विधानसभा चुनाव: आचार संहिता के डर से प्रत्याशियों को गुप्त बैठकों का सहारा

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फर्रुखाबाद: प्रत्याशियों के लिए वोटों की गुणा-भाग के साथ ही चुनाव आयोग की कसौटी पर भी खरा उतरना बड़ी चुनौती होगी। असल में प्रत्याशियों को अपने चुनावी ‘अर्थ’ का पूरा हिसाब लगाने के साथ हर जलसे-जुलूस, गाड़ी और काफिले की पहले से अनुमति लेनी होगी। यही नहीं भ्रमण का इलाका, रूट व साथियों की तादाद भी बतानी होगी। इस दौरान पूरे खर्च का हिसाब-किताब भी अधिकारियों को बताना पड़ेगा। इसके अलावा, अपने समर्थकों की हर गतिविधि पर भी नजर रखनी होगी। प्रत्याशियों ने अब आचार संहिता के चाबुक से बचते हुए काम करने के लिये गुप्त बैठकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। समर्थकों के घरों, किसी मैरिज हाल या गुप्त स्थान पर बैठकों का दौर शुरू हो गया है।

निर्वाचन कार्यालय सूत्रों के मुताबिक, प्रत्याशियों को सबसे ज्यादा माथापच्ची चुनावी खर्च का हिसाब लगाने में करनी होगी। नामांकन से पहले उन्हें चुनावी खाता खोलने के साथ चेक बुक भी लेनी होगी। प्रत्याशियों को चुनावी खाते से 20 हजार रुपये से अधिक के खर्च का भुगतान चेक से करना होगा। नामांकन के साथ प्रत्याशी को रिटर्निंग ऑफिसर से एक रजिस्टर मिलेगा, जो तीन रंग के पन्नों का होगा। सफेद पन्ने में प्रत्याशी को रोज का लेखा-जोखा, गुलाबी में नगद खर्च और पीले पन्ने में बैंक खाते के जरिए लेन-देन का हिसाब दर्ज करना होगा। यह हिसाब रोजाना लगाना पड़ेगा। नामांकन से निर्वाचन तक तीन बार हिसाब का रजिस्टर संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर से प्रमाणित कराना होगा। प्रत्याशी को रजिस्टर में हर दिन यह भी दर्ज करना पड़ेगा कि किससे कितना पैसा और सेवाएं मिलीं। नगद खर्च होने वाले पैसों का भी आधार सहित पूरा उल्लेख करना पड़ेगा। यह काम प्रत्याशियों के लिए मुश्किल हो सकता है, इसलिए एक अतिरिक्त एजेंट नियुक्त करने की सुविधा मिलेगी।

असल में बिना रिटर्निंग ऑफिसर की अनुमति कोई चुनावी कार्यक्रम नहीं हो पाएगा। प्रचार के दौरान प्रत्याशियों के साथ वही दस लोग (अधिकतम) चल पाएंगे जिनके लिए मंजूरी ली गई होगी। बिना अनुमति वाले वाहन चलते मिले तो प्रत्याशी का चुनावी खर्च बढ़ जाएगा। प्रत्याशी को यह भी नजर रखनी होगी कि कोई व्यक्ति अपने वाहन में उसका बैनर-पोस्टर या झंडा लगाकर न घूमने पाए। ऐसे वाहन का खर्च भी प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जाएगा। प्रत्याशी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उसके समर्थक क्षेत्र में बैनर-पोस्टर भी न लगाने पाएं। राजधानी में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक ,प्रत्याशियों को किसी भी तरह का जुलूस व रैली निकालने, जनसभा की अनुमति लेनी होगी। उन्हें रिटर्निंग ऑफिसर को रोज यह जानकारी भी देनी होगी कि अगले दिन वह किस इलाके में, कितने समर्थकों के साथ और कहां तक जनसंपर्क करेंगे। इसी आधार पर वीडियो निगरानी, एकाउंटिंग टीम व उड़नदस्ते नजर रखेंगे।