2जी घोटाला में खुर्शीद के बचाव में केंद्र सरकार

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केंद्र सरकार 2जी घोटाले की जांच प्रभावित करने के आरोपों में घिरे कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के बचाव में उतर आई है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में मंगलवार को कहा है कि कानून मंत्री ने न तो कोई दखलंदाजी की है और न ही किसी को क्लीनचिट दी है। उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।

घोटाले को सुप्रीम कोर्ट लाने वाले एनजीओ सीपीआइएल ने अर्जी दाखिल कर खुर्शीद पर जांच में दखलंदाजी का आरोप लगाया था, जिसका आधार एस्सार लूप मामले में कानून मंत्रालय की राय को बनाया गया था। इस पर दूरसंचार विभाग, सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी किया था। अर्जी में सीबीआई से दयानिधि मारन के मामले में स्थिति रिपोर्ट तलब किए जाने का भी अनुरोध किया गया था। दूरसंचार विभाग की ओर से दाखिल हलफनामे में आरोपों को नकारते हुए सरकार ने कहा है कि मामले में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और कोर्ट उस पर संज्ञान भी ले चुकी है। ऐसे में अब मामले की निगरानी बंद कर देनी चाहिए। वैसे भी आगे निगरानी जारी रखी जाए कि नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित है। फैसला सुरक्षित होने के बाद गैर सरकारी संगठन अर्जी दाखिल नहीं कर सकता और न ही ऐसी किसी अर्जी पर विचार किया जाना चाहिए।

सरकार ने एनजीओ पर आरोप लगाया है कि वह प्रचार पाने के लिए अधिकारियों, संवैधानिक पदों पर तैनात लोगों व एजेंसियों पर आरोप लगाता है और सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश करता है। सरकार ने अटार्नी जनरल जीई वाहनवती व खुर्शीद पर लगाए गए आरोपों पर एतराज भी जताया है। हलफनामे में कहा गया है कि अटार्नी जनरल और कानून मंत्रालय की राय रिकार्ड पर है और ट्रायल कोर्ट के दस्तावेजों का हिस्सा है। कोर्ट उस पर विचार कर रहा है। अगर उसे मामले में कुछ लगता है तो वह स्वयं उस पर संज्ञान ले सकता है।

वैसे भी जांच एजेंसी किसी भी राय से बंधी नहीं है। सरकार ने कहा है कि कानूनी राय के आधार पर किसी व्यक्ति पर जो इस सुनवाई का हिस्सा भी नहीं है, आरोप लगाना गलत है। यूएएस लाइसेंस निरस्त करने के बारे में कंपनियों को भेजे नोटिस पर सरकार ने कहा है कि अभी तक उसे सिर्फ एक कंपनी की ओर से ही जवाब मिला है। दयानिधि मारन व जांच के अन्य पहलुओं पर सीबीआई जवाब देगी।