पुलिस पर लगा हत्या का एक और आरोप, मृतक के भाई ने लगाई एसपी से गुहार

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फर्रुखाबाद: थाना शमशाबाद क्षेत्र के ग्राम खुड़िना वैद्य निवासी मनोज कुमार ने अपने भाई मंगेश उर्फ दिवाकर की हत्या का आरोप पुलिस पर लगाया है। मनोज ने एसपी को दिये गये प्रार्थनापत्र में कहा है कि उसके भाई को अज्ञात अवस्था में दिखाकर थाना पुलिस ने उसे बिना सूचना दिये शव गंगा में प्रवाहित कर दिया। प्रार्थनापत्र में मनोज ने अपने भाई मंगेश की कायमगंज एसडीएम से कहासुनी हो जाने की भी बात कही है।

मनोज द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिये गये प्रार्थनापत्र के अनुसार उसका भाई मंगेश पुत्र रामस्वरूप गंगवार 31 मई को बिना बताये घर से गायब हो गया था। जिसके दो दिन बाद उसे पता चला कि फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पर उसके भाई मंगेश को देखा गया था। तभी शाम को साढ़े 6 बजे एसडीएम कायमगंज के फतेहगढ़ आवास पर वापस आने के समय सड़क पर खड़े होने को लेकर उससे व उसके ड्राइवर से कहासुनी हुई और उनके साथ मौजूद अंगरक्षकों के द्वारा मंगेश के साथ मारपीट की गयी व पिकेट ड्यूटी में तैनात पुलिस को कस्टडी में दे दिया गया। इसके बाद पुलिस ने हवालात में बंद कर दिया तथा मंगेश के साथ मारपीट की गयी।

जानकारी होने पर जब मंगेश का भाई मनोज थाना मऊदरवाजा गया तो वहां से पुलिस ने उसे ग्राम रशीदपुर के पास रेलवे लाइन पर अज्ञात शव पड़े होने के फोटो दिखाये तो मनोज ने उसकी पहचान अपने भाई मंगेश के रूप में की। जिसके बाद मनोज ने शव के बारे में पूछा तो थानाध्यक्ष ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम कराकर गंगा में प्रवाहित कर दिया। फोटो व पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगने पर थाना पुलिस ने टरका दिया।

युवक मनोज ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा मेरे भाई मंगेश की मौत आत्महत्या करार दिया गया है। जबकि यह पूरी कहानी पुलिस द्वारा बनायी गयी मनगढ़न्त है। शव से बरामद कपड़ों में से भाई मंगेश की पैन्ट भी गायब कर दी गयी है। भाई मंगेश को फर्रुखाबाद कोतवाली में 31 मई को लाया गया जिसे बिना लिखापढ़ी किये या कार्यवाही किये छोड़ देना संभव नहीं लगता। वहीं उसने यह भी कहा है कि एसडीएम जैसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के साथ कथित अभद्रता करने वाले के विरुद्व किसी प्रकार की कार्यवाही न करना तथा बिना किसी औपचारिकता के कोतवाली से जाने देना पुलिस की संदिग्ध एवं अविधिक कार्य प्रणाली की ओर इंगित करती है। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

मनोज ने आरोप लगाया कि थाना पुलिस न तो किसी प्रकार की कोई रिपोर्ट लिखने को तैयार है और न ही संदिग्ध मौत की जांच करने को तैयार है। उसकी व उसके परिजनों की मनोदशा अत्यधिक खराब है। वहीं थानाध्यक्ष तरह-तरह की धमकियां भी दे रहे हैं। मनोज ने भाई की हत्या की जांच किसी एजेंसी अथवा पुलिस अधिकारी से कराये जाने की मांग की है। उसने इस सम्बंध में मुख्यमंत्री, डीजीपी, आई जी, राज्य मानवाधिकार आदि को भी पत्र भेजकर अवगत कराया है।