आज रोटियों को मोहताज है स्वतंत्रता संग्राम का शेर, बेटी जवान, बेटा बेरोजगार

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फर्रुखाबाद: गोवा की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शहर के मोहल्ला खटकपुरा सिद्दीकी निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डा0 कैशर खां आज रोटियों को मोहताज हो गये हैं। कैशर खां की चार बेटियों में सबसे छोटी बेटी की अभी शादी करनी है। वहीं बेटा अरशद बेरोजगार घूम रहा है। घर में रोटियों तक के लाले पड़े हुए हैं। कैशर खां इसके लिये सरकार को कोसते हैं। परंतु इसके लिये क्या हर 15 अगस्त व 26 जनवरी को सीना फुला कर भारत माता के जयकारे लगाने वाले हम जैसे लोग भी जिम्मेदार नहीं हैं। क्या देश के स्वतंत्रता सेनानियों के लिये हम या हमारा समाज इन जैसे एक दो परिवारों की भी मदद नहीं कर सकते??? क्या आजादी के इस दीवाने ने वह लड़ाई सिर्फ अपने लिये लड़ी थी???

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कैशर खां ने बताया कि सर्वप्रथम सफाईकर्मी यूनियन की शुरूआत उन्होंने 17 अगस्त 1952 में की। जिसमें सफाईकर्मियों की मांगों को लेकर जुलूस निकाला। जुलूस निकालते समय सफाई कर्मियों पर पुलिस द्वारा भीषण लाठी चार्ज किया गया। जिसमें 18 सफाईकर्मियों को जेल भेज दिया गया। जेल जाने के बाद हम लोगों की रिहाई के लिए 500 सफाई कर्मियों ने हड़ताल की तब जाकर 18 दिन बाद हम लोगों की रिहाई की गयी। इसके बाद सफाईकर्मियों के वेतन में भी वृद्वि की गयी। इसके बाद कई बार महंगाई के खिलाफ आंदोलन किया जिनमें जेल भी जाना पड़ा।

15 अगस्त 1955 में गोवा जाकर सत्याग्रह में शामिल हुए, गोवा को भारत से जोड़ने के लिए गिरफ्तार हुए और पुलिस की लाठियों को सहना पड़ा। हम लोगों की इतनी पिटायी की गयी कि मरणासन्न अवस्था में कर दिया गया और सीमा पर फेंक दिया गया।

कैशर खां ने बताया कि आज तक प्रशासनिक सुविधायें न मिल पाने के कारण उनकी आर्थिक दशा बद से बदतर होती जा रही है। वह व उनका परिवार रोजी रोटी के लिए तबाह हो गये हैं। चार बेटियां हैं जिनमें से तीन बेटियों की शादी कर दी है अभी एक जवान बेटी शादी करने के लिए है। जिसकी शादी की भी चिंतायें खाये जा रहीं हैं। वहीं एक लड़का इरशाद है जोकि पूर्णतः बेरोजगार है। सोचा था कि स्वतंत्रता सेनानी होने के नाते प्रशासनिक नौकरी मिल जायेगी लेकिन आज तक कोई भी सरकारी नौकरी उसे भी नहीं मिल सकी। जिससे अब हम लोगों के पास खाने कमाने का कोई जरिया भी नहीं बचा है।83 वर्षीय कैशर खां ने बताया कि पहले तीन बेटियों की शादी की तो इतनी महंगाई नहीं थी। शादी सस्ते में निबट जाती थीं। लेकिन अब तो महंगाई के इस दौर में बेटी की शादी करना मुस्किल बनी हुई है।
स्वतंत्रता संग्राम के शेर कैशर खां ने बताया कि प्रशासन ने तो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया है कि उनके एक लड़के अरशद जोकि अमीन की संविदा पर नौकरी कर रहा था। लेकिन तत्कालीन जिलाधिकारी लवानिया ने दूसरे लोगों से रुपये लेकर मेरे लड़के को निकाल कर उन्हें लगा दिया। जिससे एक मात्र रोजगार भी मेरे बेटे से छीन लिया गया। आज हमारा परिवार भूखों मरने के लिए विवश है।