नहीं बन पाया मेरे सपनों का फर्रुखाबाद- सलमान खुर्शीद

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फर्रुखाबाद: जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से बच्चों को सोलर लाइट वितरण के दौरान केंद्रीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि हम बच्चों को जो रोशनी दे रहे हैं इससे उनका भविष्य उज्जवल होगा। वे आगे चलकर बड़े मुकाम पर पहुंचेंगे। शायद आज का दिन उन्हें तब भी याद रहेगा जब वह खुद दूसरों को रोशनी देने में सक्षम होंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि मेरे सपनों का फर्रुखाबाद अभी नहीं बन पाया है हम उसे और विकसित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी नजर में अकलियत और अकशियत के बच्चे समान हैं हम सभी के लिए बराबर कुछ न कुछ करना चाहते हैं।
Salman Khurshid Farrukhabad
इस मौके पर मौजूद विदेश मंत्री ने कहा कि फर्रुखाबाद में पिछले पांच वर्षो में हमने काफी उपलब्धियां दी हैं। जिसमें नवाबगंज का अस्पताल, दूध डेरी, आलू से संबंधित उद्योग, अगरबत्ती उद्योग लगाने के साथ कुटीर उद्योग के रूप में मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों को चूजे बांटे। आज वे ग्रामीण इस कुटीर उद्योग से अपने पैरों पर खड़े होने लगे हैं। आने वाले समय में हम इसी तरह के और भी काम करेंगे। इस अवसर पर उन्होंने अपनी बनाई हुई दामिनी और आयशा नजमों की सीडी सभी को सुनवाई। जिसमें विदेश मंत्री ने स्वंय भी शेरे पढ़ी हैं। इस कार्यक्रम में एजूकेशन मूवमेंट सोसायटी की राय पर छात्र-छात्राओं को 507 सोलर लाइटें दी गईं। कार्यक्रम में कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनिल तिवारी, मंत्री प्रतिनिधि अनिल मिश्रा, लुईस खुर्शीद, शहर कांग्रेस प्रवक्ता शिवाशीष तिवारी, मृत्युंजय शर्मा, अवधेश दीक्षित, कौशलेंद्र यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष आफताब हुसैन, पुन्नी शुक्ला समेत सैकड़ों की तादाद में लोग मौजूद रहे।
Salman Khurshid Farrukhabad
उधर, मदरसा बोर्ड के बच्चों की उपेक्षा किए जाने से बराय फरोग उर्दू फारसी कमेटी के लोगों ने विरोध दर्ज कराया और कार्यक्रम का वहिष्कार कर चले गए। इसके बाद फतेहगढ़ में बैठक कर निर्णय लिया गया कि एजूकेशनल सोसाइटी द्वारा मदरसा बोर्ड के किसी भी विद्यार्थी को सोलर लाइट हेतु शामिल नहीं किया गया। जिससे मदरसा बोर्ड के छात्रों में गहरा रोष है। बराय फरोग उर्दू अरबी फारसी कमेटी के जेरे एत्माम सम्मान समारोह होगा। जिसमें मदरसा बोर्ड के बच्चों को सम्मानित करने के लिए सपा के लोकसभा प्रत्याशी रामेश्वर सिंह यादव को बनाया जाएगा। बैठक में शमसुल कमर, डा0 शाकिर अली मंसूरी, तौसीफ खां, हाजी सुल्तान मंसूरी, आफताब मंसूरी, शाहनूर खां आदि मौजूद रहे।

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