नसबंदी में दिया पट्टा खारिज कर कब्जेदार से तहसीलदार ने वसूले 30 हजार

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JAHANGANJ (FARRUKHABAD) :  20 वर्ष पूर्व एक ग्रामीण महिला ललिता को नसबंदी कराने पर प्रोत्साहन के तौर पर पांच बीघे का पट्टा दिया गया था। लेकिन पट्टा नम्बर 3 का होने की बजह से तहसीलदार द्वारा खारिज कर दिया गया। पट्टे की भूमि पर कब्जेदार महिला के पति से गुरुवार को तहसीलदार द्वारा 30 हजार रुपये रसीद काटकर वसूल लिये गये।lalita

थाना जहानगंज क्षेत्र के ग्राम सरफुद्दीनपुर, मधवापुर निवासी देशराज की पत्नी ललिता ने 20 वर्ष पूर्व नसबंदी करवायी थी। उस समय शासन द्वारा प्रलोभन दिया गया था कि नसबंदी कराने वाली महिला को 5 बीघा पट्टा दिया जायेगा। ललिता को भी नसबंदी कराने पर 5 बीघे का पट्टा दिया गया था। 20 वर्ष पूर्व दिया गया पट्टा अब अच्छी जमीन बन चुकी है और अच्छी फसल होती है।

20 वर्ष पूर्व दिया गया पट्टा तहसीलदार द्वारा यह कहकर निरस्त कर दिया गया कि 3 नवम्बर का पट्टा शासन द्वारा ही निरस्त कर दिया गया। प्रधान मीना देवी व लेखपाल विजय पाठक द्वारा पट्टे से कब्जा छोड़ने को कहा गया। लेकिन ललिता के पति देशराज ने पट्टे से कब्जा नहीं छोड़ा। जिसके बाद तहसीलदार एक बार देशराज से जुर्माना भी वसूल चुके थे।

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गुरुवार को देशराज पट्टे की जमीन पर खड़ी आलू की फसल की खुदाई करवा रहे थे। 13 मजदूर आलू की खुदाई कर रहे थे। इसी दौरान प्रधान पति व लेखपाल ने पहुंचकर आलू की खुदाई रुकवा दी। गुरुवार को सुबह तहसीलदार सदर आर पी चौधरी, जहानगंज थानाध्यक्ष राघवन सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।

तहसीलदार ने देशराज से कहा कि पूरा माल अभी ले जायेंगे अन्यथा जुर्माना भर दो । मौके पर मौजूद ग्रामीणों व तहसीलदार द्वारा 70 हजार रुपये के आलू होने का अनुमान लगाया। जिस पर 35 हजार रुपये का जुर्माना देने को कहा गया। मौके पर ही 30 हजार रुपये की तहसीलदार द्वारा रसीद काट दी गयी और आलू उठाने को कह दिया।field