गंगा घाट पर पितरों को तर्पण करने उमड़ी भीड़

FARRUKHABAD NEWS

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) पुरखों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए तर्पण व पिड दान के साथ पितृपक्ष शुक्रवार से शुरू हो गया। सुबह से ही लोगों ने गंगा घाटों व घरों में स्थान कर पितरों का जलदान तर्पण किया। लोगों ने घरों में ही पुरखों की आत्मा की शांति के लिए पूजन-अर्चन किया। पांचाल घाट पर लाखों नें गंगा में डुबकी लगाकर दान पुण्य भी किया | दिन भर गंगा घाट पर यह दौर चलता रहा|
मान्यता है कि पितृ पक्ष शुरु होते ही स्वर्गवासी हो चुके पूर्वजों की आत्मा को तर्पण व पिड दान से शांति मिलती है। इस पक्ष में किया गया श्राद्ध, तर्पण व पिडदान से खुश होकर पूर्वज अपने पुत्रों को आशीर्वाद देते हैं। गंगा में स्नान के बाद तर्पण की पुरानी परंपरा है।
आचार्य सर्वेश कुमार शुक्ल नें बताया कि पितृपक्ष में पूर्वजों का स्मरण किया जाता है, उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म किया जाता है। तमाम लोग घरों में ही श्राद्ध कर्म करते हैं। हालांकि गंगा आदि नदियों के तट पर किए गए श्राद्ध कर्म का खास महत्व है। पितरों के श्राद्ध पूजन से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गंगा , यमुना आदि नदियों के तट पर विधिवत पूजन कर श्राद्ध करना श्रेयकर माना गया है। जो लोग गंगा तट पर नहीं जा सकते हैं वे सूर्य देवता का स्मरण करते हुए लोटे में जौ, तिल, अक्षत व सफेद पुष्प लेकर घर पर ही श्राद्ध कर्म करें। आचार्य को भोजन कराने से सुख-शांति की प्राप्ति होती है।