद अली उर्फ फुंदनमियां को आन्दोलन की कमान सौपी थी| वहीं उनके साथ जाने-माने क्रांतिकारी नेता मौलाना मोहम्मद अली भी फर्रुखाबाद आए थे।
इसके बाद वर्ष 22 सितंबर 1929 को भी गांधी जी अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी के साथ यहां आए थे। उस दौरे में उनके साथ आचार्य कृपलानी भी आए थे। तब महान क्रांतिकारी नेता कालीचरण टंडन, श्रीकृष्ण मल्होत्रा, ब्रजकिशोर ने गांधी जी से प्रेरणा लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। उन्होंने सरस्वती भवन में सभा को सम्बोधित किया| तीसरी बार वह पाँच वर्ष बाद ही वर्ष1934 जनपद आ गये| उन्होंने तब छुआछूत निवारण व हरिजन सेवक अख़बार का प्रसार किया| इस दौरान उनके साथ आचार्य कृपलानी भी आए थे। तब महान क्रांतिकारी नेता कालीचरण टंडन, श्रीकृष्ण मल्होत्रा, ब्रजकिशोर ने गांधी जी से प्रेरणा लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। इतिहासकार डॉ० रामकृष्ण राजपूत के अनुसार वह अखबार उनके संग्रहालय में आज भी उपलब्ध है|

बदले-बदले सरकार नज़र आते हैं,घर की बर्बादी के आसार नज़र आते हैं!

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Posted on : 30-09-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, जिला प्रशासन, सामाजिक

फर्रुखाबाद:एक पुरानी कहावत है- ‘देख पराई चूपड़ी मत ललचावे जी (जीव)’, मगर यहाँ बात रूखी-सूखी रोटी की नहीं वरन पत्नी की हो रही है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फ़ैसले से पति परमेश्वर की ग़ुलामी से निजात दिला दी है! जाने कब से अपनी अकल और दूसरे की ब्याहता सर्वश्रेष्ठ समझने वालों की कमी नहीं रही है। इसीलिए शादी के बाद परपुरुष के साथ रमण को पाप ही नहीं, अपराध भी समझा जाता रहा है।
बाइबिल में जो दस महा आदेश (कमांडमेंट) दर्ज हैं, उनमें एक अडल्ट्री को गर्हित वर्जित आचरण में शुमार करता है। हिंदू परंपरा में पतिव्रत धर्म की बड़ी महिमा है पर ईसाई और मुसलमान, यहूदी आदि भी इस ‘दुराचरण’ को दंडनीय अपराध मानते रहे हैं। ‘सेवेंथ सिन’ से लेकर ‘सिलसिला’ तक जैसी फ़िल्मों की कहानी बेवफ़ाई की दास्तान का ही बखान करती हैं। कमांडर नानावती का पुरदर्द अनुभव भी अपनी पत्नी के ‘विश्वासघात’ से ही उसके प्रेमी की हत्या तक पहुँचाने वाला सिद्ध हुआ।
कुछ लोगों को लगता है कि भारत के पूर्व वायसराय माउंटबेटन की पत्नी की नेहरू के साथ घनिष्ठता इस हसीन गुनाह की सीमारेखा के बहुत पास फिसलती रही थी। विडंबना यह है कि आला अदालत के इस फ़ैसले तक इस जुर्म की शिकायत सिर्फ़ आहत पति या पत्नी ही कर सकते थे। बाक़ी हाल वही था- ‘जब मियाँ-बीवी राज़ी तो क्या करेगा क़ाज़ी?’
वैसे हक़ीक़त यह थी कि बेचारी पत्नी या पति कुछ भी करने में असमर्थ रहते थे अगर उनके जीवनसाथी को किसी ताक़तवर प्रेमी ने रिझा लिया हो। ‘मेरी बीबी को उसके प्रेमी से बचाओ!’ की गुहार लगाने के अलावा वह कर भी क्या सकते थे?
अच्छे दिन आएंगे?
जब मीरा ने गाना शुरू किया ‘कुल की कानि…’, ‘मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई’ तब राणा बिस का प्याला भेज कर भी लाचार ही रहे। और जब कृष्ण कन्हैया की मुरली की धुन सुन मगन भई गोपियाँ आधी रात घर से स्वजनों को छोड़ निकल पड़ती तब यह तय करना असंभव हो जाता था कि उनका आकर्षण शारीरिक था या आध्यात्मिक।
भारत के मिथकों पुराणों में ऐसे आख्यानों का अभाव नहीं जिनमें दंड निर्दोष छली गई पत्नी को ही दिया जाता है। इंद्र जब पति का रूप धर अहिल्या को भ्रमित कर सहचरी बनाता है, ऐसा ही प्रसंग है। ज़ाहिर है कि अब तक अंधे कानून का पलड़ा पुरुष की तरफ़ ही झुका था और स्त्रियों के समानता के अधिकार का हनन होता था। पर क्या सुप्रीम कोर्ट की इस दहाड़ से पलक झपकते उनके अच्छे दिन आ जाएँगे?
फ़ैसले में साफ़ कहा गया है कि पत्नी के शरीर पर पति का मालिकाना हक नहीं। सरकार की यह दलील ख़ारिज कर दी गई कि इस ‘दुराचरण’ को दंडनीय जुर्म नहीं रखा गया तो ‘विवाह की पवित्र संस्था’ ख़तरे में पड़ जाएगी। विवाह सभी धर्मों में इसे पवित्र बंधन नहीं, एक क़रार अनुबंध समझा जाता है।
यह तर्क धर्मनिरपेक्ष समाज में अकाट्य नहीं समझा जा सकता। इसके साथ-साथ यह जोड़ने की ज़रूरत है कि एक तरक्की पसंद अदालती फ़ैसले से पितृसत्तात्मक संस्कारों की दक़ियानूस बेड़ियाँ ख़ुद ब ख़ुद नहीं टूटने वाली। जिस तरह वयस्कों के बीच सहमति से समलैंगिक संबंधों को अब भारत में जुर्म नहीं माना जाता, उसी तरह विवाहेतर शारीरिक संबंध अब निजता के बुनियादी अधिकार के सुरक्षा कवच का संरक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
क्या अतिआशावादी उतावली नादानी है?
सोचने की बात यह है कि कितने बुनियादी या मानव अधिकार उन सभी नागरिकों की पहुंच में हैं, जो इनके उल्लंघन के शिकार होते हैं? जहाँ कन्या शिशु की भ्रूण हत्या, बलात्कारों से लेकर अंतर्जातीय-अंतर सांप्रदायिक प्रेम विवाह ‘ऑनर किलिंग’ तक जैसे जघन्य अपराधों को समाज सहज भाव से स्वीकार कर लेता है और इनके अभियुक्तों को सज़ा दिलाने में सरकार की नाकामी हमें यही सोचने को मजबूर कर रही है कि अतिआशावादी होने की उतावली नादानी है।
यह तरक़्क़ी पसंद फ़ैसला शादी की बुनियाद को निश्चय ही कमज़ोर करने वाला है। यह कहना ठीक है कि जब मन ही नहीं मिल रहे तब ज़बरन बदन मिलाते रहने का क्या तुक है? परंतु अगर इसी तर्क को शीर्षासन करा दें तो यह भी सुझा सकते हैं कि बदन तो गौण हैं, मन मिला रहे तो जन्म-जन्म का साथ निभाते रहना चाहिए।तन, बदन और मन को इतनी आसानी से अलग किया जा सकता है क्या? अंग्रेज़ी मुहावरा में जिसे सातसाली खुजली कहा जाता है वह वैवाहिक जीवन की ऊब को दूर करने की लंपट छटपटाहट ही तो है।
‘दगा-दगा, वई-वई’ की मीठी खुजली जो फिसलन भरी पगडंडी तक पहुँचा देती है। इस प्रलोभन से बचने में ही भलाई नज़र आती हैं। जितना खुजाएँगे दाद उतना बढ़ेगा। तसल्ली कहाँ होती है? शादी के साथ सेक्स अभिन्न रूप से जुड़ा है और यह कहना मुश्किल है कि इस मिठाई या चाट को मिल बाँट कर खाया पचाया जा सकता है।
तलाक़ के लिए अभी भी परपत्नी या परपुरुष गमन को आधार बनाया जा सकता है। जब ऐसे मुक़दमे अदालत के सामने आएँगे तब निजता का हनन नहीं होगा क्या?अदालत का यह कहना ठीक है कि अविवाहित या विधवा और विधुर के साथ विवाहेतर शारीरिक संबंध अगर अपराध नहीं तो फिर बदफैली (कुकर्मी) के ही साथ नाइंसाफ़ी क्यों। मगर क्या यह विवाह के साथ जुड़े संतान और उत्तराधिकार के क़ानून, आज़ाद मिज़ाज के खुले रिश्तों को क़बूल करने के बाद अक्षत रहेंगे?… बदले बदले हमें सरकार नज़र आते हैं, घर की बर्बादी के आसार नज़र आते हैं!

किचिन का कचरा ना फेंके, ऐसे करें प्रयोग

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Posted on : 20-09-2018 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, कृषि, सामाजिक

करनाल:यदि आप रसोई का कचरा यूं ही फेंक देते हैं तो आगे से एेसा न करें। यह बड़े काम की चीज है और इसका इस्‍तेमाल खाद के रूप में किया जा सकता है। फल-सब्जी के छिलके, बचे हुए भोजन आदि के रूप में रसोई से निकलने वाला जैविक कचरा बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने में बेहद कारगर साबित हुआ है।
शोध में खुलासा हुआ है कि रसोई के कचरे का इस रूप में सदुपयोग किया जाए तो बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट के साथ ही देश में बंजर पड़ी 37.70 लाख हेक्टेयर क्षारीय भूमि को उपाजाऊ बनाया जा सकता है। हरियााण के करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान (सीएसएसआरआइ) में हुए शोध में जैविक कचरे के इस विशेष गुण की पुष्टि हुई है।
संस्थान की वैज्ञानिक पारुल सूंधा बताती हैं कि किचन से निकलने वाला कचरा जब गलता है तो वह एसिडिक यानी अम्लीय हो जाता है। क्षारीय भूमि में जब इसको मिलाया जाता है तो क्षारीय भूमि बेसिक हो जाती है। उन्‍होंने बताया कि शोध में साबित हुआ कि क्षारीय भूमि के सुधार में जैविक कचरे (आर्गेनिक वेस्ट) की बड़ी भूमिका हो सकती है। शोध में यह भी स्पष्ट हुआ कि जैविक कचरे के अलावा जिप्सम का इस्तेमाल फायदेमंद होगा, लेकिन जिप्सम की मात्रा 25 से 30 प्रतिशत कम हो।
इस समय देश में अधिकतर क्षारीय भूमि उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और कर्नाटक में है। क्षारीय सुधार से भूमि, जल, वातावरण और अनेक अनूकुल परिस्थिति का सीधा प्रभाव ग्रामवासियों के रहन-सहन, स्वास्थ्य एवं उपयोग की स्थिति पर पड़ा है।
सीएसएसआरआइ में चल रहे इस शोध के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शोध पूरा होने के बाद यह शहर व ग्रामीण दोनों क्षेत्र के लिए संजीवनी का काम करेगा। शहरों से रोजाना निकलने वाले करोड़ों टन गलनशील कचरे का निस्तारण भी होगा और वह प्रोसेसिंग होकर जब क्षारीय जमीन में पहुंचेगा तो बंजर भूमि में भी जान आएगी। जहां पर अन्न का एक दाना भी नहीं होता वहां पर फसलें लहलाएंगी।
डॉ. पारुल ने बताया कि इस भूमि में सोडियम काबरेनेट, बाइकाबरेनेट तथा सिलीकेट लवणों की अधिकता होती है। विनिमय योग्य सोडियम 15 प्रतिशत से अधिक और पीएच मान 8.2 से अधिक हो तो वह क्षारीय भूमि होती है। इस तरह की भूमि में घुलनशील लवण ऊपरी सतह पर सफेद पाउडर के रूप में एकत्रित हो जाते हैं। जिस कारण भूमि खेती के योग्य नहीं रहती।
बंजर भूमि उपजाऊ हुई तो हर साल होगी 15 लाख टन अनाज की उपज
सीएसएसआरआइ के विशेषज्ञों के मुताबिक, हरियाणा में जितनी बंजर जमीन पड़ी है, यदि वह उपजाऊ हो तो 15 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन अधिक हर साल हो सकता है। इसकी कीमत औसत एक हजार करोड़ रुपये बनती है। इस समय प्रदेश में कुल 44 लाख हैक्टेयर भूमि में है, जिसमें से 39 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि है। बाकी लवणीय व क्षारीय भूमि है।
” वर्ष 2016 में म्यूनिसिपल वेस्ट पर रिसर्च शुरू की गई। रसोई से निकलने वाला कचरा, सब्जियों व फलों के छिलके व अन्य पदार्थ जो डीकंपोज हो सकें, वह क्षारीय भूमि के सुधार में बेहद फायदेमंद साबित हुए। जिस क्षारीय भूमि का पीएच मान 9.5 से ऊपर है उस पर शोध किया गया। यह ऐसी जमीन होती है जहां पर फसलें नहीं होती, शोध सफल रहा है।
– डॉ. पारुल सूंधा, वैज्ञानिक, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा।

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