डायरेक्टर व सचिव पर भारी पड़ा लिपिक, बीएसए के डीओ पर भी कार्यवाही नहीं

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फर्रुखाबाद: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा0 कौशल किशोर द्वारा विभागीय वरिष्ठ लिपिक संजय पालीवाल की नियुक्ति व प्रोन्नति को अनियमित ठहराते हुए व अपराधिक अनुशासनहीनता में संलिप्त होने की रिपोर्ट के साथ सचिव बेसिक शिक्षा परिषद व निदेशक बेसिक शिक्षा को पत्र लिखकर कार्यवाही की संस्तुति की थी। पत्र के एक माह बाद भी आज तक उस पर कोई कार्यवाही न होना इस बात का प्रमाण है कि आखिर विभागीय लिपिक बीएसए तो दूर सचिव व डायरेक्टर तक पर भारी है।

विदित है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा0 कौशल किशोर ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद व डायरेक्टर बेसिक शिक्षा को संबोधित विगत 14 मार्च व 30 मार्च 2012 को लिखे पत्रों में विभागीय वरिष्ठ लिपिक संजय पालीवाल के विषय में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि वह बिना नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण किये अनियमित रूप से नगर शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कनिष्ठ लिपिक पद पर योगदान करने में येन केन प्रकारेण सफल हो गये। इस प्रकार यह अनियमित रूप से नियुक्त/सेवायोजित/पदारूण चल रहे हैं।

इसके अतिरिक्त डा0 कौशल किशोर ने इसी पत्र में संजय पालीवाल के विरुद्व अपने सामने ही शासकीय आदेश को फाड़ने व अपने नेतृत्व में अन्य परिषदीय लिपिकों को ब्लाक मुख्यालय पर न रहकर कार्य करने हेतु उकसाने, अनियमित कार्य हेतु दबाव बनाने, अनुशासनहीनता, कर्मचारी आचरण नियमावली के विरुद्व कार्य करने व अपराधिक प्रवृत्ति के होने की भी रिपोर्ट दी थी।

बीएसए ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा था कि उपरोक्त गंभीर आरोपों जिनमें नियुक्त प्राधिकारी/जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के साथ अभद्रता/अनुशासनहीनता भी शामिल है के क्रम में संजय पालीवाल के विरुद्व शीघ्र कार्यवाही किये जाने की संस्तुति की जाती है। शासन स्तर पर विभागीय अधिकारियों के पत्रों पर कितनी गंभीरता से कार्यवाही की जाती है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पत्र लिखे जाने के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को संबोधित पत्र की प्रति डायरेक्टर बेसिक शिक्षा व सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक कानपुर मण्डल कानपुर को भी दी गयी थी। इतने गंभीर आरोपों पर भी सम्बंधित के विरुद्व कोई कार्यवाही न होना अपने आप में इस बात का प्रमाण लगता है कि एक विभागीय लिपिक अपनी पहुंच के दम पर विभागीय सचिव व निदेशक तक पर भारी पड़ सकता है।