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योगी मंत्रिमंडल की पूरी अधिकृत सूची- किसको मिला कौन सा विभागयोगी मंत्रिमंडल की पूरी अधिकृत सूची- किसको मिला कौन सा विभाग लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने मुख्यमंत्री श्री आदित्य नाथ योगी के प्रस्ताव दोनों उप मुख्यमंत्रियों सहित सभी 22 मंत्री, 9 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा 13 राज्यमंत्रियों को विभाग आवंटित करने पर अपना अनुमोदन प्रदान कर दिया है। मुख्यमंत्री ने गृह, आवास...

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रिश्वत वसूली ऊपर वाले के लिए करनी पड़ती है...रिश्वत वसूली ऊपर वाले के लिए करनी पड़ती है... भाई साहब फाइल पर साहब का अप्र्रोवल लेना है खर्चा दो| दफ्तर के बाबू ने बड़ी शालीनता से ठेकेदार से रिश्वत की मांग अपने साहब के लिए कर दी| साथ ही ठेकेदार पर एहसान भी लाद दिया, आप तो घर के आदमी है मुझे कुछ नहीं चाहिए| रिश्वत कोई अपने लिए नहीं वसूलता है यहाँ सब ऊपर वाले के लिए रिश्वत...

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ब्रेकिंग-आरोपी के घर बंद कमरे में मिली डिस संचालक की लाशब्रेकिंग-आरोपी के घर बंद कमरे में मिली डिस संचालक की लाश फर्रुखाबाद: शहर कोतवाली क्षेत्र के पक्कापुल निवासी मुकेश पुत्र ओमप्रकाश के अपहरण का मुकदमा तकरीबन 10 दिन पूर्व परिजनों ने कोतवाली में दर्ज कराया था। गुरुवार की शाम आरोपी के घर के अंदर ही मुकेश की लाश मिलने से पुलिस पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। गुरुवार की शाम परिजनों...

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रेप के आरोपी गायत्री प्रजापति अरेस्ट, 17 दिन से खोज रही थी पुलिसरेप के आरोपी गायत्री प्रजापति अरेस्ट, 17 दिन से खोज रही थी पुलिस लखनऊ: .रेप के आरोपी गायत्री प्रजापति को लखनऊ पुलिस और एसटीएफ ने यहां बुधवार को अरेस्ट कर लिया है। वह करीब 17 दिन से फरार चल रहे थे। ऐसा कहा जा रहा कि लखनऊ के आलमबाग थाने में पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। मंगलवार को उनके दोनों बेटों अनुराग प्रजापति और अनि‍ल प्रजापति को पूछताछ...

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हम गायत्री मंत्र बोलते हैं, सपा वाले गायत्री प्रजापति मंत्र बोलते हैंहम गायत्री मंत्र बोलते हैं, सपा वाले गायत्री प्रजापति मंत्र... जौनपुर. काशी में शनिवार को रोड शो करने के बाद नरेंद्र मोदी ने जौनपुर में रैली की। उन्होंने कहा- "हम सबका साथ-सबका विकास का नारा देते हैं। सपा- कांग्रेस वाले कुछ का साथ-कुछ का विकास की ही बात कहते हैं। मैं आपको गारंटी देता हूं कि बीजेपी सरकार की पहली मीटिंग में किसानों का कर्जा...

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350 रुपये की खातिर पिता की हत्या कर भाई को घायल किया350 रुपये की खातिर पिता की हत्या कर भाई को घायल किया फर्रुखाबाद: कोतवाली मोहम्मदाबाद क्षेत्र के मदनापुर निवासी 76 वर्षीय शिवरतन सिंह को उसके ही पुत्र ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। जबकि गंभीर रूप से घायल भाई को सैफई रिफर कर दिया गया है। आरोपी पांच भाईयों में सबसे बड़ा है| मृतक के पुत्र उपेन्द्र ने बताया कि आरोपी रामरहीश...

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प्रसूता की हालत बिगड़ने पर परिजनों का हंगामा, अस्पताल पर लगे सवालिया निशानप्रसूता की हालत बिगड़ने पर परिजनों का हंगामा, अस्पताल पर लगे... फर्रुखाबाद: कोतवाली कायमगंज क्षेत्र के कुबेरपुर कायमगंज निवासी 27 वर्षीय प्रसूता वीना पत्नी अबधेश जाटव के मामले ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी। जहां एक गरीब प्रसूता को उपचार के लिए दर - दर भटकना पड़ा वहीं एक निजी नर्सिंगहोम में भर्ती होने के बाद प्रसूता की...

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मेजर और विजय समर्थकों की भिड़न्त की खबर पर छावनी बना लोहाई रोडमेजर और विजय समर्थकों की भिड़न्त की खबर पर छावनी बना लोहाई रोड फर्रुखाबाद: शहर के लोहाई रोड स्थित कनौडिया इण्टर कालेज बूथ के बाहर मेजर व विजय समर्थकों में भिड़न्त व नारेबाजी होते ही लोहाई रोड छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस ने दोनो नेताओं के समर्थकों को तितर बितर कर दिया। मेजर समर्थकों का आरोप है कि सदर के विधायक व सपा प्रत्याशी विजय...

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पर्ची बंटने के बावजूद नहीं घटी बस्तों की अहमियतपर्ची बंटने के बावजूद नहीं घटी बस्तों की अहमियत फर्रुखाबाद: चुनाव आयोग द्वारा भले ही घर-घर मतदाता पर्ची पहुंचाने की व्यवस्था की गयी हो लेकिन अभी भी बस्तों की अहमियत नहीं घटी। यह नजारा आज हो रहे विधानसभा चुनाव में साफ देखने को मिला। जहां पर प्रत्याशियों द्वारा अपने अपने बस्ते लगवाये गये। किसी पर भीड़ दिखायी दी तो कोई...

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यूपी चुनाव LIVE: तीसरे चरण का मतदान खत्म, करीब 65 फ़ीसदी हुआ मतदानयूपी चुनाव LIVE: तीसरे चरण का मतदान खत्म, करीब 65 फ़ीसदी हुआ मतदान उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान शुरू हो गया है. इस फेज में 12 जिलों की 69 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. यह चरण इसलिए अहम है, क्योंकि इसमें सपा के गढ़ इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, बाराबंकी और फर्रुखाबाद में मतदान हो रहे हैं. इस चरण में कुल 826 प्रत्याशी मैदान में हैं और...

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पंजाब: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ली सीएम पद की शपथ, सिद्धू भी बने मंत्री

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Posted on : 16-03-2017 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-CONG., राष्ट्रीय

चंडीगढ़: पंजाब में दस साल बाद कांग्रेस को अपने नेतृत्व में जीत दिलाने वाले अमरिंदर सिंह ने आज यहां मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण कर ली है। शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी शामिल हुए। 11 मार्च को राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के दिन अपना 75वां जन्मदिन मनाने वाले सिंह राज्य के 26वें मुख्यमंत्री के तौर पर नौ मंत्रियों के साथ शपथ ग्रहण कर ली है।

राज्य में अधिकतम 18 मंत्री बनाये जा सकते हैं। विधानसभा में कांग्रेस के 77 विधायक हैं। कांग्रेस ने यहां एक विज्ञप्ति जारी कर कहा, मनमोहन सिंह और राहुल गांधी के अलावा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला तथा उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेंगे। पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदम्बरम, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, अश्वनी कुमार, राजीव शुक्ला, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुडा, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी समारोह में मौजूद रहेंगे।

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव अहमद पटेल और अंबिका सोनी के अलावा पंजाब मामलों की प्रभारी सचिव आशा कुमारी के भी समारोह में शामिल होने की संभावना है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि अमरिंदर सिंह ने राज्य की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुये समारोह में ज्यादा खर्च नहीं करने का निर्णय लिया है जिसके चलते शपथ ग्रहण समारोह सादा होगा।

जिले की सीटों के रुझानों का डेढ़ घंटे से हो रहा इंतजार

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फर्रुखाबाद: विधानसभा चुनाव की मतगणना सुबह 8 बजे से चल रही है। जिले की जनता को रुझानों का इंतजार है। अभी तक मतगणना का रुझान की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सुबह 8 बजे से मतगणना शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हो गयी। सभी प्रत्याशी मतगणना पाण्डाल में पहुंच गये। मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी अंत में लगभग साढ़े 9 बजे मतगणना पाण्डाल में पहुंचे। मतगणना शुरू हुए तकरीबन डेढ़ घंटे का समय गुजर चुका है। लेकिन अभी तक पाण्डाल से प्रशासनिक घोषणा नहीं की गयी है। जारी……

अपनी-अपनी पार्टी का भौकाल टाइट करने में लगे नेता

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Posted on : 10-03-2017 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics- Sapaa, Politics-BJP, Politics-BSP, Politics-CONG.

फर्रुखाबाद: शनिवार को सुबह से मतगणना शुरू हो रही है। इससे पूर्व आने वाले एक्जिट पोल नें कई दलों की हवाइयां उड़ा रखी हैं। अधिकतर एक्जिटपोल बीजेपी की ही बढ़त दिखा रहे हैं। जिससे विरोधी खेमों में खलबली मच गयी है।

बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष सुभाष गौतम ने एक्जिट पोल पर सवाल खड़े किये हैं। उनका कहना है कि बीते 2007 के विधानसभा चुनाव में भी इसी तरह के एक्जिटपोल आये थे। किसी अन्य पार्टी को एक्जिट पोल बढ़त में दिखा रहे थे। जिसके बाद भी चैंकाने वाले नतीजे आ गये और बसपा की सरकार प्रदेश में बनी थी।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष मृत्युंजय शर्मा का कहना है कि एक्जिट पोल से ठीक उल्टा नतीजा आयेगा। वह एक्जिट पोल से किसी भी तरह सहमत नहीं है। प्रदेश में गठबंधन की सरकार बनेगी और जिले की चारो सीटें जीत कर जायेंगीं। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष नदीम अहमद फारुखी का कहना है कि वह एक्जिट पोल से सहमत नहीं हैं। प्रदेश में गठबंधन की सरकार बनने जा रही है। सपा की सीटें जीती जायेंगीं। उन्होंने कहा कि अखिलेश फिर से सूबे के सीएम बनेंगे। सपा जिलाध्यक्ष ने बताया कि कार्यकर्ता सपा-कांगे्रस गठबंधन की सरकार बनाने के लिए उत्साहित हैं।

बीजेपी जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह ने बताया कि बीजेपी की सरकार बनना तय है। जब भी एक्जिट पोल आये तो उसी हिसाब से पार्टियों की सरकारें बनीं। सीटें कम-ज्यादा हो सकती हैं। अखिलेश ने तो नतीजे आने से पहले ही अपनी हार स्वीकार कर ली। उन्होंने कहा कि अब सरकार बनने में चंद घंटों का समय बचा है। ईवीएम खुद सभी का मुहं बंद करेंगीं।

राहुल-अखिलेश-शाह, अगर यूपी हारे तो क्या होगा इनका भविष्य?

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के हाई प्रेशर चुनाव के सातवें चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है. नतीजे 11 मार्च को आएंगे. इस बीच सभी राजनीतिक दलों के हाई-प्रोफाइल चेहरों को बीते 6 महीने से जारी जी तोड़ मेहनत से छुट्टी मिल गई है. इसमें अखिलेश यादव, राहुल गांधी, अमित शाह, शामिल हैं. इनमें से किसी एक या दो नेता के हाथ में उत्तर प्रदेश की कमान जाने वाली है. वहीं बाकी नेताओं को हार के चलते किसी और काम में अपने आप को व्यस्त करने की जरूरत पड़ेगी, खासतौर पर 2019 के आम चुनावों को देखते हुए हारने वाले नेताओं को नए सिरे से अपनी रणनीति तैयार करनी होगी.
अखिलेश यादव
चुनाव हारते ही अखिलेश यादव सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री हो जाएंगे. नए मुख्यमंत्री को सत्ता हस्तांतरण करने और मुख्यमंत्री आवास खाली करने के बाद हार के कारणों को समझने के लिए लंबा वक्त मिल जाएगा. प्रदेश में अगला चुनावी बिगुल 2019 में आम चुनावों के लिए बजेगा. तब तक अखिलेश को समाजवादी पार्टी से चुनौती का सामना करना पड़ेगा. मौजूदा समय में पार्टी के राष्ट्रीय ढ़ांचे की कमान उनके हाथ में है लेकिन चुनावों में हार मिलने के बाद उन्हें इस कुर्सी को बचाने की लंबी कवायद करनी होगी. चाचा शिवपाल और पिता मुलायम उनके पर कतरने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. वहीं कांग्रेस के रूप में मिला पार्टनर भी संसद में अस्तित्वहीन होने के कारण किसी तरह की मदद देने में कारगर नहीं रहेगी.
राहुल गांधी
एक दशक से लंबे समय से राजनीति में सक्रिय राहुल गांधी को लगातार उत्तर प्रदेश में मुंह की खानी पड़ रही है. कभी कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ रहा प्रदेश एक-एक कर राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़े गए सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नकार चुका है. पार्टी के सूत्रों का भरोसा था कि इस बार उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ने पर कांग्रेस को अधिक सीटों को जीतने का मौका मिलेगा जिसके बाद उन्हें आसानी से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया जाएगा. लेकिन 11 मार्च को वोटों की गिनती में एक बार फिर मुंह की खाने के बाद राहुल गांधी को कवायद पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत करने की करनी होगी. वहीं बिना किसी बड़ी जीत पर सवार हुए अध्यक्ष बनने की स्थिति में राहुल को 2019 के आम चुनावों के लिए अपनी नई रणनीति खोजनी होगी. पहले बीजेपी, फिर बिहार में जेडीयू के लिए करिश्मा करने वाले प्रशांत किशोर विफल हो जाएंगे और इसका जवाब भी राहुल गांधी को तैयार करना होगा.
अमित शाह
2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की जीत का ताज पार्टी अध्यक्ष बनाकर अमित शाह के सिर पर रख दिया गया था. इस ताज के लिए 2014 में यदि बीजेपी को 80 सीट मिलना जिम्मेदार है तो 2017 के विधानसभा चुनावों में हार इस ताज पर सवाल खड़ा कर देगी. अमित शाह को जवाब देना होगा कि आखिर क्यों वह 2014 वाला करिश्मा 2017 में नहीं दोहरा पाए? इसके अलावा उन्हें पार्टी को यह भी समझाना होगा कि हार के बावजूद 2019 के आम चुनावों लिए क्यों कमान उनके ही हाथ में रहनी चाहिए.

प्रत्याशी की जीत-हार पर लाखों का ‘सियासी सट्टा’!

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फर्रुखाबाद: सियासी धमाचौकड़ी समाप्त होने के बाद सट्टेबाजी का बाजार गर्म हो गया है। जिले में कई जगह प्रत्याशी के जीत-हार पर दांव लग चुका है। सियासी सट्टे में लाखों रुपए की बाजी लगी है। हर प्रत्याशी पर मतदान की चर्चा के आधार पर पैसा लगा है। इस सट्टे में शहर के कुछ युवा नामचीन लोगो ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। बीते 19 फरवरी को ही जिले में मतदान हुआ है |

सट्टेबाजों को मौका मिलना चाहिए वे दांव लगाने में पीछे नहीं रहते। शहर और गांव के कुछ बड़े बाजारों में यह स्थिति ज्यादा ही है। अभी 19 फरवरी को ही जिले में मतदान हुआ है। सारी ईवीएम स्ट्रांग रूम में जमा है। कौन जीतेगा और कौन हारेगा यकीन के साथ यह कह पाना काफी मुश्किल है। सट्टा बाजार में यह कमाई का जरिया बन गया है। कांग्रेस प्लस सपा ,भाजपा और बसपा प्रत्याशी की जीत-हार को लेकर दांव लग चुका है। शहर के रेलवे स्टेशन रोड, नेहरु रोड सहित कई जगह तगड़ा दांव लगने की चर्चा है। सट्टेबाजों ने यहां सिर्फ दो लोगों पर दांव लगाया गया है। दांव लगाने वालो ने सदर सीट व विधानसभा अमृतपुर, विधान सभा भोजपुर, कायमगंज विधान सभा पर अपने-अपने प्रत्याशी पर दांव लगाया है। प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की जीत पर लाखों रुपये का सट्टा लगाया गया है। सर्वाधिक दांव बीजेपी पर लग रहा है| सूत्र बताते हैं कि एक-एक प्रत्याशी के ऊपर कई लोगों ने पैसा लगाया है। सट्टे पर लगा दांव का पैसा दोनों पक्षोंके विश्वसनीय व्यक्ति के पास जमा है।

11 मार्च को मतगणना के बाद जीत-हार का मामला पता चलेगा। तय हुआ है कि परिणाम आने के दो घंटे बाद जीतने वाले प्रत्याशी पर सट्टा लगाने वाली टीम को हारने वाले उम्मीदवार के पक्ष के लोगों का पैसा मिल जाएगा। बताया जा रहा है कि यह सियासी सट्टा जिले के बड़े बाजार में भी लगा है। सट्टाबाजार में किसका दांव सटीक बैठता है अब यह आने वाला समय ही तय करेगा। फिलहाल सट्टेबाज रोज मतदान के दौरान माहौल और मत प्रतिशत को लेकर प्रत्याशियों के जीतहार का आंकलन करने में जुटे हैं। इस बाबत पुलिस अधिकारीयों का कहना है की हो सकता है कोई चोरी चुपके हार जीत का सट्टा लगा रहा हो लेकिन ऐसा कोई भी मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि आया तो कार्यवाही की जायेगी|

हार- जीत का गुणा भाग कर रहे प्रत्याशी और समर्थक
विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद थकान मिटा रहे प्रत्याशी और उनके समर्थक अब हार जीत का गुणा भाग लगाने में व्यस्त हैं। कौन सी बिरादरी का किसे समर्थन मिला और कौन सी बिरादरी उनके साथ रही। इन बातों पर मंथन करने के बाद समर्थक अपने प्रत्याशी की जीत पक्की मानकर चल रहे हैं।

जिले के मतदाताओं ने 19 फरवरी को अपने मताधिकार का प्रयोग कर प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला किया। चुनाव संपन्न होने के बाद से ही प्रत्याशी एकांतवास में पहुंच गए। वे बंद कमरों में अपने करीबियों के साथ संपन्न हुए मतदान को लेकर सुबह से शाम तक चाय की चुस्कियों के बीच मंथन करने में जुटे हैं। सूत्रों की मानें तो हार जीत की चर्चा के दौरान इस बात पर खास जोर दिया जा रहा है कि कौन सी बिरादरी ने किस प्रत्याशी को अधिक प्रतिशत में मत दिया है। इससे किसे नुकसान होगा और किसे फायदा। गुणा भाग करने के बाद प्रमुख दलों के प्रत्याशी खुद को जीता हुआ मान रहे हैं।

चुनाव परिणाम जानने के लिए व्याकुल प्रत्याशियों ने अपने खास सिपहसालारों को बुला लिया था। वहां से वापस होने के बाद सिपहसालार समर्थकों के साथ बैठकर जीत हार पर चर्चा करने में जुटे हैं। खास बात यह है कि शहर व ग्रामीण अंचल के अधिकांश मतदाताओं ने चुनाव संपन्न होने के बाद भी चुप्पी साध रखी है जबकि समर्थक अपने तर्कों से बाजारों व कस्बों में अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को जीता बता रहे हैं।

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