FARRUKHABAD (विशेष संवाददाता) :स्कूल न जाने वाले या बीच में स्कूल छोड़कर घर बैठ जाने वाले ड्रापआउट बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने के लिये सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत वैकल्पिक शिक्षा केंद्रों के खोले जाने का प्राविधान है। शासन की ओर से इसके लिये बाकायदा प्रतिवर्ष लाखों रुपये का बजट अलग से स्वीकृत होता है। परंतु जहां स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई ही चौपट हो वहां इन ड्रापआउट बच्चों की सुध कौन ले। परंतु लाखों रुपये के इस बजट के बंदरबांट के लिये बेसिक शिक्षा के अधिकारियों ने अत्यंत कुटिल चक्रव्यूह रच रखा है।
जिस स्कूल में यह केंद्र खोला दिखाया जाता है, उसमें उसी स्कूल के कुछ बच्चों का नामांकन दिखा दिया जाता है। अगर कोई अधिकारी कभी निरीक्षण की औपचारिकता पूर्ण करने आ भी गया तो विद्यालय के बच्चों को ही केंद्र में पढ़ता दिखा दिया जाता है। इस प्रकार इन केंद्रों पर अनुदेशक के मानदेय, बच्चों की कॉपी-किताबों, बस्ते, ड्रेस आदि पर खर्च के नाम पर लाखों रूपये सूखे-सूखे डकार लिये जाते हैं। जनपद में बेसिक शिक्षा के हाल बेहाल हैं। एक तरफ प्राइमरी विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं तो दूसरी तरफ जो भी शिक्षक विद्यालयों में मौजूद भी हैं वह भी शिक्षण कार्य में रुचि लेने के बजाय, ड्रेस वितरण, मिड डे मील वितरण, जूते मोजे वितरण, ड्राप आउट बच्चों के नाम पर बजट हड़पने में जुटे हुए हैं। ऐसे ही बजट हड़पने के खेल की एक बानगी यहां प्रस्तुत है-
नगर के नाला सिमत सिमाल मोहल्ले के सरकारी स्कूल में 95 फ़ीसदी फर्जी छात्र-
शहर के नाला सिम्त सुमाल स्थित प्राथमिक विद्यालय में वैकल्पिक शिक्षा केन्द्र प्रभारी प्रहलाद सिंह द्वारा चलाया जा रहा है। प्रहलाद सिंह ने वैकल्पिक शिक्षा योजना के तहत 11 ड्राप आउट बच्चों का एडमीशन अपने केन्द्र पर दिखाया। लेकिन इन 11 छात्र छात्राओं में 9 छात्र वह हैं जो पूर्व में ही नाला सिम्त सुमाल प्राथमिक विद्यालय में दर्ज हैं। शेष मात्र 2 ऐसे छात्र हैं जो इस केन्द्र पर नामांकित हैं, परंतु यह बच्चे हमको तो कहीं दिखे नहीं। हो सकता है कि यह बच्चे हो हीं न और अनुदेशक महोदय की कल्पना के प्राणी हों।
ड्राप आउट बच्चों के तौर पर वैकल्पिक शिक्षा केंद्र में नामांकित छात्रों कक्षा 2 की छात्रा नेहा खान पुत्री स्व0 नफीश खान, कक्षा 2 के ही छात्र तालिफ पुत्र यामीन, हर्ष दिवाकर पुत्र अनिल दिवाकर, कोमल श्रीवास्तव पुत्र दिनेश श्रीवास्तव, सोहित खान पुत्र अतीक खान, कक्षा 3 के छात्र अजमत अली पुत्र लालू खान, नीलम बाथम पुत्री राकेश बाथम, कक्षा दो की छात्रा शिल्पी श्रीवास्तव पुत्र दिनेश श्रीवास्तव वैकल्पिक शिक्षा केन्द्र नाला सिम्त सुमाल में दर्ज है। (चित्रों में मौजूद हाजिरी रजिस्टर से पुष्ठी की जा सकती है)
केंद्र प्रभारी या अफसर कौन गटक गया सरकारी बजट?
इस प्रकार ये साफ दिखायी दे रहा है कि केन्द्र प्रभारी प्रहलाद सिंह द्वारा घोटाला करने के लिए फर्जी तरीके से बच्चों की जांच किये बगैर ही वह बच्चे ड्राप आउट में शामिल कर लिये, जो पहले से ही उसी विद्यालय में अध्ययनरत चल रहे हैं| उसी स्कूल में बैठ कर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बच्चों की कॉपी-किताबों, बस्ते, ड्रेस आदि पर खर्च के नाम पर विभागीय बजट का 9 हजार 220 रुपये जिनके बिल वाउचर केंद्र के रजिस्टर में लगे हैं, विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से हड़प कर लिये गये। उपस्थिति रजिस्टर के अनुसार केन्द्र में पंजीकृत छात्र प्रति दिन बच्चों के मुताबिक उन्होंने कभी भी स्कूल नहीं छोड़ा न ही वह स्कूल से कभी भागे हैं।
अधिकारी ने किया फर्जीवाडा- प्रधानाध्यापिका
वहीं इस सम्बंध में प्रधानाध्यापिका प्रेमा देवी से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता कि किस अधिकारी ने उनके स्कूल की जांच की और कैसे पता लगा लिया कि उनके स्कूल में इतने बच्चे ड्राप आउट हैं।