विभीषणों के पर कतरने को दिल्ली में लुइस की तैयारी

Uncategorized

:फजीहत के डर से तो गए ही नहीं:
फर्रुखाबाद:  चुनाव की समीक्षा के नाम पर दिल्ली में सलमान खुर्शीद की कोठी पर हुई कांग्रेस नेताओं की बैठक राजी- ख़ुशी नहीं निपटी। पता चला है कि समीक्षा तो इस हद तक हुई कि बड़े से बड़े नेताओं की पूरे समय बोलती बंद रही। कई नेता तो फजीहत के दर से दिल्ली गए ही नहीं। लेकिन बैठक से लौटे कई नेताओं से हुई बातचीत का लब्बोलुबाब यह है कि सलमान और लुईस खुर्शीद पांचवे नम्बर की हार के बाद भी अपने को राजनीति के फर्रुखाबादी फर्मे  में ढ़ालने को कतई तैयार नहीं है। मतलब यह कि परनाला वहीँ से गिरेगा।
दिल्ली बैठक का कांग्रेस नेताओं को अच्छा अनुभव हुआ है। बैठक में गए नेताओं की माने तो खुर्शीद दंपत्ति ने पहले ही कह दिया था कि उन्हें सलाह देने कि जुर्रत कोई न करे। वोह जो कहैं उसे केवल सुने। सूत्र बताते हैं कि सलमान ने हार वाले क्षेत्रों के नेताओं से साफ़ कहा कि या तो वे कहें कि उस क्षेत्र में उनका असर नहीं रहा या कहें कि उन्होंने चुनाव मन से नहीं लड़ाया। सलमान उन नेताओं से भी सख्त नाराज थे जिनके भाई भतीजे इस चुनाव में बसपा से जुड़े रहे। इनमे से एक नगरपालिका चुनाव में सभासद का चुनाव लड़ना चाहते हैं। बताते हैं कहा गया कि यह मान लें कि वे कहीं से चुनाव लड़ें चुनाव में उनकी खास सेवा होगी। चर्चा के दौरान सलमान  ने तौकीर मोहम्मद खान कि याद दिलाई जो सभाओं के संचालन में माहिर थे। दरअसल इस चुनाव में सलमान की सभाओं का संचालन भी काएदे से नहीं होता था। सलमान को अपने कार्य खुद गिनाने पड़ते थे। नेताओं ने कहा भी कि इस स्थिति के लिए कोई कर भी क्या सकता था। जिला अध्यक्ष आफ़ताब हुसैन ही नहीं उनके पदाधिकारी भी उतना नही बोल पाते हैं। तो सभाओं में संचालन और भाषण कौन करता। बैठक में सलमान से अधिक  मैडम नाराज दिखीं। ऐसे नेता उनके निशाने पर हैं जो चुनाव भर उन्हें गलत जानकारियां देते रहे। इनमे से अधिकांश व्यापार मंडल के पदाधिकारी हैं।

बताते हैं कि इस बैठक की सूचना नेताओ  तक तीन स्तर से भेजी गयी थी। कुछ के पास सूचना उनके कार्यालय से आई थी। कुछ को सूचना जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने दी थी। साहबगंज के एक नेता चुनाव में गा-बजाकर जुड़े थे।उन्होंने चुनाव के बाद अपना नम्बर ही बदल लिया है। उनके आने से खटकपुरा के दूसरे नेता भी नाराज थे। अब वह मैडम से बात नहीं कर रहे हैं। चुनाव में खास इंतजाम संभाले रहे इस्लाम चौधरी, इखलाक खान, शादाब हुसैन आदि नेता तो दिल्ली गये ही नहीं। चुनाव में खजाने की चावी चौधरी के पास थी तो भोजन  और वाहन के इन्त्जाम्कर्ता इखलाक खान थे। यह भी पता चला है की चुनाव में हार के बाद भी जिला अध्यक्ष किसी ईनाम की अपेक्षा में दिल्ली में रुके हैं। यह ईनाम उन्हें केंद्र के एक बड़े मंत्रालय से मिलना है और इसमें सलमान खुर्शीद की नज़र- ऐ- इनायत होना जरूरी है।