डीएम, कमिश्नर को दिखाया ठेंगा, निरीक्षण के लिए बेसिक शिक्षा में नहीं खोले ताले

FARRUKHABAD NEWS

फर्रुखाबाद: अग्रिम सूचना देने के बाबजूद बेसिक शिक्षा विभाग में निरीक्षण के लिए पहुचे  कमिश्नर कानपुर और जिलाधिकारी के लिए ताले नहीं खोले गए| मौके पर मौजूद सभी अधिकारियो की कमिश्नर ने जमकर लताड़ लगाई| कार्यालय में गंदगी देख जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित मौके पर मौजूद बाबुओ की जमकर लताड़ लगायी गई|पोल खुलने के डर से सहायक शिक्षा अधिकारियो और लेखाधिकारी ने अपने कमरों के ताले नहीं खोले|

कमिश्नर कानपुर सुभाष चन्द्र वर्मा मंगलवार देर शाम लगभग 6  बजे जिला बेसिक शिक्षा विभाग में निरीक्षण के लिए पहुचे| निरीक्षण के लिए हालाँकि पहले 4 बजे का समय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को दे दिया गया था मगर मौसम ख़राब होने की वजह से कमिश्नर जिलाधिकारी मोनिका रानी और मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र पेंसिया के साथ 6 बजे के बाद कार्यालय पहुचे तो बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अलावा सभी कार्यालय बंद हो गए थे| जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अग्रिम सूचना के बाबजूद चपरासी और बाबू दफ्तर से चले गए थे या भगा दिए गए थे| मौके पर बाबू मनोज श्रीवास्तव, संजय पालीवाल और सुरेन्द्र अवस्थी के साथ साथ लेखाधिकारी और सभी खंड शिक्षा अधिकारी मौजूद थे|

कमिश्नर ने लेखधिकारी की जमकर लताड़ लगायी और अपना कमरा खोल निरीक्षण कराने को कहा तो लेखधिकारी अजीत सिंह ने चाबी न होने का बहाना बना दिया| परिसर में सहायक शिक्षा अधिकारियो के कमरे खुलवाने को बोला गया तो उनकी भी चाबी न होने का बहाना बना दिया गया| कुल मिलाकर निरीक्षण में रजिस्टर और फाइलें चेक करने की जगह मोबाइल की रोशनी में  दफ्तरों की दीवारों पर पान की पींके, मकड़ी के जाले और छत पर कूड़ा करकट का निरीक्षण करके कमिश्नर चले गए| वैसे रजिस्टर का मोयना तो चार दिन पहले जिलाधिकारी मोनिका रानी करके जा ही चुकी थी| अफसरों ने मीडिया की मौजूदगी में अपनी अपनी भड़ास का दिखावा कर निरीक्षण पूरा कर दिया|

वैसे रिटायरमेंट में 5 महीने का समय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रामसिंह बड़े ही करीने से निपटा रहे है| छापो में डांट डपट तो सरकारी नौकरी का एक भाग है| इसमें कोई बेज्जती नहीं होती| पद और कुर्सी सलामत रहे इसमें माहिर होने का नाम ही सरकारी अफसरी है| वैसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से सभी खुश है| सांसदों और विधायको के काम हो जाते है, अफसरों को भी नाराज नहीं होने देते| यही चाहिए नौकरी में| देश के नौनिहालों को शिक्षित करने के जिस उद्देश्य से तैनाती है उसमे कोई खोपड़ी लड़ाने की जरुरत नहीं| यही वो विभाग है जहाँ सर्विस बुक खुद अपने पास रखी जाती है| पुरानी फ़ाइल कोई होती नहीं| सीट बदलने पर बाबू एक दूसरे को रजिस्टर नहीं देते| नयी सीट नया बाबू और नया रजिस्टर…….इसीलिए तो बंद ताले का निरीक्षण ज्यादा सुरक्षित है…….